भारत में पर्यटन का विकास और डिजिटल बदलाव
| 27 सितंबर 2026 को “डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पर्यटन को नया रूप देना” (Digital Agenda and Artificial Intelligence to Redesign Tourism) थीम के तहत मनाए जाने वाले विश्व पर्यटन दिवस पर, पर्यटन के भविष्य को आकार देने में तकनीक की भूमिका पर जोर दिया जाएगा। भारत में, यह सेक्टर आर्थिक विकास, रोजगार और आजीविका के लिए एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है; 2023-24 में इसने जीडीपी में 5.22% का योगदान दिया और 8.46 करोड़ नौकरियों को समर्थन दिया। 2025 में घरेलू पर्यटकों की संख्या 428.55 करोड़ तक पहुंच गई, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़कर 2.53 करोड़ हो गई और पर्यटन से विदेशी मुद्रा की कमाई ₹2,76,831 करोड़ तक पहुंच गई। भारत ई-वीजा, ‘इनक्रेडिबल इंडिया‘ डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और निधि प्लस (NIDHI+) के जरिए अपने डिजिटल पर्यटन इकोसिस्टम को भी मजबूत कर रहा है, जिसमें एआई यात्रा के अनुभव को ज्यादा व्यक्तिगत और आसान बना रहा है। डिजिटल नवाचार के साथ-साथ, स्वदेश दर्शन 2.0, प्रसाद (PRASHAD), क्रूज टूरिज्म और पर्यटन कौशल विकास जैसी पहल गंतव्यों का विस्तार कर रही हैं, पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बना रही हैं और आजीविका के अवसर पैदा कर रही हैं। भारत के विश्व पर्यटन दिवस 2026 समारोह के अवसर पर एक ज्यादा जुड़े हुए, समावेशी और टिकाऊ पर्यटन क्षेत्र को बनाने की भारत की कोशिशों को उजागर करता है। |
पर्यटन: समुदायों, संस्कृति और सतत विकास को जोड़ना
पर्यटन लोगों, जगहों और संस्कृतियों को करीब लाता है। यह समुदायों के लिए अवसर पैदा करता है, आजीविका में मदद करता है और आर्थिक विकास में अहम योगदान देता है। दुनिया भर में, 2024 में यात्रा और पर्यटन ने वैश्विक जीडीपी का 10% यानी 10.9 ट्रिलियन डॉलर का योगदान दिया, साथ ही 357 मिलियन नौकरियों को समर्थन दिया और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के खर्च से 1.9 ट्रिलियन डॉलर की कमाई हुई।
जैसे-जैसे यह क्षेत्र बढ़ रहा है, लोगों के यात्रा करने और जगहों का अनुभव करने का तरीका बदल रहा है। इस बदलाव में तकनीक एक अहम भूमिका निभा रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूरिज्म को नई दिशा देने वाली अगली बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है। बेहतर फैसले लेने से लेकर कौशलों को मजबूत करने और पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने तक, एआई पर्यटन को ज्यादा स्मार्ट, समावेशी और टिकाऊ बनाने में मदद कर सकता है। बदलते हुए इस माहौल पर विश्व पर्यटन दिवस 2026 के दौरान खास ध्यान दिया जाएगा। यह दिन 27 सितंबर को अल साल्वाडोर में “डिजिटल एजेंडा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पर्यटन को नया रूप देना” (Digital Agenda and Artificial Intelligence to Redesign Tourism) थीम के साथ मनाया जाएगा। यह थीम बताती है कि कैसे डिजिटल नवाचार और एआई पर्यटन के भविष्य को बदल सकते हैं और साथ ही पर्यटन स्थलों के अनुभव और उनके प्रबंधन के तरीके को बेहतर बना सकते हैं।

भारत विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर देश की विविध पर्यटन विरासत, संस्कृति और अनुभवों को प्रदर्शित करते हुए राष्ट्रव्यापी आयोजन करेगा। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित केंद्रीय समारोह के दौरान केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत कई महत्वपूर्ण नई पहलों का शुभारंभ करेंगे। इन पहलों का उद्देश्य भारत के पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना तथा सतत और समावेशी पर्यटन विकास के अवसरों को बढ़ाना है। इनमें नेशनल डिजिटल टूरिज्म स्टैक का शुभारंभ शामिल है, जो एक खुली डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पहल है और पर्यटन सेवाओं एवं पेशकशों को अधिक खोज योग्य, सुलभ और विश्वसनीय बनाने पर केंद्रित है। इसके साथ ही देखो अपना देश 2.0 का भी शुभारंभ किया जाएगा, जिसका उद्देश्य पर्यटन के लिए तैयार कम-ज्ञात गंतव्यों को बढ़ावा देना और पर्यटकों की आवाजाही का अधिक संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है।
मंत्रालय इनक्रेडिबल इंडिया के अंतर्गत गंतव्यों की दृश्यता बढ़ाने, डिजिटल पहुंच को सुदृढ़ करने, अनुभवात्मक एवं सतत पर्यटन को बढ़ावा देने तथा समुदाय की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख उद्योग संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) के माध्यम से रणनीतिक साझेदारियां भी स्थापित करेगा।
इस दृष्टिकोण को क्षेत्रीय स्तर पर आगे बढ़ाते हुए, तेलंगाना में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं, पर्यटन फिल्मों की स्क्रीनिंग, संगीत कार्यक्रमों तथा खान-पान, हथकरघा और हस्तशिल्प को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल सहित विविध आयोजन किए जाएंगे। तेलंगाना राज्य पर्यटन पुरस्कारों के माध्यम से ट्रैवल एजेंटों, टूर ऑपरेटरों, वर्गीकृत होटलों, रेस्तरां, स्वतंत्र होटलों तथा यात्रा उद्योग के अन्य मान्यता प्राप्त क्षेत्रों के योगदान को भी सम्मानित किया जाएगा।
दिल्ली सरकार इस अवसर को “RANG • RAS • ROOH” के साथ मनाएगी। 26–27 सितंबर को यमुना के किनारे सराय काले खां स्थित बाँसेरा (बाँस पार्क) में आयोजित दो दिवसीय समारोह में कला, संस्कृति, खान–पान, मनोरंजन और विविध अनुभवों का संगम देखने को मिलेगा। कार्यक्रम में निज़ामी ब्रदर्स की विशेष कव्वाली संध्या भी आयोजित की जाएगी।
| विश्व पर्यटन दिवस: पर्यटन को टिकाऊ विकास से जोड़नाविश्व पर्यटन दिवस, संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) की एक पहल है। यह 1970 में यूएनडब्ल्यूटीओ के नियमों को अपनाए जाने की याद में मनाया जाता है। पहली बार 1980 में मनाए गए इस दिन के जरिए सामाजिक-आर्थिक विकास में पर्यटन के योगदान और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला जाता है। |
भारत में पर्यटन: यात्राओं से आर्थिक अवसरों तक
पर्यटन सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह की यात्रा से कहीं ज्यादा है। यह लोगों को भारत की विविध संस्कृतियों, विरासत और समुदायों से जोड़ता है और साथ ही कारोबार और आजीविका के अवसर भी पैदा करता है। यह आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और विदेशी मुद्रा की कमाई में भी योगदान देता है, जिससे भारत की विकास यात्रा में पर्यटन की भूमिका और मजबूत होती है।

हाल के वर्षों में इस क्षेत्र ने काफी तेजी पकड़ी है। भारत की अर्थव्यवस्था में पर्यटन क्षेत्र के योगदान को ‘टूरिज़्म सैटेलाइट अकाउंट’ (टीएसए) के जरिए मापा जाता है। टीएसए एक आधिकारिक अकाउंटिंग फ़्रेमवर्क है जिसका इस्तेमाल पर्यटन क्षेत्र के सीधे और अप्रत्यक्ष आर्थिक योगदान को मापने के लिए किया जाता है। पर्यटन मंत्रालय के बताए गए हालिया टीएसए अनुमानों के अनुसार, यह क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 5.22% का योगदान देता है। इस क्षेत्र में रोजगार 2019-20 में 6.94 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 8.46 करोड़ हो गया है, जो आजीविका के स्रोत के तौर पर इसकी बढ़ती भूमिका को दिखाता है।
यात्रा में बढ़ोतरी
भारत में पर्यटकों की आवाजाही में भी जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। घरेलू पर्यटकों की संख्या 2021 में 67.7 करोड़ से बढ़कर 2025 में 428.55 करोड़ हो गई। इसी दौरान विदेशी पर्यटकों की संख्या 0.1 करोड़ से बढ़कर 2.53 करोड़ हो गई। इस क्षेत्र का विदेशी मुद्रा में योगदान भी बढ़ा है। पर्यटन से होने वाली विदेशी मुद्रा की कमाई 2021 में ₹63,978 करोड़ से बढ़कर 2025 में ₹2,76,831 करोड़ हो गई।

पर्यटन के अनुभव को नया रूप देना
असल यात्राओं से डिजिटल अनुभवों तक
हमारे यात्रा करने का तरीका बदल रहा है। कभी यात्रा के लिए सिर्फ एक मैप और गाइडबुक ही काफी होती थी। आज, स्मार्टफोन हमें किसी जगह को खोजने, उसकी योजना बनाने और उसका अनुभव करने में मदद करता है। भविष्य में, हो सकता है कि यात्री बस अपनी मनचाही यात्रा के बारे में बताएं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बाकी चीजों की योजना बनाने में मदद करे।
जैसे-जैसे यात्रियों की उम्मीदें बदल रही हैं, पर्यटन को भी बदलना होगा। सुविधा, पर्सनलाइजेशन और आसान डिजिटल अनुभव यात्रा का अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। भारत यात्रा को आसान बनाकर, डिजिटल टूरिज्म प्लेटफॉर्म को मजबूत करके और तकनीक व एआई का इस्तेमाल करके इस बदलाव को अपना रहा है, ताकि यात्री देश को नए तरीके से खोज सकें और उसका अनुभव कर सकें।
ई-वीजा: यात्रा को आसान बनाना
भारत ने ई-वीजा सुविधा के जरिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को लगातार आसान बनाया है। इस सुविधा की शुरुआत 2014 में 43 देशों के नागरिकों के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन’ के साथ की गई थी। तब से इस सुविधा का काफी विस्तार हुआ है और अब यह 172 देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध है। इसमें 88 अंतरराष्ट्रीय एंट्री पॉइंट्स (प्रवेश द्वारों) के जरिए प्रवेश की अनुमति है, जिनमें 37 एयरपोर्ट, 38 सीपोर्ट और 13 लैंड पोर्ट शामिल हैं। यह बताना जरूरी है कि भारत अब कुल वीजा में से लगभग 78% वीजा इलेक्ट्रॉनिक वीजा के तौर पर जारी करता है। साथ ही, भारत ई-वीजा के लगभग 95% आवेदनों को 72 घंटों के भीतर प्रोसेस कर देता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यात्रा ज़्यादा सुविधाजनक और आसान हो गई है।

इनक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म: पर्यटन स्थलों को डिजिटल दुनिया से जोड़ना
नया और बेहतर इनक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म डिजिटल टूरिज्म को एक कदम और आगे ले जाता है। यह भारत की संस्कृति, विरासत, एडवेंचर, खान-पान, स्वास्थ्य, कला और शिल्प, और ग्रामीण आकर्षणों के वर्चुअल अनुभव देता है। इसका एआई-संचालित टूल रियल-टाइम मौसम की जानकारी, शहर घूमने और ज़रूरी यात्रा सेवाओं जैसी सुविधाओं के जरिए यात्रियों के अनुभव को पर्सनलाइज करता है।
यह प्लेटफ़ॉर्म यात्रियों को फ़्लाइट, होटल, कैब और बस बुक करने के साथ-साथ एएसआई स्मारकों के टिकट के लिए ऑनलाइन ट्रैवल एजेंट (ओटीए) और पर्यटन से जुड़े दूसरे लोगों से भी जोड़ता है। निधि (NIDHI) के साथ इसके एकीकरण से पंजीकृत टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंट की जानकारी मिलती है, जिससे यात्रा के कई हिस्से एक ही प्लेटफॉर्म पर आ जाते हैं।
निधि प्लस: एक डिजिटल टूरिज़्म इकोसिस्टम बनाना
डिजिटल प्लेटफॉर्म इस बात को भी बदल रहे हैं कि पर्यटन सेवाओं का इस्तेमाल और प्रबंधन कैसे किया जाता है। निधि प्लस (हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री का राष्ट्रीय एकीकृत डेटाबेस) टूरिज्म सर्विस प्रोवाइडर्स के पंजीकरण, मान्यता और वर्गीकरण के लिए एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म देता है।
यह एंड-टू-एंड ऑनलाइन प्रोसेसिंग, एकीकृत भुगतान और पारदर्शी मंजूरी की सुविधा देता है, साथ ही बिजनेस करने में आसानी को भी बढ़ाता है। 23 सितंबर 2026 तक, निधि प्लस में 63,740 अकोमोडेशन यूनिट, 54 कन्वेंशन सेंटर, 215 फूड बिजनेस ऑपरेटर, 1,450 ऑनलाइन ट्रैवल एग्रीगेटर और 15,531 टूरिज्म सर्विस प्रोवाइडर लिस्टेड हैं। यह प्लेटफॉर्म भारत के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक ज्यादा कनेक्टेड डिजिटल इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रहा है।

गूगल इंडिया की साझेदारी: पर्यटन में एआई को बढ़ावा
साझेदारी के जरिए भारत का डिजिटल पर्यटन के सफर भी आगे बढ़ रहा है। जून 2026 में, पर्यटन मंत्रालय ने गूगल इंडिया के साथ एक एमओयू किया। इसका उद्देश्य डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डेटा-आधारित जानकारी और क्षमता निर्माण के ज़रिए भारतीय पर्यटन के डिजिटल प्रचार को मजबूत करना है।
यह सहयोग यात्राओं के वैश्विक रुझान, यात्रियों के व्यवहार और डिजिटल जुड़ाव के पैटर्न से मिली जानकारी का इस्तेमाल करके प्रमाण-आधारित पर्यटन को प्रोत्साहन देने में मदद करेगा। इसमें मंत्रालय के अधिकारियों को डिजिटल मार्केटिंग, कैंपेन ऑप्टिमाइजेशन, कंटेंट तैयार करना और एआई जैसी नई तकनीक का प्रशिक्षण देना भी शामिल है।
बड़े शहरों से आगे नवाचार
तकनीक, पर्यटन से जुड़े उद्यमियों के लिए भी नए मौके बना रही है। 17 अप्रैल 2023 तक, यात्रा और पर्यटन क्षेत्र में 262 जिलों में 1,497 डीपीआईआईटी-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे, जिनसे लगभग 13,919 लोगों को रोजगार मिला। खास बात यह है कि इनमें से 58% स्टार्टअप टियर II और टियर III शहरों में स्थित थे।
ये स्टार्टअप ट्रैवल तकनीक, ऑनलाइन बुकिंग, होमस्टे, ग्रामीण और अनुभव-आधारित पर्यटन, स्मार्ट मोबिलिटी और एआई-आधारित ट्रैवल प्लानिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कुछ खास पहलों में ‘हाईवे डिलाइट’ शामिल है, जिसने हाईवे पर सुविधाओं का एक डिजिटल रूप से जुड़ा नेटवर्क बनाया है; ‘विल्लोटेल’, जो होमस्टे और समुदाय-आधारित अनुभवों के जरिए ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देता है; और उड़चलो (udChalo, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म और 70 से ज़्यादा बुकिंग ऑफिस के नेटवर्क के जरिए 28 लाख से ज्यादा रक्षाकर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को तकनीक-आधारित यात्रा सेवाएं देता है।
कई भाषाओं वाली टूरिस्ट हेल्पलाइन: चौबीसों घंटे मदद
पर्यटन मंत्रालय देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की मदद के लिए 24×7 टोल-फ्री और कई भाषाओं वाली टूरिस्ट हेल्पलाइन चलाता है। 1800111363 या शॉर्ट कोड 1363 पर उपलब्ध यह सेवा 12 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में यात्रा से जुड़ी जानकारी देती है, जिनमें अरबी, फ्रेंच, जर्मन, इटैलियन, जापानी, कोरियाई, चीनी, पुर्तगाली, रूसी और स्पेनिश शामिल हैं। यह मुश्किल समय में पर्यटकों की मदद भी करती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करती है।
भारत का विविध पर्यटन परिदृश्य
भारत के पर्यटन की ताकत उसकी विविधता में है। तीर्थयात्रा और विरासत से लेकर वेलनेस, वन्यजीव, ग्रामीण अनुभव और बिजनेस इवेंट्स तक, हर क्षेत्र यात्रा करने का एक अलग कारण देता है। यह विविधता देश भर में पर्यटन स्थलों, स्थानीय समुदायों और पर्यटन व्यवसायों के लिए भी अवसर पैदा करती है।
आध्यात्मिक और तीर्थ यात्रा पर्यटन
भारत में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म से जुड़ी दुनिया की कुछ सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ और आध्यात्मिक जगहें हैं। अयोध्या, काशी, बोधगया, अमृतसर, तिरुपति और पुरी जैसी जगहों पर पूरे भारत और विदेशों से तीर्थयात्री और पर्यटक आते हैं। सरकार की प्रसाद (PRASHAD) और स्वदेश दर्शन जैसी पहल धार्मिक जगहों पर बुनियादी ढांचे और पर्यटकों के लिए सुविधाओं के विकास में मदद कर रही हैं।

बौद्ध सर्किट और सांस्कृतिक जुड़ाव
भारत की बौद्ध विरासत इसे पूरे एशिया के समुदायों और यात्रियों से जोड़ती है। बिहार में बोधगया, उत्तर प्रदेश में सारनाथ और कुशीनगर, और बुद्ध के जीवन से जुड़ी अन्य जगहें भारत के बौद्ध पर्यटन का एक अहम हिस्सा हैं। ये जगहें व्यापक बौद्ध दुनिया के साथ देश के गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी दिखाती हैं।

विरासत और सांस्कृतिक पर्यटन
भारत की विरासत इसके किलों, महलों, मंदिरों, पुरातात्विक स्थलों, संग्रहालयों और ऐतिहासिक शहरों में झलकती है। इसकी सांस्कृतिक खासियत सिर्फ स्मारकों तक ही सीमित नहीं है। शास्त्रीय नृत्य और संगीत, त्योहार, हस्तशिल्प और क्षेत्रीय खान-पान पर्यटकों को ऐसी परंपराओं का अनुभव कराते हैं जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं और फल-फूल रही हैं।

वेलनेस, योग और मेडिकल पर्यटन
योग, आयुर्वेद और चिकित्सा की अन्य पारंपरिक पद्धतियों की भारत की पुरानी परंपराएं देश को वेलनेस पर्यटन में एक खास जगह दिलाती हैं। इन परंपराओं के साथ-साथ आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध हैं। ये सब मिलकर उन पर्यटकों के लिए अवसर पैदा करते हैं जो वेलनेस, बीमारियों से बचाव और इलाज की तलाश में हैं।
पारिस्थितिकी पर्यटन (इको-टूरिज्म) और वन्यजीव (वाइल्डलाइफ) पर्यटन
भारत के अलग-अलग तरह के लैंडस्केप में वाइल्डलाइफ सफारी और पक्षियों को देखने से लेकर ट्रेकिंग और नेचर ट्रेल्स तक के अनुभव मिलते हैं। नेशनल पार्क, टाइगर रिजर्व, वेटलैंड्स, मैंग्रोव, जंगल और हिमालयी इलाके प्रकृति का अनुभव करने और साथ ही संरक्षण में मदद करने के मौके देते हैं। जिम्मेदार पर्यटन इन जगहों के आस-पास रहने वाले समुदायों के लिए रोजगार के मौके भी पैदा कर सकता है।

ग्रामीण, होमस्टे और समुदाय-आधारित पर्यटन
पर्यटन अब यात्रियों को पारंपरिक जगहों से आगे ले जा रहा है। होमस्टे, गांव का अनुभव, स्थानीय खाना, हस्तशिल्प, खेती और समुदाय द्वारा चलाई जाने वाली गतिविधियां स्थानीय जीवन से गहरा जुड़ाव बनाती हैं। इनसे ग्रामीण परिवारों, कारीगरों और स्थानीय व्यवसायों के लिए अतिरिक्त कमाई के मौके भी बन सकते हैं। पर्यटन मंत्रालय ने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में होमस्टे को बढ़ावा देने के लिए कई पहल भी शुरू की हैं।

तटीय, क्रूज और अनुभव-आधारित पर्यटन
भारत के तटीय और अंदरूनी जलमार्ग पर्यटन के लिए नए रास्ते खोल रहे हैं। समुद्री क्रूज से यात्रा करने वालों की संख्या 2014-15 में 1.08 लाख से बढ़कर 2025-26 में 4.62 लाख हो गई है, जो 328% की बढ़ोतरी है। विशाखापत्तनम, मुंबई और चेन्नई में इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल को अपग्रेड करके चालू कर दिया गया है। पुडुचेरी को शामिल करके ईस्ट कोस्ट क्रूज सर्किट का भी विस्तार किया गया है।
तकनीक से क्रूज का अनुभव और बेहतर हो रहा है। क्यूआर-आधारित इमिग्रेशन (अप्रवासन) क्लीयरेंस सिस्टम से हर यात्री के लिए इमिग्रेशन क्लीयरेंस का समय घटकर लगभग 30 सेकंड रह गया है। डिजिटाइज्ड कस्टम्स प्रक्रियाए और ई-ग्रुप विजिट वीजा भी इंटरनेशनल क्रूज ग्रुप्स के लिए आसानी से एंट्री करने में मदद कर रहे हैं।
लाइटहाउस पर्यटन
लाइटहाउस लंबे समय से समुद्री नेविगेशन (रास्ता खोजने) में मदद करते आ रहे हैं, जिससे समुद्री यात्रा सुरक्षित और कुशल बनती है। आजकल, इन्हें खास पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित किया जा रहा है। ‘मरीन एड्स टू नेविगेशन एक्ट, 2021’ की धारा 23 के तहत, सरकार भारत की समुद्री विरासत को बचाते हुए लाइटहाउस का इस्तेमाल शिक्षा, संस्कृति और टूरिज़्म के कामों के लिए बढ़ावा दे रही है।
चेन्नई, महाबलीपुरम, अलाप्पुझा, कन्नूर, मुट्टोम, द्वारका और गोपनाथ में बने लाइटहाउस म्यूजियम, लाइटहाउस तकनीक के विकास और भारत के समुद्री इतिहास को दिखाते हैं। देश भर में 75 लाइटहाउस पर पर्यटन से जुड़ी सुविधाएं विकसित की गई हैं, जिससे उनकी ऐतिहासिक और आर्किटेक्चर से जुड़ी अहमियत को बनाए रखने के साथ-साथ उन्हें पर्यटकों के लिए भी खोला जा सका है।
एमआईसीई पर्यटन: भारत का बिजनेस इवेंट्स इकोसिस्टम बनाना
मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फेंस और एग्जिबिशन, यानी एमआईसीई पर्यटन, भारत की पर्यटन रणनीति का एक अहम हिस्सा है। पर्यटन मंत्रालय ने इस क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए एमआईसीई उद्योग के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति और रोडमैप तैयार किया है। भारत दिल्ली में भारत मंडपम और यशोभूमि, और मुंबई में जियो वर्ल्ड सेंटर जैसे बड़े स्थलों के जरिए अपने एमआईसीई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है। सरकार ने दक्षिण भारत के विशेष रूप से कम से कम 10 भारतीय शहरों को वैश्विक MICE गंतव्यों के रूप में विकसित करने की क्षमता की भी पहचान की है।
अनुमान है कि वैश्वक एमआईसीई उद्योग 2030 तक 870 बिलियन डॉलर से बढ़कर 1.4 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो जाएगी। अभी वैश्वक बाजार में भारत की हिस्सेदारी 5% है, इसलिए देश इस बढ़ते हुए मार्केट का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।
| ब्रिक्स (BRICS): पर्यटन सहयोग को मजबूत करना2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पर्यटन सहयोग को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में शामिल किया गया। अगस्त 2026 में जयपुर में हुई ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक ‘जयपुर घोषणापत्र’ को अपनाने के साथ संपन्न हुई। यह घोषणापत्र चार प्राथमिकताओं पर केंद्रित है: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यटन, टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन, पर्यटन कौशल और क्षमता निर्माण और आसान यात्रा सुविधाओं के साथ पर्यटन आदान-प्रदान। यह पर्यटन योजना, डेस्टिनेशन मैनेजमेंट, पर्यटक सेवाओं, बहुभाषी संचार और यात्रा सुविधाओं में सहयोग का भी समर्थन करता है। |
| जी20: भारत की पर्यटन कहानी को देश भर में पहुंचानाभारत की जी20 अध्यक्षता ने पारंपरिक बड़े शहरों से हटकर अन्य जगहों की ओर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित किया। 60 शहरों में 200 से ज्यादा बैठकें हुईं, जिससे जी20 कार्यक्रमों की पहुंच भौगोलिक रूप से अभूतपूर्व स्तर तक फैली।इन बैठकों ने भारत की विरासत, स्थानीय शिल्प, क्षेत्रीय खान-पान और सांस्कृतिक अनुभवों को वैश्विक दर्शकों के सामने पेश किया। साथ ही, इन्होंने देश की अलग-अलग जगहों पर बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों की मेजबानी करने की क्षमता को भी प्रदर्शित किया। |
इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित पर्यटन स्थलों का विकास
भारत में पर्यटन का विकास अब अलग-अलग आकर्षणों को विकसित करने के बजाय, इंटीग्रेटेड डेस्टिनेशन इकोसिस्टम बनाने पर ज्यादा केंद्रित है। ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के तहत, पर्यटन मंत्रालय डेस्टिनेशन और पर्यटक-केंद्रित अप्रोच अपना रहा है, जिसमें टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन, पर्यटन के अनुभव और सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
इस रणनीति में कनेक्टिविटी एक अहम हिस्सा है। इस योजना की शुरुआत से अब तक 95 हवाई अड्डों को जोड़ने वाले कुल 687 RCS-UDAN मार्ग परिचालित किए जा चुके हैं। 2026-27 से 2035-36 तक के लिए मॉडिफाइड उड़ान योजना के तहत ₹28,840 करोड़ का बजट मंजूर किया गया है, जिसमें 100 हवाई अड्डे और 200 आधुनिक हेलीपैड विकसित करने की योजना है। इन उपायों का उद्देश्य पर्यटन स्थलों तक क्षेत्रीय और ‘लास्ट-माइल’ (अंतिम छोर तक) पहुंच को बेहतर बनाना है, खासकर उन इलाकों में जहाँ सुविधाएं कम हैं।
ये सभी प्रयास मिलकर भारत के पर्यटन के दायरे को बढ़ा रहे हैं। इनसे ज्यादा पर्यटन स्थल जुड़ रहे हैं, नए अनुभव बन रहे हैं और पर्यटन देश भर के समुदायों के और करीब आ रहा है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी पहल
स्वदेश दर्शन योजना
पर्यटन मंत्रालय ने 2014-15 में पूरे देश में चुनिंदा थीम पर आधारित टूरिज्म सर्किट विकसित करने के लिए ‘स्वदेश दर्शन’ योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत, मंत्रालय ने 15 थीम-आधारित टूरिस्ट सर्किटमें ₹5,295.24 करोड़ से ज़्यादा के निवेश वाली 76 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें से 75 परियोजनाओं का काम पूरा हो चुका है। इस कार्यक्रम के तहत बौद्ध, तटीय, रेगिस्तानी, इको, हिमालयी, पूर्वोत्तर, रामायण, ग्रामीण, आध्यात्मिक, जनजातीय और अन्य थीम-आधारित सर्किट में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया गया है।
इसी को आगे बढ़ाते हुए, ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ डेस्टिनेशन-केंद्रित नज़रिया अपनाता है, जिसमें टिकाऊ और अनुभव-आधारित पर्यटन पर ध्यान दिया जाता है। बेहतर प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्यटकों के अनुभव के जरिए पर्यटन स्थल विकसित करने के लिए ₹2,207.08 करोड़ की लागत वाली 53 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
चैलेंज-बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट (सीबीडीडी)
चैलेंज-बेस्ड डेस्टिनेशन डेवलपमेंट (सीबीडीडी) पहल, स्वदेश दर्शन 2.0 की एक उप-योजना है। इसका उद्देश्य पर्यटन स्थलों का सर्वांगीण विकास करना, आने वाले पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाना और टिकाऊ व जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है।
अब तक, ज्यादा पर्यटन क्षमता वाले पर्यटन स्थलों के लिए ₹687.99 करोड़ की लागत वाली 37 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनमें आध्यात्मिक और इको-टूरिज्म श्रेणियां शामिल हैं।
प्रसाद (PRASHAD) योजना
चुनिंदा तीर्थ और हेरिटेज जगहों पर टूरिज़्म से जुड़ी सुविधाओं को विकसित करने के लिए 2014-2015 में ‘पिलग्रिमेज रिजुवेनेशन एंड स्पिरिचुअल, हेरिटेज ऑग्मेंटेशन ड्राइव’ (PRASHAD) शुरू की गई थी। यह योजना राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इन जगहों के मिले-जुले विकास के लिए आर्थिक मदद देती है। इसमें पर्यटकों की सुविधाओं, पहुंच, साफ-सफाई, सुरक्षा और स्थानीय लोगों की आजीविका पर ध्यान दिया जाता है।
इस योजना के शुरू होने के बाद से, पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद (PRASHAD) के तहत ₹1,726.74 करोड़ की लागत वाली 54 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इस योजना ने तीर्थ स्थलों पर पर्यटकों के अनुभव, स्थायित्व और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए कई तरह के काम किए हैं। इनमें टूरिस्ट फ़ैसिलिटेशन सेंटर, साउंड एंड लाइट शो, पार्किंग की सुविधाएं, घाट, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, सोलर पैनल और सीसीटीवी लगाना शामिल है।
पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता (एसएएससीआई)
पर्यटन के लिए एसएएससीआई योजना वैश्विक मानकों के अनुसार प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों के विकास का समर्थन करती है। यह बेहतर पर्यटन बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी और आगंतुक सुविधाओं पर केंद्रित है। यह योजना रोजगार पैदा करने और स्थानीय आर्थिक विकास को समर्थन देने का भी प्रयास करती है। इस योजना के तहत, 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इस योजना को वित्त वर्ष 2024-25 में 100% केंद्रीय वित्त पोषण के साथ ₹3,295.76 करोड़ प्राप्त हुए।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए, संशोधित दिशानिर्देश उन पात्र राज्यों को, जिन्होंने एसएएससीआई 2024-25 के भाग III के तहत धन का लाभ नहीं उठाया था, भाग II के तहत पर्यटन परियोजनाओं के लिए ₹250 करोड़ तक प्राप्त करने की अनुमति देते हैं। इन प्रावधानों के तहत, पर्यटन परियोजनाओं के लिए नागालैंड, मिजोरम और हिमाचल प्रदेश में से प्रत्येक को ₹250 करोड़ स्वीकृत और जारी किए गए हैं।
पर्यटन से जुड़े लोगों में निवेश
भारत का पर्यटन क्षेत्र उन लोगों के कौशल में निवेश करके मजबूत होता है जो पर्यटकों की सेवा करते हैं। ‘सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए क्षमता निर्माण’ (सीबीएसपी) योजना के तहत, पर्यटन मंत्रालय कौशल विकास, अपस्किलिंग और रीस्किलिंग के लिए अल्पकालिक प्रशिक्षण देता है। इसमें स्थानीय समुदाय, आदिवासी इलाके और वंचित पृष्ठभूमि के युवा शामिल हैं। इस योजना के तहत ‘हुनर से रोज़गार तक’ कार्यक्रम भी चलाया जाता है।

प्रशिक्षण सरकारी और अधिकृत निजी संस्थानों के जरिए दिया जाता है, जिनमें इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, फूड क्राफ्ट इंस्टीट्यूट और इंडियन कलिनरी इंस्टीट्यूट शामिल हैं। भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया) के 2025 के आकलन में पाया गया कि सीबीएसपी ने वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2024-25 के बीच 1.68 लाख से ज़्यादा लोगों को प्रशिक्षण दिया है और 36,000 से ज्यादा लोगों को नौकरी दिलाई।
2024 में शुरू की गई ‘पर्यटन मित्र/पर्यटन दीदी’ पहल के तहत, स्थानीय सेवा प्रदाताओं को हॉस्पिटैलिटी, साफ-सफाई, सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) के बारे में प्रशिक्षण दिया जाता है। अब तक लगभग 4,382 लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस प्रशिक्षण में कैब और ऑटो ड्राइवर, ट्रांसपोर्ट स्टाफ, होटल और रेस्टोरेंट के कर्मचारी, होमस्टे के मालिक, गाइड, पुलिसकर्मी, सड़क किनारे सामान बेचने वाले, दुकानदार और छात्र शामिल हैं। इसमें महिलाओं और पिछड़े समुदायों के लोगों को भी शामिल किया गया है।
मंत्रालय सीबीएसपी करिकुलम में बदलाव भी कर रहा है और उद्योग की जरूरतों के हिसाब से नए पर्यटन स्थलों को भी इसमें जोड़ रहा है। होटल मैनेजमेंट के 21 केंद्रीय संस्थान और आठ बड़े हॉस्पिटैलिटी ग्रुप्स के साथ भागीदारी से व्यावसायिक प्रशिक्षण और भी मजबूत होता है।
अगली मंजिल डिजिटल है
पर्यटन का भविष्य सिर्फ तकनीक से तय नहीं होगा, बल्कि इस बात से तय होगा कि यात्राओं को ज्यादा व्यक्तिगत, डेस्टिनेशन को ज्यादा टिकाऊ, व्यवसायों को ज्यादा प्रतिस्पर्धी और पर्यटन को ज्यादा समावेशी बनाने के लिए इसका कितनी असरदार ढंग से इस्तेमाल किया जाता है। विश्व पर्यटन दिवस (वर्ल्ड टूरिज्म डे) 2026 की थीम इसी बदलते परिदृश्य को दर्शाती है, जहां तकनीक, डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर्यटन के अनुभव का अहम हिस्सा बन रहे हैं।
भारत के बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म, एआई-सक्षम सेवाएं, पर्यटन स्थल का विकास, कनेक्टिविटी और कौशल-निर्माण के प्रयास एक ज्यादा सहज और जुड़े हुए पर्यटन इकोसिस्टम को बनाने में मदद कर रहे हैं। जैसे-जैसे भारत इस पर्यटन ढांचे को मजबूत कर रहा है, अगली मंजिल न सिर्फ डिजिटल है, बल्कि समावेशी, टिकाऊ, लोगों पर केंद्रित और विश्व-स्तरीय भी है।
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