डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, भारत प्रौद्योगिकी अनुसरणकर्ता से आत्मविश्वासी वैश्विक खिलाड़ी बन गया है; उद्योग-अनुसंधान साझेदारी और घरेलू क्षमताओं की मजबूती का आह्वान
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा, लचीली मूल्य श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए भारत को घरेलू संसाधनों को वैश्विक साझेदारियों के साथ मिलाना होगा
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारत की रणनीतिक सामग्रीयों और प्रौद्योगिकी का भविष्य सुरक्षित करने के लिए ‘संपूर्ण राष्ट्र’ के प्रयासों का संयोजन करने का आह्वान किया
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने अनुसंधान और नवाचार को व्यावसायिक सफलता में बदलने के लिए उद्योग के साथ शुरुआती स्तर पर जुड़ाव पर जोर दिया
केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज कहा कि भारत अब ऐसा देश नहीं है, जो दूसरों को प्रयोग करते हुए देखता है और फिर उनकी सफलता का अनुसरण करता है; बल्कि भारत अब उभरती प्रौद्योगिकियों में अपनी वैश्विक भूमिका को स्वयं आकार देने के लिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि महत्वपूर्ण खनिज भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
डा. सिंह ने कहा कि महत्वपूर्ण खनिज और धातुएं प्रौद्योगिकी विकास के अगले चरण की प्रमुख प्रेरक शक्ति होंगी और इनका महत्व केवल खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता और राष्ट्रीय सुरक्षा से आगे हैं।
डॉ. जितेन्द्र सिंह भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के सिल्वर ओक हॉल में आयोजित उन्नत सामग्री, महत्वपूर्ण खनिज एवं धातुओं पर तीसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन के विशेष पूर्ण सत्र को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। “बिल्डिंग रेसिलिएंट वैल्यू चेन्स फॉर ए सस्टेनेबल एंड कम्पीटीटिव फ्यूचर” विषय पर आयोजित इस शिखर सम्मेलन में सरकार, उद्योग, अनुसंधान क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों ने भाग लिया।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव हो रहा है, जिसमें स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर, दूरसंचार, एयरोस्पेस, रक्षा और परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी एवं औद्योगिक बदलाव के प्रमुख प्रेरक के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत अब कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ इस विचारों के विश्वव्यापी विचार-विमर्श में भाग ले रहा है और बड़ी वैश्विक भूमिका निभाने के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि बदलते प्रौद्योगिकी परिदृश्य को देखते हुए भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिजों और उन्नत सामग्रियों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में क्षमताओं का निर्माण करना अनिवार्य हो गया है—जिसमें अन्वेषण और निष्कर्षण से लेकर परिष्करण, प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग और विनिर्माण तक शामिल हैं। घरेलू संसाधनों का अंतरराष्ट्रीय संसाधनों के साथ किफायती रूप से समन्वय करना होगा, साथ ही स्वदेशी प्रौद्योगिकियों और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मानकों का समानांतर रूप से विकास करना होगा।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि उन्नत सामग्रियों और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए संपूर्ण सरकार और संपूर्ण राष्ट्र के दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें उद्योग एक अभिन्न भागीदार हो। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी घरेलू तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक रणनीतियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को आगे बढ़ाना होगा।
रणनीतिक क्षेत्रों के प्रति सरकार के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने निजी उद्योग को उन क्षेत्रों में शामिल करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिन्हें परंपरागत रूप से उसकी पहुंच से बाहर माना जाता था। उन्होंने विशेष रूप से परमाणु क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने का उल्लेख करते हुए इसे रणनीतिक प्रौद्योगिकी और निवेश के प्रति भारत के दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
उन्होंने कनाडा और अन्य देशों सहित अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्योग जगत को भारत द्वारा परमाणु क्षेत्र को खोले जाने से उत्पन्न अवसरों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि नए ढांचे में अधिक घरेलू भागीदारी के साथ-साथ विदेशी सहयोग और निवेश की भी पर्याप्त गुंजाइश है।
मंत्री ने आरडीआई फंड का भी उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा घोषित यह पहल अब कार्यान्वयन के चरण में पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें उन रणनीतिक क्षेत्रों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को गति देने में मदद कर सकती हैं, जहां उद्योग परंपरागत रूप से निवेश करने में हिचकिचाता रहा है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने अनुसंधान और नवाचार के साथ उद्योग के शुरुआती स्तर पर जुड़ाव का आह्वान करते हुए कहा कि संभावित उद्योग भागीदारों को शुरुआत से ही साथ जोड़ा जाना चाहिए। इससे अनुसंधान पहलों को बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने और उनके व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनने की संभावनाओं को बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान, उद्योग, सरकार और गैर-सरकारी क्षेत्र के बीच स्वस्थ तालमेल स्टार्टअप और उद्यमियों को निरंतर समर्थन देने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत को अनुसंधान और नवाचार में बड़े पैमाने पर निवेश करने तथा ज्ञान सृजन के लिए वित्तीय सहयोग की एक मजबूत संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के लिए परोपकारी सहयोग एक ऐसा क्षेत्र है, जहां भारत बहुत कुछ और कर सकता है। उन्होंने उद्योग और प्रमुख व्यावसायिक घरानों से अनुसंधान को परोपकार के एक महत्वपूर्ण रूप के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया, जो मानवता के व्यापक कल्याण में योगदान देता है।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सड़क निर्माण में स्टील स्लैग के उपयोग के भारत के अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे इस बात के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया कि किस प्रकार सरकार और उद्योग के बीच सहयोग से पहले कचरा मानी जाने वाली वस्तु को एक उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह अनुभव इस सिद्धांत को और मजबूत करता है कि नवाचार और उपयुक्त प्रौद्योगिकी के माध्यम से सामग्रियों का उपयोग करने पर लगभग कोई भी वस्तु कचरा नहीं रह जाती।
मंत्री ने भारत के रणनीतिक प्रौद्योगिकी और सामग्री इकोसिस्टम के लिए पांच व्यापक प्राथमिकताएं निर्धारित कीं: अनुसंधान और नवाचार में बड़े पैमाने पर निवेश; ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए घरेलू क्षमताओं का निर्माण; हितधारकों के बीच अधिक गहरी साझेदारियां; वैश्विक और पुनर्चक्रण मॉडल; तथा अनुसंधान के लिए परोपकारी सहयोग की एक मजबूत संस्कृति का विकास।
उन्होंने कहा कि घरेलू क्षमताओं का निर्माण ऊर्जा सुरक्षा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया ऊर्जा के अधिक स्वच्छ और हरित स्रोतों की ओर बढ़ रही है। भारत को बाहरी निर्भरता से उत्पन्न कमजोरियों को कम करना होगा और साथ ही बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अपने उद्योगों और प्रौद्योगिकियों को तैयार करना होगा।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत अपनी तकनीकी यात्रा के एक महत्वपूर्ण चरण में है, जहां उन्नत सामग्रियों, महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में नए अवसर उभर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अब हमें भारत की वैश्विक भूमिका निभाने की क्षमता पर बहुत, बहुत अधिक विश्वास है।” उन्होंने कहा कि अभी सर्वश्रेष्ठ आना बाकी है।
उच्चतम स्तर की ईमानदारी और निष्ठा के साथ साझेदारियां बनाने का आह्वान करते हुए डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि रणनीतिक प्रौद्योगिकियों और सामग्रियों के क्षेत्र में भारत के विकास का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार, उद्योग, शोधकर्ता, स्टार्टअप, निवेशक और अंतरराष्ट्रीय साझेदार देश की तकनीकी यात्रा में समान हितधारकों के रूप में मिलकर काम करें।




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