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वैज्ञानिकों ने हाइड्रोजन की आरंभिक चमक का मानचित्र तैयार किया, जिससे ब्रह्मांड के लिए एक नई खिड़की खुली
भारत के शोधकर्ताओं को शामिल करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत,…
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सीएक्यूएम ने पराली जलाने की रोकथाम, वाहनों और औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण की तैयारियों की समीक्षा की
वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों के सख्त, समन्वित और समयबद्ध कार्यान्वयन की मांग…
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Lijjat Papad Embodies ‘Vocal for Local’ and ‘Atmanirbhar Bharat’: KVIC Chairman Manoj Goyal
MUMBAI — Addressing women artisans at an event in Mumbai, Khadi and…
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खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने स्वच्छता अभियानों और जन जागरूकता गतिविधियों के साथ स्वच्छता ही सेवा-2026 अभियान जारी रखा है
स्वच्छता ही सेवा-2026 के माध्यम से डीएफपीडी स्वच्छता, आरोग्य और सामुदायिक भागीदारी…
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आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) के अगस्त 2026 के मासिक बुलेटिन पर प्रेस नोट
समग्र श्रम बल भागीदारी में और वृद्धि दर्ज की गई ग्रामीण क्षेत्रों…
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प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात की
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन…
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Uncategorized, Breaking News, Desh, Govt Policies, Latest News, News, Politics & Elections, Top Stories33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के राजनीतिक नेतृत्व के लिए नए रास्ते खोलेगा: लोकसभा अध्यक्ष
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की पैरवी पुरजोर तरीके से की। उन्होंने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान ऐतिहासिक आवश्यकता है। विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं और पेशों में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति से वो दिन दूर नहीं जब 50 प्रतिशत नेतृत्व महिलाओ के हिस्से होगा। आधी आबादी की आने वाले वर्षों में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में महिलाओं की एक नई पीढ़ी उभरकर सामने आएगी। श्री बिरला ने आज फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा आयोजित “लिंग-उत्तरदायी शासन” विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं। श्री बिरला ने कहा कि अब ध्यान केवल सहायता और अवसर प्रदान करने से हटकर महिलाओं को नीतियों, कार्यक्रमों और कानूनों को सक्रिय रूप से आकार देने में सक्षम बनाने पर होना चाहिए। महिलाओं को स्वयं उन कानूनों को तय करने में भाग लेना चाहिए जो उनकी चिंताओं और आकांक्षाओं का समाधान कर सकें। उन्होंने समानता के प्रति संवैधानिक प्रतिबद्धता और महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण व आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए विभिन्न विधायी उपायों का जिक्र किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि राष्ट्रीय महिला आयोग जैसी संस्थाओं की उभरती चुनौतियों की पहचान करने और समाधान सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। महिला विधायक—लोकसभा, राज्य विधानसभाओं, पंचायतों और नगर पालिकाओं के माध्यम से—महिलाओं के मुद्दों को उचित मंचों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं कि कानून जमीनी वास्तविकताओं के अनुकूल हों। श्री बिरला ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने कहा कि हर महिला के पास रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक सशक्तिकरण के अवसर होने चाहिए। उन्होंने महिलाओं से ऐसी प्रभावी नीतियों, योजनाओं और विधायी उपायों पर विचार-विमर्श करने का आह्वान किया जो अभाव और कठिनाइयों का सामना कर रही महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत कर सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि इस कार्यशाला में प्रतिभागी विधायक अपने अपने क्षेत्र के अनुभवों और सफल पहलों को साझा करें , ताकि सर्वोत्तम प्रथाओं को देश भर में अपनाया जा सके। इसके अलावा, उन्होंने महिलाओं में उन कानूनों और संस्थागत तंत्रों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया जो उनकी चिंताओं के समाधान के लिए उपलब्ध हैं। यह उल्लेख करते हुए कि महिलाएं हमेशा से भारत के परिवर्तन के मोर्चे पर आगे रही हैं—स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र-निर्माण से लेकर लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने तक—श्री बिरला ने रेखांकित किया कि यह कार्यक्रम महिला विधायकों को अपने अनुभवों, विचारों और दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान करने के लिए एक आवश्यक मंच प्रदान करता है, जिससे उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होती है। विभिन्न राज्यों इन और केंद्र शासित प्रदेशों की महिला विधायकों की भागीदारी यह दर्शाती है कि वे विधायी मंचों के माध्यम से महिलाओं की आकांक्षाओं को आवाज देने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए अपने कौशल को और धार देने का आग्रह किया। एक जीवंत लोकतंत्र में संवाद के महत्व पर जोर देते हुए श्री बिरला ने कहा कि जनता की चुनौतियों और आकांक्षाओं का समाधान निरंतर चर्चा और विचार-विमर्श के माध्यम से सबसे अच्छे ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने रेखांकित किया कि संवेदनशीलता महिलाओं के नेतृत्व की एक मुख्य ताकत है, जो लोगों की चिंताओं की गहरी समझ और प्रभावी समाधान खोजने की अधिक क्षमता को बढ़ावा देती है। उन्होंने जोड़ा कि एक संवेदनशील और उत्तरदायी कार्य संस्कृति सामाजिक चुनौतियों से निपटने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।…
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लक्ज़मबर्ग के अर्थव्यवस्था, एसएमई, ऊर्जा एवं पर्यटन मंत्री श्री लेक्स डेल्स ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की; मुख्य रूप से अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग के ठोस क्षेत्रों की पहचान करने का प्रस्ताव दिया
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत-लक्ज़मबर्ग संबंध नये क्षेत्रों में सहयोग…
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स्वस्थ जनसंख्या विकसित राष्ट्र के लिए आवश्यक है : डॉ. मनसुख मांडविया
डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिट…