प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया। इस सुभाषितम् का तात्पर्य है कि एक बुद्धिमान और समझदार व्यक्ति को ज्ञान की हर शाखा से सार निकालना चाहिए, चाहे वह बड़ी हो या छोटी। उन्होंने हर स्रोत से मूल्यवान ज्ञान प्राप्त करने और उसे आत्मसात् करने के महत्व पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् साझा किया-
“अणुभ्यश्च महद्भ्यश्च शास्त्रेभ्यः कुशलो नरः।
सर्वतः सारमादद्यात् पुष्पेभ्य इव षट्पदः॥”
विवेकी और कुशल व्यक्ति को छोटे-बडे सभी शास्त्रों से, चाहे वे किसी भी विषय के हों, उपयोगी सारतत्व को ग्रहण करना चाहिए। जैसे भौंरा विभिन्न पुष्पों से केवल मधुरस का सार ग्रहण करता है, वैसे ही मनुष्य को भी हर स्रोत से ज्ञान का श्रेष्ठ और उपयोगी अंश आत्सात् करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने पोस्ट में लिखा;
“अनुभ्यश्च महदभ्यश्च शास्त्रेभ्यः कुशलो नरः।
सर्वतः सारमाद्यत् पुष्परेभ्य इव षट्पदः॥”
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