स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में आने वाले रोगियों के जेब खर्च (ओ ओ पी ई ) को कम करने के लिए, सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एन एच एम ) के अंतर्गत निःशुल्क औषधि सेवा पहल (एफ डी एस आई ) शुरू की है। इसके अंतर्गत, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को उनके समग्र संसाधन बजट के भीतर उनकी कार्यक्रम कार्यान्वयन योजनाओं (पी आई पी ) में निर्धारित आवश्यकताओं के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सुविधा अनुसार आवश्यक औषधियों की सूची (ईएमएल) उपलब्ध कराने की सिफारिश की है:
- उप स्वास्थ्य केंद्र आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एसएचसी-एएएम) – 113
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पीएचसी-एएएम) – 179
- सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) – 301
- उप-जिला अस्पताल – 318
- जिला अस्पताल (डीएचएस) – 381
इस योजना के अंतर्गत दवाओं की खरीद और सुदृढ़ खरीद प्रणाली, गुणवत्ता आश्वासन, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और भंडारण, चिकित्सकीय पर्चे का लेखा-परीक्षण, शिकायत निवारण, मानक उपचार दिशानिर्देशों के प्रसार और आवश्यक दवाओं की खरीद और उपलब्धता की वास्तविक स्थिति की निगरानी के लिए आईटी-सक्षम प्लेटफॉर्म डीवीडीएमएस (ड्रग्स एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम) की स्थापना के लिए सहायता उपलब्ध है। राष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन गतिविधियों की निगरानी को सुगम बनाने के लिए एक केंद्रीय डैशबोर्ड विकसित किया गया है।
इसके अलावा, एनएचएम के अंतर्गत एफडीएसआई सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति और कार्यान्वयन स्थिति का आकलन और निगरानी करने के लिए वार्षिक रूप से सामान्य समीक्षा मिशन (सीआरएम) आयोजित किए जाते हैं।
एफडीएसआई के अंतर्गत खरीदी गई दवाओं की गुणवत्ता को इस पहल के परिचालन दिशानिर्देशों के माध्यम से सुनिश्चित किया जाता है जो इस प्रकार हैं:
- सभी दवाओं को सुदृढ़ खरीद तंत्र के माध्यम से गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) के अनुरूप निर्माताओं से ही प्राप्त किया जाना चाहिए।
- स्वास्थ्य सुविधाओं में वितरण से पहले प्रत्येक बैच की आपूर्ति के बाद जांच की जाती है।
पीएमबीजेपी योजना की कार्यान्वयन एजेंसी, फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई), तमिलनाडु में संचालित जन औषधि केंद्रों (जेएके) सहित अन्य जन औषधि केंद्रों में आवश्यक दवाओं सहित दवाओं की उपलब्धता की लगातार निगरानी करती है।
आपूर्ति में किसी भी कमी को दूर करने और जन औषधि केंद्रों में उत्पादों की सुचारू आपूर्ति और उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित उपाय लागू किए गए हैं:
- सितंबर 2024 से योजना के उत्पाद बास्केट में सबसे अधिक बिकने वाली 100 दवाओं और बाजार में सबसे तेजी से बिकने वाली 100 दवाओं सहित 200 आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाओं के जन औषधि केंद्रों द्वारा स्टॉक करने को प्रोत्साहित किया गया है। इसके अंतर्गत जन औषधि केंद्रों के मालिक इन दवाओं के लिए अपने द्वारा रखे गए भंडारण के आधार पर मासिक प्रोत्साहन के पात्र हैं।
- एक संपूर्ण सूचना प्रौद्योगिकी-सक्षम आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली स्थापित की गई है जो पांच गोदामों और देश भर में वितरकों के बढ़ते नेटवर्क (वर्तमान में 42 की संख्या में) से युक्त एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली को जोड़ती है।
- इसके अतिरिक्त आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, योजना के कार्यान्वयनकर्ता, फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) द्वारा 400 तेजी से बिकने वाले उत्पादों की नियमित निगरानी की जाती है और इनकी मांग का निरंतर अनुमान लगाया जाता है। साथ ही, खरीद प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए अनुमान लगाने की विधि को डिजिटल बनाने के लिए कदम उठाए गए हैं।
इस योजना के दायरे को और बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने मार्च 2027 तक 25,000 जन औषधि केंद्र (जेएके) खोलने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने जन औषधि केंद्रों (जेएके) को खोलने के लिए फ्रेंचाइजी मॉडल अपनाया है। तमिलनाडु सहित पूरे देश में कोई भी व्यक्तिगत उद्यमी, गैर-सरकारी संगठन, समितियां, ट्रस्ट, फर्म, निजी कंपनियां आदि इस योजना की वेबसाइट ( www.janaushadhi.gov.in ) के माध्यम से जन औषधि केंद्र खोलने के लिए आवेदन कर सकते हैं। कम सुविधा वाले क्षेत्रों में जन औषधि केंद्र खोलने में सुविधा प्रदान करने के लिए, पीएमबीआई संबंधित प्रशासन/जिला मजिस्ट्रेट को सरकारी अस्पतालों में आवेदकों को मुफ्त स्थान उपलब्ध कराने के लिए नियमित रूप से पत्र लिख रहा है।
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना के अंतर्गत 2,110 दवाइयाँ और 315 शल्य चिकित्सा सामग्री, चिकित्सा उपभोग्य वस्तुएँ और उपकरण शामिल हैं। इसमें हृदय रोग, कैंसर रोधी, मधुमेह रोधी, संक्रमण रोधी, एलर्जी रोधी और पाचन संबंधी दवाएँ और पोषक तत्व जैसे सभी प्रमुख चिकित्सीय समूह शामिल हैं। प्रयोगशाला अभिकर्मकों और टीकों को छोड़कर, राष्ट्रीय आवश्यक औषधियों की सूची में शामिल लगभग सभी जेनेरिक दवाएँ इस उत्पाद सूची का हिस्सा हैं। भंडारण की कमी को कम करने और तमिलनाडु सहित पूरे देश में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी और उचित सुधारात्मक उपाय किए जाते हैं।
यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित जवाब में दी।
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