डीपीई सचिव ने सार्वजनिक क्षेत्र की साख का आकलन करने और लागत प्रभावी वित्तपोषण सुनिश्चित करने में क्रेडिट रेटिंग की भूमिका पर जोर दिया
वित्त मंत्रालय के लोक उद्यम विभाग (डीपीई) ने लोक उद्यम स्थायी सम्मेलन (स्कोप) के सहयोग से, केंद्रीय लोक उद्यम प्रबंधन पर अपनी चल रही क्षमता-निर्माण पहलों के अंतर्गत, आज नई दिल्ली में महारत्न और नवरत्न केंद्रीय लोक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) के लिए चुनिंदा अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के साथ एक अर्धदिवसीय संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन किया।

मुख्य भाषण देते हुए, डीपीई सचिव श्री के. मोसेस चालाई ने सीपीएसई के सुदृढ़ परिचालन प्रदर्शन और भारत के आर्थिक विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने सीपीएसई के सामने मौजूदा अवसरों और चुनौतियों दोनों को भी रेखांकित किया। उन्होंने क्रेडिट रेटिंग प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, कुशल और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की जरूरत पर जोर दिया।

संदर्भ स्पष्ट करते हुए, डीपीई में संयुक्त सचिव डॉ. वसुंधरा उपमन्यु ने कहा कि रेटिंग एजेंसियां वित्तीय मजबूती, जोखिम और विश्वसनीयता का वस्तुनिष्ठ और स्वतंत्र मूल्यांकन प्रदान करती हैं, और सीपीएसई तथा क्रेडिट मूल्यांकनकर्ताओं के बीच निरंतर संवाद की जरूरत पर बल देती हैं। इससे पहले, स्कोप महानिदेशक डॉ. अतुल सोबती ने अपने शुरुआती भाषण में गणमान्यों और प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
रेटिंग पद्धतियों, जोखिम मूल्य निर्धारण और ऋण बाजार की गतिशीलता पर तकनीकी प्रस्तुतियां केयरएज ग्लोबल आईएफएस लिमिटेड, केयर रेटिंग्स लिमिटेड, क्रिसिल रेटिंग्स लिमिटेड, आईसीआरए रेटिंग्स लिमिटेड और इंफोमेरिक्स वैल्यूएशन एंड रेटिंग लिमिटेड की ओर से दी गईं।

इस कार्यशाला में रेटिंग एजेंसियों और सीपीएसई नेतृत्व के बीच पारदर्शी खुलासे और पूंजी संरचना अनुकूलन पर संवादात्मक सत्र आयोजित किए गए, जिसमें प्रतिभागियों ने इस सहयोगात्मक मंच को प्रदान करने में डीपीई की पहल की व्यापक तरीके से सराहना की।
क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां क्रेडिट जोखिम का आकलन कर, नियामक अनुपालनों में सहयोग देकर, निवेशकों को जरूरी जानकारी उपलब्ध कराकर और उधार लेने वाली संस्थाओं को प्रतिस्पर्धी दरों पर उधार प्राप्त करने में सक्षम बनाकर वित्तीय बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। रेटिंग एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने से सीपीएसई को कई तरह से मजबूती मिलेगी। कार्यशाला में महारत्न और नवरत्न सीपीएसई के 80 से अधिक वरिष्ठ वित्त अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें निदेशक (वित्त), कार्यकारी निदेशक और महाप्रबंधक शामिल रहे।
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