प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2: साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और डेटा-आधारित शासन के लिए विश्वसनीय, समयबद्ध और परस्पर सुसंगत डेटा आवश्यक है
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव: शासन हेतु एआई के बेहतर उपयोग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटा की उपलब्धता सबसे अहम है
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव: एआई-सक्षम सरकार के लिए सुसंगत, गुणवत्तापूर्ण और सुव्यवस्थित डेटा सबसे जरूरी है
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 08 सितंबर, 2026 को रंग भवन सभागार, आकाशवाणी भवन, ब्रॉडकास्टिंग हाउस, संसद मार्ग, नई दिल्ली- 110001 में “डेटा आधारित शासन में प्रशासनिक डेटा के उपयोग हेतु आंकड़ों के सामंजस्य” विषय पर केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के सांख्यिकी सलाहकारों (एसए) और मुख्य डेटा अधिकारियों की एक कार्यशाला आयोजित की। इस कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय डेटा प्रणाली को सुदृढ़ करना, प्रशासनिक डेटा के प्रभावी उपयोग और सामंजस्य को बढ़ावा देना, तथा सरकार में डेटा-आधारित शासन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए बेहतर समन्वय को प्रोत्साहित करना था।

उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 श्री शक्तिकांत दास, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव श्री एस. कृष्णन, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के महानिदेशक (डेटा गवर्नेंस) श्री पी. आर. मेश्राम उपस्थित थे। साथ ही इसमें सांख्यिकी सलाहकार, मुख्य डेटा अधिकारी तथा भारत सरकार के विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
मुख्य अतिथि श्री शक्तिकांत दास ने डेटा हार्मोनाइजेशन पर क्वार्टरली प्रोग्रेस रिपोर्ट (क्यूपीआर) पोर्टल (https://qpr.mospi.gov.in) लॉन्च किया। क्यूपीआर पोर्टल एक प्रौद्योगिकी आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसका इस्तेमाल केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और संगठन अपने डेटा से जुड़ी प्रगति की जानकारी देने के लिए करेंगे। इसमें ऐसे डेटा सेट की पहचान और सूचीकरण की प्रगति दर्ज की जाएगी। इसके अलावा डेटा के मेटाडेटा तैयार करने, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों को अपनाने, वर्गीकरण और कॉमन यूनिक आइडेंटिफायर के इस्तेमाल की जानकारी भी इस पोर्टल पर दर्ज होगी। मशीन रीडेबल डेटा की गुणवत्ता की जांच भी स्टैटिस्टिकल क्वालिटी एश्योरेंस फ्रेमवर्क (एसक्यूएएफ) के तहत की जाएगी। क्यूपीआर पोर्टल में ऑटोमेटेड वैलिडेशन, डैशबोर्ड और एनएमडीएस वेब पोर्टल के साथ डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन जैसी सुविधाएं भी हैं। इसके माध्यम से विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के डेटा से जुड़े विश्लेषण भी किए जा सकेंगे।

अपने मुख्य भाषण में, श्री शक्तिकांत दास ने रेखांकित किया कि साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और डेटा-आधारित शासन के लिए विश्वसनीय, समयबद्ध और परस्पर सुसंगत डेटा आवश्यक है। उन्होंने नीति निर्माण, निगरानी और परिणाम आकलन के लिए विभिन्न मंत्रालयों व विभागों में प्रशासनिक डेटा तथा सांख्यिकीय विशेषज्ञता के अधिक उपयोग का आह्वान किया। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की प्रमुख पहलों- जैसे एनएमडीएस 2.0, एसक्यूएएफ, सांख्यिकीय वर्गीकरण, डेटा लाइफ़साइकल गाइडलाइंस, ई-सांख्यिकी, माइक्रो-डेटा पोर्टल और डेटा सामंजस्य पर क्यूपीआर – को एक मजबूत प्रशासनिक डेटा इकोसिस्टम बनाने में अहम भूमिका निभाने वाले के रूप में रेखांकित किया गया। उन्होंने सभी मंत्रालयों और विभागों से डेटा गवर्नेंस समितियां स्थापित करने, डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क को प्रकाशित करने, लाइव डेटासेट इन्वेंट्री बनाए रखने और एपीआई सेतु, data.gov.in, एनडीएपी, एआई कोश, डिजीलॉकर, एंटिटी लॉकर, ई-सांख्यिकी और माइक्रो-डेटा पोर्टल जैसे मौजूदा राष्ट्रीय डेटा साझाकरण प्लेटफॉर्मों का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप एक आधुनिक, एकीकृत, उत्तरदायी और भविष्योन्मुखी डेटा इकोसिस्टम बनाने के लिए संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री एस. कृष्णन ने साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को सुदृढ़ करने और शासन में सुधार के लिए मंत्रालयों व विभागों के बीच प्रभावी डेटा के साझाकरण, सामंजस्य और इंटरऑपरेबिलिटी के महत्व को रेखांकित किया। इस बात पर जोर दिया कि शासन हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बेहतर उपयोग के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटा की उपलब्धता सबसे अहम है। उन्होंने तेजी से हो रहे डिजिटलीकरण और प्रशासनिक डेटा की बढ़ती उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सरकारी डेटा के बेहतर उपयोग पर जोर दिया। बेहतर कल्याणकारी परिणामों, नीति निर्माण और सरकारी सेवाओं को प्रदान करने के लिए ऐसे डेटा का प्रभावी ढंग से उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। संपूर्ण सरकार के दृष्टिकोण को अपनाया जाना चाहिए। मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत सांख्यिकी अधिकारियों, इंडिया एआई मिशन के विशेषज्ञों, एनआईसी कर्मियों और अन्य डेटा पेशेवरों सहित मौजूदा संसाधनों का लाभ उठाया जाना चाहिए।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग ने बैठक के बारे में बताते हुए कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ के विजन के अनुरूप, अलग-अलग विभागीय डेटा तंत्र से आगे बढ़कर एक एकीकृत, परस्पर सुसंगत और संपूर्ण सरकारी डेटा इकोसिस्टम में काम करे। उन्होंने डेटा के प्रभावी उपयोग के लिए अवधारणाओं, परिभाषाओं, वर्गीकरणों, आइडेंटिफायर, भौगोलिक क्षेत्रों, मेटाडेटा और डेटा स्ट्रक्चर में सामंजस्य पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्रीय डेटा गवर्नेंस समिति और डेटा सामंजस्य पर क्यूपीआर द्वारा समर्थित, सांख्यिकीय नेतृत्व और गुणवत्ता आश्वासन में सांख्यिकीय सलाहकारों की तथा डेटा गवर्नेंस और इंटरऑपरेबिलिटी में मुख्य डेटा अधिकारियों की पूरक भूमिकाओं को रेखांकित किया। उन्होंने “डेटा रिक्वेस्ट से पहले डेटा डिस्कवरी” दृष्टिकोण पर ज़ोर दिया, और कहा कि सामंजस्यपूर्ण, गुणवत्तापूर्ण और सुव्यवस्थित डेटा एआई-सक्षम सरकार के लिए जरूरी है। उन्होंने नेशनल एसेट के रूप में डेटा के निरंतर सामंजस्य, सक्रिय डेटा साझाकरण और सामूहिक स्वामित्व का आह्वान किया।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के महानिदेशक (डेटा गवर्नेंस) श्री पी. आर. मेश्राम ने स्वागत भाषण दिया तथा डेटा-आधारित शासन को मजबूत करने और सरकारी मंत्रालयों व विभागों में प्रशासनिक डेटा के प्रभावी उपयोग के लिए डेटा हार्मोनाइज़ेशन (सामंजस्य) और इंटरऑपरेबिलिटी के महत्व पर ज़ोर दिया। साथ ही पारंपरिक तरीके से डेटा साझा करने से आगे बढ़कर सामान्य परिभाषाओं, मेटाडेटा, वर्गीकरण, आइडेंटिफायर और इंटरऑपरेबल प्रणालियों की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने सांख्यिकीय गुणवत्ता, डेटा गवर्नेंस और जिम्मेदारीपूर्ण डेटा प्रबंधन सुनिश्चित करने में सांख्यिकीय सलाहकारों और मुख्य डेटा अधिकारियों (सीडीओ) की पूरक भूमिकाओं पर जोर दिया। उन्होंने डेटा को एआई अनुकूल और मशीन-रीडेबल बनाने के महत्व को रेखांकित किया। भविष्य का मार्ग स्ट्रक्चरल इंटरऑपरेबिलिटी से सिमेंटिक इंटरऑपरेबिलिटी की ओर, अलग-अलग डेटासेट से इंटरऑपरेबल और लिंक्ड डेटा इकोसिस्टम की ओर, और डेटा की उपलब्धता से डेटा तत्परता की ओर अग्रसर है।
तकनीकी सत्रों में एनएमडीएस और क्यूपीआर पोर्टलों के माध्यम से डेटा सामंजस्य (हार्मोनाइज़ेशन); मॉडल डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क और डिजिटल डेटा-साझाकरण तंत्र; अलग-अलग डेटा को एकत्रित करने के लिए संस्थागत दृष्टिकोण; एआई–अनुकूल डेटा इकोसिस्टम; डेटा धारा पद्धति; भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर; उपयोग; स्वास्थ्य संबंधी डेटा; और अर्थव्यवस्था में मंत्रालयों, विभागों व संगठनों के योगदान को मापने के लिए विषयगत और विस्तृत अकाउंट तैयार करने पर प्रस्तुतियां दी गईं।
प्रस्तुतियों में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि भारत सभी मंत्रालयों द्वारा एआई-अनुकूल, डेटा-आधारित शासन के लिए किसी भी मंत्रालय द्वारा प्रसारित प्रशासनिक डेटा के सामंजस्य, साझाकरण और उपयोग को कैसे बेहतर बना सकता है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने एनएमडीएस 2.0, एसक्यूएएफ, कॉमन आइडेंटिफ़ायर और क्यूपीआर पोर्टल सहित प्रमुख पहलों को प्रदर्शित किया, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सुरक्षित डेटा साझाकरण के लिए मॉडल डेटा शेयरिंग फ्रेमवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रस्तुत किए। कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय ने एपीआई-आधारित इंटरऑपरेबिलिटी का प्रदर्शन किया, जिसमें लाभार्थी सत्यापन के उपयोग के मामले शामिल थे। राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के डेटा धारा ने वास्तविक समय के शहरी शासन और बेहतर सेवा वितरण के लिए सामंजस्यपूर्ण डेटा की क्षमता का उल्लेख किया। अन्य सत्रों में इंटरऑपरेबल क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड डेटा, एआईकोश, स्वास्थ्य डेटा सामंजस्य और मंत्रालय के एसएनए 2025 फ्रेमवर्क में बदलाव जैसे विषयों पर चर्चा की गई। एक मुख्य बात यह थी कि वैल्यू बनाने के लिए डेटा को सेंट्रलाइज़ करने की ज़रूरत नहीं है; कॉमन स्टैंडर्ड, कॉमन यूनिक आइडेंटिफ़ायर, एपीआई और गवर्नेंस मैकेनिज़्म का इस्तेमाल करके अलग-अलग जगहों पर मौजूद डेटा सिस्टम के बीच इंटरऑपरेबिलिटी मुमकिन की जा सकती है। चर्चा में डेटा की गोपनीयता, सुरक्षा और ज़िम्मेदारीपूर्ण डेटा साझाकरण को सुनिश्चित करते हुए विभागीय स्वामित्व को बनाए रखने के महत्व पर बल दिया गया।
इस कार्यशाला में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और भाग लेने वाले मंत्रालयों/विभागों ने साक्ष्य-आधारित शासन के लिए एक आधुनिक, सामंजस्यपूर्ण, इंटरऑपरेबल और डेटा-आधारित राष्ट्रीय डेटा प्रणाली बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
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