श्री गोयल ने निर्यात के अवसरों को रेखांकित किया एवं भारत से विश्वस्तरीय उत्पादों के निर्माण का आह्वान किया
ऑटोमोटिव क्षेत्र में मजबूती साझेदारी, प्रौद्योगिकी, नवाचार, आर एंड डी, कौशल विकास एवं विविध वैश्विक बाजारों से आएगी: श्री गोयल
एआई ऑटोमोटिव उद्योग को अधिक कुशल, प्रतिस्पर्धी व ग्राहक अनुकूल बनाने में मदद करेगा, नौकरियों की भूमिकाएं बदल सकती हैं पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे: श्री गोयल
सरकार महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी, प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर व औद्योगिक पार्कों के साथ उद्योग का समर्थन करने को तैयार
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज मुख्य अतिथि के रूप में 66वें एसआईएएम वार्षिक सम्मेलन को संबोधित किया और भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग से भारत की बढ़ती व्यापार साझेदारियों, बढ़ते घरेलू बाजार और विनिर्माण क्षेत्र में हो रहे वैश्विक बदलावों से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने उद्योग से स्थानीयकरण को गहरा करने, प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने, निर्यात का विस्तार करने और वैश्विक बाजारों की सेवा के लिए खुद को तैयार करने का आग्रह किया।
श्री गोयल ने कहा कि ऑटोमोटिव क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की विकास यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण चालकों में से एक होगा। उन्होंने कहा कि इस उद्योग ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है और बढ़ती आय एवं आकांक्षाएं इस वृद्धि को जारी रखने की काफी गुंजाइश प्रदान करती हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत को केवल घरेलू बाजार की सेवा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए और उन्होंने कंपनियों से “वैश्विक स्तर पर सोचने” का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे अधिक वैश्विक कार कंपनियां भारत आएंगी, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कंपनियों को दुनिया भर के बाजारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत में ‘इकोनॉमीज़ ऑफ़ स्केल’ का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अत्यधिक लागत, नियामक बोझ, युवाओं एवं प्रतिभाओं की कमी और अपर्याप्त औद्योगिक क्षमताओं के कारण विकसित देशों से उत्पादन तेजी से बाहर स्थानांतरित होगा। जो कंपनियां इन बदलावों का पहले से अनुमान लगाएंगी, भविष्य की योजना बनाएंगी और उभरते अवसरों को पकड़ेंगी, उन्हें लाभ होगा; जबकि जो कंपनियां अपने मौजूदा व्यवसायों और बाजारों के आराम में रहेंगी, उनके पीछे छूट जाने का जोखिम है।
श्री गोयल ने कहा कि भारत ने यूरोपीय संघ के साथ गहन बातचीत के माध्यम से “सर्वश्रेष्ठ प्रयास” किया है और बातचीत के दौरान अंतरराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा दिया गया सहयोग उल्लेखनीय था। उन्होंने कहा कि इस परिणाम ने द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय व्यापार, बढ़ते निर्यात, बेहतर प्रौद्योगिकी अवशोषण और नवीनतम तकनीकों को अपनाने के अवसर प्रदान किए हैं। उन्होंने कंपनियों से इन अवसरों का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने आगाह किया कि कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय या घरेलू बाजारों की तुलना में भारत के लिए अलग गुणवत्ता के उत्पाद नहीं बनाने चाहिए। उन उदाहरणों का हवाला देते हुए जहां वैश्विक स्तर पर बेचे जाने वाले मॉडलों की तुलना में भारतीय डिजाइनों को कमतर माने जाने के कारण वाहनों का निर्यात नहीं हो पा रहा था, उन्होंने उद्योग से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि भारत में निर्मित उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतरें।
मंत्री ने कहा कि सरकार व्यापार समझौतों के माध्यम से ऑटोमोटिव उद्योग के लिए अपार अवसरों के रास्ते खोल रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले साढ़े चार वर्षों में नौ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है, जो लगभग $60 ट्रिलियन की संयुक्त जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं। उन्होंने कहा कि यह भारत के दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो “नए भारत” के आत्मविश्वास, सुधारों की गति और भारत के इकोसिस्टम के परिवर्तन को दर्शाता है।
श्री गोयल ने कहा कि यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष द्वारा “मदर ऑफ ऑल डील्स” के रूप में वर्णित भारत-ईयू समझौता अगले साल मार्च तक लागू हो जाएगा। उन्होंने ऑटोमोटिव उद्योग से इन अवसरों का लाभ उठाने के लिए तैयार रहने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि यूके के साथ समझौता पहले से ही लागू है, जो उनकी समझ के अनुसार, अधिकांश ऑटो कंपोनेंट्स के लिए जीरो ड्यूटी पर 100 प्रतिशत पहुंच प्रदान करता है।
मंत्री ने कहा कि भारत के व्यापार समझौतों पर सैकड़ों क्षेत्रीय मंडलों और हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद बातचीत की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने न केवल संबंधित मंत्रालयों, बल्कि निजी क्षेत्र के संघों और कंपनियों के समूहों से भी परामर्श किया है, और सरकार द्वारा किए गए प्रत्येक व्यापार समझौते, द्विपक्षीय व्यापार समझौते और तरजीही व्यापार समझौते का व्यापक रूप से स्वागत किया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी द्विपक्षीय व्यापार समझौते में, किसानों, मछुआरों, एमएसएमई, श्रमिकों, हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्रों और उद्योग से संबंधित संवेदनशीलता सहित एक भी भारतीय संवेदनशीलता से समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने दोहराया कि सरकार ने परामर्श के माध्यम से भारत के संवेदनशील हितों की उच्चतम संभव सीमा तक रक्षा की है और यह समझौता केवल पहली किश्त का प्रतिनिधित्व करता है, जिसके बाद हितधारकों के साथ निरंतर जुड़ाव जारी रहेगा।
श्री गोयल ने कहा कि भारत ने पिछले साल वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात में $863 बिलियन का रिकॉर्ड दर्ज किया था और चालू वर्ष के लिए $1 ट्रिलियन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि पहले पांच महीनों के दौरान निर्यात में प्रति माह लगभग $9 बिलियन की वृद्धि हो रही थी, जिसमें कई वर्षों के बाद सेवाओं की तुलना में मर्चेंडाइज निर्यात तेजी से बढ़ रहा था। शेष सात महीनों में लक्ष्य से लगभग $29 बिलियन की दूरी को देखते हुए, उन्होंने उद्योग से मासिक गति को बढ़ाकर $12 बिलियन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वह एक कमतर लक्ष्य तय करने के बजाय ऊंचा लक्ष्य रखना और थोड़ा पीछे रह जाना अधिक पसंद करेंगे। साथ ही, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत और उसके 1.4 अरब लोगों में इस लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता है।
श्री गोयल ने कहा कि एआई ऑटोमोटिव क्षेत्र को अपनी क्षमताओं का विस्तार करने, दक्षता व प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने और ग्राहक सेवा को बढ़ाने में मदद करेगा, जबकि यह नए नौकरी प्रोफाइल भी तैयार करेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि “नौकरियों की भूमिकाएं बदल सकती हैं, लेकिन रोजगार के अवसर बढ़ेंगे”। उन्होंने कहा कि समावेशी और सतत विकास के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाना आवश्यक है और मजबूती केवल आपूर्ति श्रृंखलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापार योजनाओं, नवाचार, आर एंड डी, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास और प्रतिभा तक फैली हुई है। इसमें एआई ‘विकसित भारत’ के लिए लचीली और सस्टेनेबल मोबिलिटी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
श्री गोयल ने कहा कि सतत गतिशीलता को केवल पेट्रोल और डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर गौर किया कि कंपनियां अक्सर अपने उत्पाद पोर्टफोलियो के आधार पर ईवी (EVs), हाइब्रिड, बैटरी आयात और ऊर्जा स्रोतों पर अलग-अलग तुलनाएं प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि सस्टेनेबिलिटी में पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों आयाम होने चाहिए और उन्होंने आयातित सामानों पर केवल 10-15 प्रतिशत वैल्यू एडिशन को इंडीजनाइजेशन बताए जाने के दावों पर सवाल उठाया।
वास्तविक प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए, उन्होंने पिछले साल भारत द्वारा लगभग 10 लाख कारों के निर्यात, मारुति के बढ़ते निर्यात, और टाटा मोटर्स व महिंद्रा द्वारा विश्वस्तरीय इलेक्ट्रिक वाहनों की पेशकश, जिसमें मारुति द्वारा इलेक्ट्रिक कारों का निर्यात भी शामिल है, का उल्लेख किया।
श्री गोयल ने कहा कि ऑटोमोटिव क्षेत्र में विकास की मजबूत संभावनाएं हैं। बढ़ती आय और महत्वाकांक्षाओं के बल पर एसीएमए ने लगभग 16-17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, जबकि कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है। उन्होंने बेहतर सड़क गुणवत्ता की आवश्यकता पर जोर देते हुए यह भी रेखांकित किया कि राजमार्गों के विस्तार और सड़क बुनियादी ढांचे में लगभग $130 बिलियन के वार्षिक निवेश के सहयोग से दोपहिया और प्रीमियम वाहनों की मांग बढ़ रही है। श्री गोयल ने ऑटोमोटिव उद्योग से निर्यात बाजारों को अधिक सक्रिय रूप से देखने का आग्रह किया और कहा कि निर्यात में हर दो साल में दोगुना होने की क्षमता है।
श्री गोयल ने कहा कि यह धारणा बदल रही है कि भारतीय ऑटोमोबाइल केवल भारत के लिए बनाए जाते हैं; ब्रिटेन और यूरोप में भारतीय डिजाइन वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की इंजीनियरिंग वैश्विक साझेदारियों की क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मजबूती साझेदारियों से आएगी और कंपनियों से स्थानीयकरण को और गहरा करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सरकार स्वदेशीकरण के वास्तविक स्तर का आकलन करने के लिए कंपनी-वार आयात-निर्यात डेटा की निगरानी कर रही है। उन्होंने उन कंपनियों से, जो कुछ उत्पादों का स्थानीयकरण करने में असमर्थ हैं, अपने निर्यात का विस्तार करके इसकी भरपाई करने का आग्रह किया। उन्होंने उद्योग को आश्वासन दिया कि सरकार आवश्यक सक्षम माहौल बनाने और जहां भी जरूरत हो, सहायता देने के लिए तैयार है।
श्री गोयल ने कहा कि जैसे-जैसे वैश्विक वातावरण अधिक जटिल होता जा रहा है, भारत विश्वसनीय वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से मोबिलिटी के “चार एम” को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है, जो हैं: मॉलिक्यूल्स, मॉड्यूल्स, मेगावाट और मार्केट हैं।
‘मॉलिक्यूल्स’ के संदर्भ में, उन्होंने रेयर अर्थ, मैग्नेट्स और ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत दुर्लभ पृथ्वी और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता वाले कुछ एफटीए में संबंधों की संभावनाएं तलाश रहा है, विशेष खनिजों के लिए समुद्री अन्वेषण को बढ़ावा दे रहा है और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ पैक्स सिलिका पहल में भाग ले रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार इस क्षेत्र में नवाचार, निवेश और आर एंड डी करने वाली कंपनियों का समर्थन करेगी और उन्होंने ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान एवं विकास नवाचार कोष को रेखांकित किया।
‘मॉड्यूल्स’ के संदर्भ में, उन्होंने कंपनियों से उन कंपोनेंट्स की समीक्षा करने का आग्रह किया जिन्हें वे आयात करना जारी रखे हुए हैं, और जहां भी आवश्यकता हो, तकनीकी सहयोग व साझेदारी करने की सलाह दी।
श्री गोयल ने कहा कि उनकी हालिया जापान यात्रा के दौरान जापानी कंपनियों ने भारत के साथ साझेदारी करने में गहरी रुचि दिखाई; इस दौरान 50 से अधिक आमने-सामने बैठकें हुईं और लगभग 500 कंपनियों के साथ बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि यूरोपीय कंपनियां भी भारत से साझेदारी और प्रतिभा की तलाश कर रही हैं, जबकि जापान ने सालाना 3,00,000 लोगों की आवश्यकता का संकेत दिया है, जो भारतीय कंपनियों के लिए प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने और एक कुशल प्रतिभा पूल बनाने का अवसर प्रस्तुत करता है।
श्री गोयल ने कहा कि यह भारतीय कंपनियों के लिए विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग करने, भारत में तकनीक लाने, यहां उत्पादों का निर्माण करने और उन्हें वापस उन बाजारों में बेचने का भी एक अवसर प्रस्तुत करता है।
मेगावाट के संदर्भ में, उन्होंने कहा कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और स्वदेशी ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी में आत्मनिर्भर बनने, और बैटरियों व अन्य तकनीकों को भारत में विकसित करने या लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत को अधिक से अधिक कुशल वाहनों का निर्माण करने की आवश्यकता है क्योंकि पर्यावरणीय स्थिरता के लिए एक बेहतर भविष्य जरूरी है।
श्री गोयल ने कहा कि भारत ने ऑटोमोटिव उद्योग, स्टार्टअप्स, आईआरईएल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान और संबंधित मंत्रालयों को एक साथ लाकर परमानेंट मैग्नेट की चुनौती से निपटने में मजबूती दिखाई। उन्होंने कहा कि उद्योग और स्टार्टअप्स की सामूहिक प्रतिक्रिया उत्साहजनक थी, जिसमें एक स्टार्टअप ने दो दोपहिया मोटरों का प्रदर्शन किया—एक परमानेंट मैग्नेट का उपयोग करके और दूसरी उसके बिना।
मंत्री के अनुसार, स्टार्टअप ने दावा किया कि बिना परमानेंट मैग्नेट वाली मोटर सस्ती, हल्की, बेहतर सुविधाओं वाली और बेहतर आउटपुट देने वाली थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने उद्योग की एक सदस्य कंपनी से उस स्टार्टअप से जुड़ने और इस दावे का सत्यापन करने को कहा था। उन्होंने इस बात पर भी गौर किया कि स्टार्टअप पहले ही विभिन्न एजेंसियों से सत्यापन प्रस्तुत कर चुका था।
उन्होंने इस विकास को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण के तहत अधिक आत्मनिर्भर बनने के भारत के लक्ष्य के लिहाज से विशेष रूप से संतोषजनक बताया।
श्री गोयल ने कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद भारत को निचले स्तर के निर्यात लक्ष्य तय नहीं करने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार समझौतों और भारत की वैश्विक साझेदारियों का उद्देश्य भारतीय उद्योग के लिए नए अवसर पैदा करना है। उन्होंने कहा कि विभिन्न देश भारत के साथ व्यापार का विस्तार करना चाहते हैं और कंपनियों से इस अवसर का पूरा लाभ उठाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का एक स्पष्ट रोडमैप तैयार है। उन्होंने घरेलू अन्वेषण को बढ़ावा देकर और देश के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके आयातित कच्चे तेल तथा ऊर्जा पर निर्भरता को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया।
श्री गोयल ने कहा कि सरकार भूमि और प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे के माध्यम से बड़ी ऑटोमोटिव एवं ऑटो-कंपोनेंट परियोजनाओं का समर्थन करने के लिए तैयार है। उन्होंने ऐसे इकोसिस्टम के लिए स्थानों की पहचान करने के लिए उद्योग को आमंत्रित किया। उन्होंने उद्योग की मांग के आधार पर देश-विशिष्ट औद्योगिक पार्क स्थापित करने की सुविधा देने की भी पेशकश की।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, श्री गोयल ने उद्योग से स्थानीयकरण को गहरा करने, निर्यात का विस्तार करने और एक महत्वाकांक्षी निर्यात लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दुनिया में सर्वश्रेष्ठ के साथ प्रतिस्पर्धा करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योग को सरकार के निरंतर समर्थन का आश्वासन दिया और कहा कि अभूतपूर्व गति से भारत के विकास के लिए इसके 1.4 अरब लोगों के सामूहिक प्रयास और आत्मविश्वास की आवश्यकता होगी।
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