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ट्राई ने ‘एक्सेस (वायरलाइन और वायरलेस) और ब्रॉडबैंड (वायरलाइन और वायरलेस) सेवा विनियम, 2024 की गुणवत्ता सेवा मानकों’ में संशोधन के मसौदे पर परामर्श पत्र जारी किया
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने आज ‘एक्सेस (वायरलाइन और वायरलेस) और ब्रॉडबैंड…
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सरकार ने विदेश व्यापार नीति 2023 के तहत इन्वेंट्री-आधारित सीमा पार ई-कॉमर्स निर्यात ढांचा अधिसूचित किया
यह ढांचा पंजीकृत निर्यातकों के माध्यम से केवल इन्वेंट्री-आधारित निर्यात संचालन को…
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संसद प्रश्न: इसरो के टक्कर बचाव अभियानों (सीएएम) के बारे में जानकारी
निम्न पृथ्वी कक्षा – एलईओ यानी 2000 किलोमीटर से कम ऊंचाई पर मौजूद उपग्रह…
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प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 और 35(ए) के निरसन के सात वर्ष पूरे होने पर उसके महत्व के बारे में बताया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अनुच्छेद 370 और 35(ए) के ऐतिहासिक निरसन के सात…
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सड़कों की नई तस्वीर: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के इकोसिस्टम का उदय
भारत तेज़ी से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और साफ़–सुथरे भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बन रही है। 2016 के बाद से ईवी की बिक्री में लगभग 46 गुना बढ़ोतरी हुई है, जो ग्राहकों की पसंद में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। निर्यात 2020 में 12 लाख अमेरिकन डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ अमेरिकन डॉलर हो गया है। इससे भारत एक उभरते हुए ईवी केन्द्र के तौर पर स्थापित हो रहा है। ‘नेशनल मिशन ऑन मैन्युफैक्चरिंग‘, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए ‘पीएलआई स्कीम‘ और ‘पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एनहांसमेंट स्कीम‘ (पीएम ई–ड्राइव) जैसी सरकारी योजनाएं एक ज़्यादा आत्मनिर्भर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इकोसिस्टम को मज़बूत कर रही हैं। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर भारत का कदम पूरे भारत में भीड़-भाड़ वाले शहरों में रोज़ाना आने-जाने और छोटे शहरों में ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ (यानी यात्रा के आखिरी चरण की सुविधा) के तरीकों को पूरी तरह से नए सिरे से विचार किया जा रहा है। इस बदलाव के केंद्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी है। यह तकनीकी बदलाव देश की जलवायु रणनीति और टिकाऊ परिवहन के विज़न के लिए महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। सरकारी प्रोत्साहन, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और तेज़ी से हो रही तकनीकी प्रगति की वजह से, ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) एक राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गए हैं और ऑटोमोबाइल उद्योग के भविष्य को आकार दे रहे हैं। भारत में मोबिलिटी में हो रहा बदलाव न सिर्फ़ पर्यावरण के लिहाज़ से ज़रूरी है, बल्कि यह एक आर्थिक मौक़ा भी है। यह देश के सबसे बड़े और सबसे प्रभावी उद्योगों में से एक को नया रूप दे रहा है। यह बदलाव ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए एक रणनीतिक ज़रिया बनकर उभर रहा है। साथ ही, इससे जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम हो रही है और अर्थव्यवस्था के लिए कम कार्बन उत्सर्जन वाली, कुशल विकास की राह बन रही है। इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्या है?ईवी एक ऐसा वाहन है जो इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है और बैटरी में जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। इसे बाहरी पावर सोर्स से रिचार्ज किया जा सकता है।ईवी चार तरह के होते हैं:- बैटरी ईवी (बीईवी) जो पूरी तरह से इलेक्ट्रिक होते हैं।- हाइब्रिड ईवी (एचईवी) और प्लग–इन एचईवी, जो वाहन को चलाने के लिए इंटरनल कंबशन इंजन और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों का इस्तेमाल करते हैं। पीएचईवी में ज़्यादा देर तक सिर्फ़ इलेक्ट्रिक मोड में चलने के लिए बाहरी तौर पर रिचार्ज होने वाले बैटरी पैक भी होते हैं।- फ्यूल सेल ईवी (एफसीईवी), जिनमें केमिकल एनर्जी से इलेक्ट्रिक एनर्जी बनाई जाती है। भारत में ईवी क्रांति: पिछला दशक भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की शुरुआत 2015 में हुई। इसकी शुरुआत ‘नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान‘ और ‘एफएएमई स्कीम‘ को लॉन्च करके की गई, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी ) को अपनाने को बढ़ावा दिया जा सके। यह कदम कुछ खास रणनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर उठाया गया था। इनमें पेट्रोलियम ईंधन के बढ़ते आयात बिल को कम करना और शहरों में बिगड़ते वायु प्रदूषण की समस्या से निपटना शामिल था। साथ ही, इसका मकसद परिवहन क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना भी था, जो भारत के कुल उत्सर्जन का लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा है। नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान (एनईएमएमपी 2020)एनईएमएमपी ने 2020 भारत में ईवी (इलेक्ट्रिक वाहनों) को अपनाने और उनके घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार किया है। इसके दो मुख्य उद्देश्य हैं, ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करना और साफ़-सुथरी, टिकाऊ मोबिलिटी को बढ़ावा देना।भारत में (हाइब्रिड एवं) ईवी को तेज़ी से अपनाना और उनका विनिर्माण बढ़ाना (एफएएमई इंडिया)एनईएमएमपी 2020 के तहत, ईवी को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए 2015 में एफएएमई इंडिया योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत खरीदारों को प्रोत्साहन दिए गए और चार्जिंग अवसंरचना के निर्माण तथा उत्पादन में मदद की गई। इसका पहला चरण मार्च 2019 तक चला, जिसके बाद दूसरा चरण शुरू हुआ, जिसे अप्रैल 2024 तक पांच वर्षों के लिए लागू किया गया। कोविड के बाद के समय, यानी वित्तीय वर्ष 22 में एक अहम मोड़ आया। खास नीतिगत प्रोत्साहन, ज़्यादा सब्सिडी और गाड़ियों की बेहतर उपलब्धता की वजह से ईवी को अपनाने की रफ़्तार तेज़ी से बढ़ी। इस दौरान बाज़ार में एक बड़ा ढांचागत बदलाव भी देखने को मिला। जहां वित्तीय वर्ष 20 – वित्तीय वर्ष 21 में शुरुआत में ई-रिक्शा का दबदबा था, वहीं जल्द ही इलेक्ट्रिक टू–व्हीलर्स भी काफ़ी लोकप्रिय हो गए। वित्तीय वर्ष 25 तक, वे एक प्रमुख सेगमेंट बन गए, जो अनौपचारिक, शेयर्ड मोबिलिटी से मुख्यधारा के निजी और कमर्शियल इस्तेमाल की ओर एक बड़े बदलाव का संकेत था।…
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पश्चिमी बंगाल में पीएम जनमन और डीएजेजीयूए
जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि 15 नवंबर 2023 को, माननीय…
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अनुसूचित जनजाति छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत छात्रवृत्तियों का बकाया
जनजातीय कार्य राज्यमंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि जनजातीय कार्य मंत्रालय का…
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स्वामित्व योजना और ग्रामीण संपत्ति स्वामित्व अधिकार
स्वामित्व योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति के…