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महत्वाकांक्षी जिले से अकादमिक उत्कृष्टता तक: एनएफएससी ने डॉ. अबिनाश मंडल को कैसे सशक्त बनाया

सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदायों के अध्येताओं के लिए, वित्तीय रूकावटों और भौगोलिक बाधाओं के कारण शैक्षणिक अवसरों तक पहुंच सीमित होने से उच्च शिक्षा प्राप्त करना कठिन हो सकता है। समय पर मिलने वाली फैलोशिप सहायता से अनुसंधान जारी रखने और अकादमिक क्षेत्र में एक सार्थक करियर बनाने में आवश्यक मदद मिल सकती सकती है।

अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (एनएफएससी) योजना के प्रभाव को प्रदर्शित करते हुए, असम में उदलगुरी के 33 वर्षीय शोधार्थी डॉ. अबिनाश मंडल ने सामाजिक-आर्थिक और भौगोलिक बाधाओं को पार करते हुए पांडिचेरी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

एक महत्वाकांक्षी जिले से आने वाले डॉ. मंडल को आर्थिक तंगी और उन्नत शैक्षणिक अवसरों तक सीमित पहुंच का सामना करना पड़ा। दूरस्थ और पिछड़े जिले में रहने से जुड़ी भौगोलिक कठिनाइयों ने गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक संसाधनों, अनुसंधान संबंधी अवसरों और उच्च शिक्षा के अवसरों तक उनकी पहुंच को और भी सीमित कर दिया।

सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े समुदाय से संबंध होने के कारण, उन्हें अपनी हाशिए पर स्थित पृष्ठभूमि से जुड़ी सामाजिक बाधाओं का भी सामना करना पड़ा। इन चुनौतियों ने डॉक्टरेट अनुसंधान को आगे बढ़ाने को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बना दिया। फिर भी, उनके दृढ़ संकल्प, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उन्हें अकादमिक उत्कृष्टता के लिए प्रयास जारी रखने में सक्षम बनाया।

डॉ. मंडल की आकांक्षा थी कि वे उच्चतम शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करें और वाणिज्य एवं फोरेंसिक लेखांकन के क्षेत्र में सार्थक योगदान दें। शिक्षण, अनुसंधान और ज्ञान सृजन में संलग्न होना और वंचित समुदायों के छात्रों को उच्च शिक्षा और शैक्षणिक करियर अपनाने के लिए प्रेरित करना उनका दीर्घकालिक लक्ष्य था।

परिवार के प्रोत्साहन और शिक्षण संस्थानों की ओर से प्रदान किए गए अवसरों ने उन्हें दृढ़ रहने का आत्मविश्वास दिया। एक निर्णायक मोड़ तब आया जब उन्हें 2020 से 2024 तक की अवधि के लिए एनएफएससी योजना के तहत सहायता प्राप्त हुई।

इस योजना के तहत उन्हें जूनियर रिसर्च फेलो (जेआरएफ) के रूप में 37,000 रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति प्रदान की गई, जिसे सीनियर रिसर्च फेलो (एसआरएफ) के पद पर पदोन्नति के बाद बढ़ाकर 42,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया। इस निरंतर सहायता ने उन्हें वित्तीय कठिनाइयों के बोझ के बिना पूर्णकालिक डॉक्टरेट अनुसंधान करने में सक्षम बनाया।

इस फैलोशिप ने पारिवारिक संसाधनों पर उनकी निर्भरता को कम किया और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शोध सामग्री प्राप्त करने, अकादमिक सम्मेलनों में भाग लेने और विद्वतापूर्ण प्रकाशन के अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनाया। परिणामस्वरूप प्राप्त वित्तीय मदद ने उन्हें अपने शोध और अकादमिक आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित रखने में सहायता की।

इस योजना के तहत मिले सहयोग से डॉ. मंडल ने जूनियर आरएफ से सीनियर आरएफ तक सफलतापूर्वक बढ़े और अपनी पीएचडी पूरी की। इस दौरान उनकी शोध क्षमताएं मजबूत हुईं, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशन और आईआईएम बोधगया, आईआईएम इंदौर और आईआईटी दिल्ली सहित प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रस्तुतियां हुईं।

इस फैलोशिप ने उनके डॉक्टरेट अध्ययन के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार किया और पीएचडी पूरी होने के बाद बेहतर करियर के अवसर खोले। इसने उन्हें आर्थिक रूप से सीमित शैक्षणिक यात्रा से उच्च शिक्षा में पेशेवर भूमिका की ओर बढ़ने के लिए आवश्यक आधार प्रदान किया।

आज डॉ. मंडल पांडिचेरी विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में अतिथि संकाय के रूप में कार्यरत हैं, जहां वे शिक्षण, अनुसंधान और अकादमिक विकास में सक्रिय रूप से योगदान देते हैं। वे वाणिज्य और फोरेंसिक लेखांकन के क्षेत्र में ज्ञान को आगे बढ़ाने के अपने लक्ष्य को निरंतर पूरा कर रहे हैं, साथ ही वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों को उच्च लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

डॉ. अबिनाश मंडल की यात्रा अनुसूचित जाति समुदायों के अध्येताओं को सामाजिक-आर्थिक बाधाओं को दूर करने, अकादमिक उत्कृष्टता प्राप्त करने और शिक्षा जगत तथा समाज में सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाने में एनएफएससी योजना की परिवर्तनकारी भूमिका को दर्शाती है।

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