सरकार ने पिछले पांच वर्षों में, कोयले के आवंटन और खनन को अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक और कुशल बनाने के लिए कई संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक सुधार किए हैं। खुली प्रतिस्पर्धी नीलामी के माध्यम से आवंटन से वितरण प्रमुख बदलाव रहा है। साथ ही वर्ष 2020 में कोयले की बिक्री या अंतिम उपयोग पर बिना किसी प्रतिबंध के वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत की गई है।
1. पारदर्शिता और बाजार आधारित आवंटन के लिए प्रमुख सुधार:
- वाणिज्यिक कोयला खनन: बिना किसी तकनीकी या वित्तीय पात्रता शर्तों के स्वचालित मार्ग के तहत शत प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है।
- राजस्व-साझाकरण मॉडल: पारदर्शी और बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण के लिए राष्ट्रीय कोयला सूचकांक की शुरुआत के समर्थन से, नीलामी अब प्रतिशत राजस्व-साझाकरण मॉडल में परिवर्तित हो गई है।
- सिंगल विंडो मोड एग्नोस्टिक (एसडब्ल्यूएमए) नीलामी: इसे कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के सभी गैर-लिंकेज कोयले को एक ही विंडो के माध्यम से बेचने के लिए शुरू किया गया है, ताकि बाजार की विसंगतियों को दूर किया जा सके और खरीददारों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ाया जा सके।
- शक्ति नीति का सरलीकरण: कोयला लिंकेज आवंटन को दो चरणों में सरलीकृत किया गया है- पहला चरण अधिसूचित मूल्य पर और दूसरा चरण अधिसूचित मूल्य से अधिक प्रीमियम पर, जिससे मौजूदा लिंकेज उपभोक्ता शत प्रतिशत पीएलएफ आवश्यकता की खरीद कर सकेंगे।
- कोलसेतु विंडो: गैर-विनियमित क्षेत्र (एनआरएस) लिंकेज नीलामी नीति के तहत शुरू की गई यह विंडो अंतिम उपयोग प्रतिबंधों के बिना नीलामी-आधारित लिंकेज, स्व-उपभोग, कोयले की धुलाई या निर्यात के लिए पूर्ण लचीलापन प्रदान करती है।
2. कार्यकुशलता और व्यापार में सुगमता के लिए सुधार:
- सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम: खदानों के सुचारू रूप से संचालन के लिए इस विंडो को परिवेश 2.0 पोर्टल के माध्यम से शुरू किया गया।
- अन्वेषण: 44 निजी संस्थाओं को एपीए के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिससे अन्वेषण लाइसेंस की आवश्यकता समाप्त हो गई है। भूवैज्ञानिक रिपोर्टों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है।
- वैधानिक संशोधन: कोयला खदान नियंत्रण नियमों में संशोधन करके कोयला कंपनी बोर्डों को खदान खोलने की अनुमति देने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा, कोकिंग कोयले को एमएमडीआर अधिनियम, 1957 के तहत एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया गया है, जिससे कोकिंग कोयला परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी और वन मंजूरी प्रक्रिया में तेजी आएगी।
- खान विकासकर्ता और संचालक (एमडीओ) मॉडल: सरकार ने कोयला खनन के लिए खान विकासकर्ता और संचालक मॉडल पेश किया है और संसाधन निष्कर्षण को अधिकतम करने के लिए राजस्व-साझाकरण मॉडल के तहत बंद/परित्यक्त खादानों की पेशकश भी की है।
- कोयला ब्लॉक विकास एवं उत्पादन समझौतों में प्रदर्शन सुरक्षा प्रदान करने के लिए बीमा गारंटी बांड को एक स्वीकार्य साधन के रूप में शामिल किया गया है। इससे बैंक गारंटी पर निर्भरता कम होगी, अवरुद्ध कार्यशील पूंजी मुक्त होगी और भागीदारी बढ़ेगी।
सरकार ने प्रौद्योगिकी अपनाने और स्वच्छ कोयला पहलों के माध्यम से कोयला इकोसिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए कई पहलें की हैं:
- कोयला धुलाई: सरकार का लक्ष्य ‘मिशन कोकिंग कोल’ के अंतर्गत वित्त वर्ष 2030 तक देश की कोयला धुलाई क्षमता को 58 मीट्रिक टन तक बढ़ाना है।
- डिजिटल माइन मॉनिटरिंग: कोयला मंत्रालय ने कोयले के उत्पादन, प्रेषण, भंडारण और परिवहन की तत्क्षण निगरानी के लिए कोयला शक्ति डैशबोर्ड की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त, अनधिकृत खनन गतिविधियों की नागरिक-आधारित रिपोर्टिंग के लिए खनन प्रहरी मोबाइल ऐप और सीएमएसएमएस वेब ऐप की शुरुआत की गई है। सीआईएल ने वैज्ञानिक खदान योजना के लिए एआई-आधारित वीडियो एनालिटिक्स, आरएफआईडी-सक्षम वेइंगब्रिज, जीपीएस-आधारित वाहन ट्रैकिंग और ड्रोन/उपग्रह-आधारित मैपिंग से लैस एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) भी स्थापित किए हैं।
- कोयला गैसीकरण और यूसीजी: सरकार ने सतही कोयले/लिग्नाइट के गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए, वर्ष 2030 तक 100 मीट्रिक टन गैसीकरण क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 8,500 करोड़ रुपये (जिनमें से 8 परियोजनाएं पहले ही स्वीकृत हो चुकी हैं) और 37,500 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली दो प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी है।
- नवीकरणीय ऊर्जा और कार्बन कैप्चर: कोल इंडिया लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2027-28 तक 3 गीगावाट और वित्त वर्ष 2029-30 तक 9.5 गीगावाट की शुद्ध शून्य नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य के साथ एक चरणबद्ध नवीकरणीय ऊर्जा कार्य योजना को अपनाया है, जिसमें से 558 मेगावाट पहले से ही यूटिलिटी और कैप्टिव परियोजनाओं में स्थापित है।
देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसके अलावा, सरकार वृक्षारोपण/जैविक पुनर्स्थापन, पर्यावरण पार्क विकास और खदान जल उपयोग जैसी पहलों के माध्यम से कोयला खनन में पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देती है। पारंपरिक ड्रिलिंग के स्थान पर विस्फोट-रहित खनन प्रौद्योगिकियों (जैसे सरफेस माइनर्स) को तेजी से अपनाया जा रहा है।
देश के घरेलू कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2019-20 में लगभग 731 मिलियन टन से बढ़कर लगातार दो वर्षों तक 1 बिलियन टन से अधिक हो गया है, और वित्त वर्ष 2024-25 में 1047.52 मीट्रिक टन और वित्त वर्ष 2025-26 में 1039 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।
सरकार ने एकीकृत कोयला लॉजिस्टिक्स योजना शुरू की है जिसका उद्देश्य रेल, सड़क, तटीय जल परिवहन और अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से प्रौद्योगिकी-आधारित, लागत प्रभावी बहुआयामी लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम विकसित करना है। कुल मिलाकर 139 फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाएं शुरू की गई हैं जिनकी कुल क्षमता लगभग 1,319 मिलियन टन है, जिनमें से लगभग 589 मिलियन टन क्षमता वाली 72 परियोजनाएं पहले ही चालू हो चुकी हैं।
सरकार ने कोयला क्षेत्र को और सुव्यवस्थित करने के लिए कोयला और उसके प्रसंस्कृत रूपों के व्यापार के लिए एक विनियमित ऑनलाइन मंच स्थापित करने हेतु कोयला विनिमय नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। कोयला विनिमय के माध्यम से कैप्टिव/वाणिज्यिक खनिक और उपभोक्ता वितरण-आधारित अनुबंध कर सकेंगे।
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने आज लोकसभा में लिखित प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।
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