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  • विश्व हाथी दिवस

    हाथियों, पारिस्थितिकी तंत्र और सह-अस्तित्व का उत्सव विश्व हाथी दिवस हाथियों के…

  • भारत की न्यायाधिकरण प्रणाली में सुधार

    न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 का उद्देश्य अधिक स्वतंत्र, पारदर्शी एवं…

  • भारत में वित्तीय समावेशन: हर नागरिक को बैंकिंग सुविधा, प्रत्येक परिवार का सशक्तिकरण

    प्रस्तावना वित्तीय समावेशन भारत के एकसमान विकास के दृष्टिकोण का केंद्रबिंदु है। बीते एक दशक में, भारत ने बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, क्रेडिट, बीमा, पेंशन और निवेश के अवसरों तक पहुंच का विस्तार किया है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक-केंद्रित सुधारों ने इस परिवर्तन को गति प्रदान की है। भारत ने सार्वभौमिक बैंक खाता स्वामित्व से आगे बढ़कर औपचारिक वित्तीय प्रणाली में सक्रिय भागीदारी की ओर कदम बढ़ाया है। इस बदलाव ने लाखों परिवारों, उद्यमियों और व्यवसायों का सशक्तिकरण किया है। भारत में वित्तीय समावेशन के प्रमुख संकेतक कई संकेतक पूरे भारत में वित्त की पहुंच, इंफ्रास्ट्रक्चर और भागीदारी के विस्तार में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाते हैं। आरबीआई का वित्तीय समावेशन (एफआई) सूचकांक आरबीआई का एफआई सूचकांक वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता, इस्तेमाल और गुणवत्ता के संदर्भ में वित्तीय समावेशन की सीमा को मापता है। यह देश भर में औपचारिक वित्तीय सेवाओं के विस्तार में हुई प्रगति का एक व्यापक संकेतक है। एफआई सूचकांक मार्च 2017 में 43.4 से बढ़कर मार्च 2026 में 70.0 हो गया, जो तीनों आयामों में व्यापक सुधार को दर्शाता है। विश्व बैंक ग्लोबल फिंडेक्स ग्लोबल फिंडेक्स डेटाबेस वित्तीय समावेशन पर डेटा का विश्व का अग्रणी स्रोत है। यह विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में वयस्कों की ओर से वित्तीय सेवाओं तक पहुंच और उनके इस्तेमाल का आकलन करता है। ग्लोबल फिंडेक्स 2025 भारत की वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित करता है। 2011 से खाता स्वामित्व 89% तक पहुंच गया, जो बीते दशक में औपचारिक वित्तीय सेवाओं तक पहुंच और सक्रिय खाता इस्तेमाल में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी को दर्शाता है। बैंकिंग पहुंच नेटवर्क बैंक शाखाएं भारत की औपचारिक बैंकिंग प्रणाली की आधारशिला बनी हुई हैं। ये पूरे देश में बचत, ऋण और अन्य वित्तीय सेवाएं प्रदान करती हैं। भारत में (17 जुलाई 2026) 1.81 लाख से अधिक बैंक शाखाएं हैं। बैंकिंग सेवाएं शाखाओं, बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स और इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) आउटलेट्स के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं। 6 मार्च 2026 तक, देश के 99.92% गांवों में 5 किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग आउटलेट्स उपलब्ध हैं। आईपीपीबी 1.65 लाख (17 जुलाई 2026) से अधिक डाकघरों के माध्यम से अंतिम छोर तक बैंकिंग सेवाओं को सुदृढ़ करता है। यह 5.57 लाख गांवों और कस्बों में फैले 11 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएं प्रदान करता है।…

  • सभी के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा

    पिछले 12 वर्षों में, भारत सरकार ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को काफी मजबूत किया…

  • भारतीय कृषि और संबद्ध क्षेत्रों का नया युग

    “विकास, लचीलापन और खाद्य सुरक्षा को प्रोत्साहन” कृषि के कायाकल्प को प्रोत्साहन भारत के कृषि और…

  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सुशासन का सशक्तिकरण

    डिजिटल रूप से सशक्त और नागरिक-केंद्रित भारत का निर्माण डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर…

  • बदलते भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों से आगे, क्षमता निर्माण की ओर  

    विकास की नींव रखना पिछले 12 सालों में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में…

  • राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण(एनसीएलटी) ने ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाएँ शुरू कीं

    राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण(एनसीएलटी) ने आज अपनी ई-निरीक्षण और ई-प्रमाणित प्रति सेवाओं…

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