भारत सरकार के औषधि विभाग (डीओपी) ने हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के हारोली में ‘बल्क ड्रग पार्क प्रोत्साहन योजना’ के अंतर्गत बल्क ड्रग पार्क के विकास के लिए 11.10.2022 को 1000 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। इसमे से 20.02.2023 को 225 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई थी। राज्य सरकार ने भी 118.46 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है और वित्त वर्ष 22-23 में राज्य के हिस्से के रूप में 35.53 करोड़ रुपये की धनराशि साझा अवसंरचना सुविधाओं (सीआईएफ) के विकास के लिए जारी की है। जारी की गई धनराशि का वर्षवार उपयोग निम्नानुसार है:
(करोड़ रुपये में)
| वित्तीय वर्ष | केंद्रीय हिस्सा | राज्य का हिस्सा |
| 2023-24 | 55.41 | 0 |
| 2024-25 | 0 | 0 |
| 2025-26 | 43.77 | 0.24 |
| 2026-27 | 16.82 | 0 |
| कुल | 116.00 | 0.24 |
जारी की गई धनराशि का उपयोग स्वीकृत परियोजना घटकों और नामित एजेंसियों के माध्यम से निष्पादित किए जा रहे कार्यों की प्रगति के अनुसार चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। यह उपयोग अवसंरचना घटकों के निष्पादन से जुड़ा हुआ है।
निर्माणाधीन प्रमुख सामान्य अवसंरचना सुविधाओं में स्थल विकास, जल आपूर्ति प्रणाली, विद्युत अवसंरचना, शून्य तरल निर्वहन (जेडएलडी) वाला सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी), भाप उत्पादन प्रणाली, गोदाम, उत्कृष्टता केंद्र, विलायक पुनर्प्राप्ति प्रणाली, आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाएं शामिल हैं।
वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:
- पहले चरण के स्थल विकास का लगभग 20% काम पूरा हो चुका है।
- 15 एमएलडी क्षमता के लिए जल आपूर्ति और भूजल पुनर्भरण कार्यों का लगभग 98% कार्य पूरा हो चुका है।
- निर्माण चरण के लिए आवश्यक 20 मेगावाट विद्युत अवसंरचना का निर्माण एचपीएसईबीएल द्वारा पूरा कर लिया गया है।
- जेडएलडी युक्त सीईटीपी (273 करोड़ रुपये) और स्टीम जनरेशन सिस्टम (300 करोड़ रुपये) के लिए निविदाएं जारी कर दी गई हैं।
- अन्य महत्वपूर्ण उपयोगिताओं के लिए खरीद प्रक्रिया जारी है।
संबंधित राज्य सरकारों से प्राप्त प्रतिवेदनों, परियोजनाओं की स्थिति, निधि के उपयोग के स्तर और वित्त वर्ष 2026-27 में परियोजनाओं के अपेक्षित पूर्ण होने के आधार पर, योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 तक बढ़ा दी गई है ।
हिमाचल प्रदेश में विकसित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्क की प्रगति की समीक्षा नियमित रूप से “बल्क ड्रग पार्क प्रोत्साहन” योजना की संचालन समिति, औषधि विभाग के सचिव और संयुक्त सचिव तथा हिमाचल प्रदेश के माननीय उद्योग मंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार समिति द्वारा की जाती है। इसमें देर होने के मुख्य कारण पर्यावरण मंजूरी का मिलना है, जो 25.09.2025 को दी गई थी, साथ ही वृक्षों की कटाई की अनुमति और खरीद के लिए बोलियों से संबंधित प्रक्रियात्मक आवश्यकताएं भी लंबित हैं। राज्य सरकार और कार्यान्वयन एजेंसियां परियोजना के क्रियान्वयन पर कड़ी निगरानी रख रही हैं और महत्वपूर्ण अवसंरचना घटकों के लिए वैधानिक मंजूरियों, निविदाओं और अनुबंधों के आवंटन में तेजी ला रही हैं। पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद परियोजना गतिविधियों में तेजी आई है और पार्क के समय पर पूरा होने और संचालन को सुनिश्चित करने के लिए कई अवसंरचना पैकेज कार्यान्वयन के अधीन हैं या खरीद के उन्नत चरणों में हैं।
यह जानकारी रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित जवाब में दी।
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