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पीबी शब्‍द


भारत के समाचार कक्ष के लिए प्रसार भारती की विश्वसनीय समाचार सेवा

पीबी शब्‍द, भारत के सार्वजनिक सेवा प्रसारक प्रसार भारती की निःशुल्क समाचार फीड सेवा है। मार्च 2024 में शुरू की गई यह सेवा विस्‍तारित मीडिया उद्योग के लिए एक समाचार वायर के रूप में कार्य करती है। पंजीकृत संगठन 15 भारतीय भाषाओं में टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटोग्राफ और इन्फोग्राफिक्स प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा मार्च 2027 तक निःशुल्क है और 3,600 मीडिया संगठनों को अपनी सेवाएँ प्रदान करती है। इसकी सामग्री देशव्यापी नेटवर्क के माध्यम से एकत्र की जाती है और संपादकीय जाँच की कई स्तरों वाली प्रक्रिया के माध्यम से सत्यापित की जाती है। इस प्रकार, पीबी शब्‍द भारत के मीडिया परिदृश्य में विश्वसनीय सूचना की पहुँच को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पीबीएनएस से पीबी शब्‍द  तक: सार्वजनिक समाचार सेवा का

प्रसार भारती भारत का सार्वजनिक सेवा प्रसारक है और संसद के एक कानून द्वारा बनाया गया एक स्वायत्त निकाय है। यह प्रसार भारती कानून, 1990 के तहत 23 नवम्‍बर 1997 को अस्तित्व में आया। यह निगम अपने दो घटकों—आकाशवाणी और दूरदर्शन—के माध्यम से कार्य करता है। इसका दायित्व जनहित में सूचना का निष्पक्ष और संतुलित प्रवाह सुनिश्चित करना है।

प्रसार भारती न्यूज़ सर्विस (पीबीएनएस) की शुरुआत एक समाचार वायर सेवा के रूप में हुई थी, जो पूरी तरह से प्रसारक की अपनी संपादकीय टीमों के लिए थी। इसकी समाचार सामग्री और फीड आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के समाचार बुलेटिनों के लिए उपयोगी होती थीं। उस समय यह सेवा आंतरिक न्यूज़रूम संसाधन के रूप में ही सीमित थी।

मार्च 2024 में इस सेवा का दायरा बढ़ाया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने 13 मार्च 2024 को नई दिल्ली में पीबी शब्‍द  का शुभारंभ किया। अब इस सेवा का नाम प्रसार भारती – शेयर्ड ऑडियो-विजुअल्‍स फॉर ब्रॉडकास्‍ट एंड डिसेमिनेशन है। यह पंजीकृत मीडिया संगठनों को टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटो और इन्फोग्राफिक प्रारूपों में निःशुल्क, उपयोग के लिए तैयार समाचार सामग्री उपलब्ध कराती है। इस प्रकार, एक आंतरिक समाचार वायर सेवा एक खुले मल्टीमीडिया समाचार-साझाकरण मंच में परिवर्तित हो गई। नीचे दी गई तालिका इस यात्रा के प्रमुख पड़ावों को दर्शाती है।

वर्षअत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण घटना
1990संसद ने प्रसार भारती कानून बनाया
1997निगम 23 नवम्‍बर 1997 को अस्तित्व में आया।
2024 तकपीबीएनएस प्रसार भारती की संपादकीय टीमों के लिए एक आंतरिक समाचार वायर सेवा के रूप में कार्य करता रहा।
मार्च 2024पीबी शब्‍द 13 मार्च को एक निःशुल्क, बहु-प्रारूप समाचार-साझाकरण मंच के रूप में शुरू किया गया।
मार्च 2025एक वर्ष पूरा होने पर निःशुल्क पहुँच को मार्च 2026 तक बढ़ाया गया।
मार्च 2026निःशुल्क पहुँच को मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया।
आगेनए उत्पाद वर्गों और बेहतर सामग्री वितरण के साथ पीबीशब्‍द 2.0 की योजना बनाई गई है।

पीबी शब्‍द कोई नए सिरे से तैयार किया गया न्यूज़रूम नहीं है। यह कई दशकों में विकसित किए गए समाचार बुनियादी ढाँचे का विस्तार है। वही संवाददाता, डेस्क और ब्यूरो अब कहीं अधिक व्यापक उपयोगकर्ता वर्ग की सेवा कर रहे हैं। विषय की पहुँच का दायरा बदला है, जबकि संपादकीय आधार वही बना हुआ है। यह पहुँच किस प्रकार कार्य करती है, इसे स्वयं इस सेवा की संरचना के माध्यम से बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।

क्या आप जानते हैं?इस सेवा के नाम के दो अर्थ हैं। इसका विस्तृत रूप शेयर्ड ऑडियो-विजुअल्‍स फॉर ब्रॉडकास्‍ट एंड डिसेमिनेशन है। हिंदी में शब्द’ का अर्थ बोले या लिखे गए शब्द से है। इस मंच का निर्माण इसी शब्द को व्यापक स्तर पर, तेजी से और निःशुल्क साझा करने के उद्देश्य से किया गया है। 

 पीबी शब्‍द: बहु-प्रारूप, बहुभाषी समाचार फीड

पीबी शब्‍द प्रसार भारती की एक समाचार फीड सेवा है, जो चौबीसों घंटे मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है। यह भारत और दुनिया से समयबद्ध, प्रामाणिक और उपयोग के लिए तैयार समाचार सामग्री उपलब्ध कराती है। यह फीड राष्ट्रीय राजधानी से लेकर जिला मुख्यालयों तक होने वाले घटनाक्रमों को उनके घटित होने के साथ ही प्रसारित करती है।

इसके उपयोगकर्ता पंजीकृत मीडिया संगठन, डिजिटल प्रकाशक और कंटेंट क्रिएटर हैं। समाचार पत्र, समाचार टेलीविजन चैनल और डिजिटल समाचार प्रकाशक इस उपयोगकर्ता आधार का बड़ा हिस्सा हैं। दो वर्षों के संचालन में इस सेवा ने 3,600 मीडिया संगठनों का उपयोगकर्ता आधार तैयार किया है।          

सामग्री पाँच प्रारूपों, अर्थात् टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, फोटोग्राफ और इन्फोग्राफिक्स में उपलब्ध कराई जाती है। समाचार 15 भारतीय भाषाओं में और लगभग 50 समाचार श्रेणियों के अंतर्गत उपलब्ध कराए जाते हैं। इसका कवरेज राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और स्थानीय घटनाक्रमों तक विस्तृत है। यह सेवा निःशुल्क है। पंजीकृत उपयोगकर्ताओं को उनके द्वारा डाउनलोड की जाने वाली सामग्री के लिए कोई सदस्यता शुल्क नहीं देना होता है।  निःशुल्क पहुँच मार्च 2027 तक सुनिश्चित की गई है।पीबी शब्‍द की विशेषताओं और लाभों के बारे में अधिक जानकारी के लिए पढ़ें

कौन पंजीकरण कर सकता है

पंजीकृत समाचार पत्र और पत्रिकाएँ वैध आरएनआई प्रमाण-पत्र के साथ पंजीकरण कर सकती हैं। टेलीविजन और रेडियो चैनलों के लिए वैध अपलिंक और डाउनलिंक प्रमाण-पत्र आवश्यक हैं। डिजिटल प्रकाशक अपने पैन की प्रति जमा करके पंजीकरण कर सकते हैं। प्रत्येक संगठन को एक लॉगिन प्रदान किया जाता है, जिसे उसके पत्रकार न्यूज़रूम के भीतर साझा कर सकते हैं।पीबी शब्‍द पंजीकरण के बारे में अधिक जानकारी यहाँ पढ़ें

एक मंच, अनेक डिजिटल जानकारी

पीबी शब्‍द को एकल समाचार वायर सेवा के बजाय सेवाओं के एक समूह के रूप में तैयार किया गया है। प्रत्येक उत्पाद को एक विशेष प्रकार के न्यूज़रूम द्वारा सीधे उपयोग किए जाने के लिए तैयार किया जाता है।

एक विशेषता इस मंच को पारंपरिक समाचार एजेंसी से अलग करती है। सामग्री पर प्रसार भारती का कोई लोगो नहीं होता और इसके लिए किसी क्रेडिट लाइन की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए कोई छोटा समाचार पत्र किसी राष्ट्रीय समाचार को अपने ही मास्टहेड के तहत प्रकाशित कर सकता है।

जमीनी स्तर से न्यूज़रूम तक: पीबी शब्द के पीछे का नेटवर्क

पीबी शब्‍द की ताकत उस नेटवर्क में निहित है, जो इसके लिए समाचार सामग्री उपलब्ध कराता है। प्रसार भारती देश के सबसे बड़े समाचार संकलन और डेस्क नेटवर्क में से एक संचालित करता है। समाचार उपलब्‍ध कराने में 1,500 से अधिक रिपोर्टर, संवाददाता और स्ट्रिंगर योगदान देते हैं। उनके द्वारा भेजी गई सामग्री पर 60 समर्पित संपादकीय डेस्क चौबीसों घंटे काम करता है। आकाशवाणी और दूरदर्शन अपनी-अपनी क्षेत्रीय समाचार इकाइयाँ और समाचार बुलेटिन सेवाएँ संचालित करते हैं। दोनों मिलकर लगभग प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को कवर करते हैं। नीचे दी गई तालिका इस नेटवर्क की पहुँच को दर्शाती है।

नेटवर्क जमीनी स्तर पर पहुँच
आकाशवाणी समाचार46 क्षेत्रीय समाचार इकाइयां, 1 मुख्‍यालय92 भाषाओं और बोलियों में प्रतिदिन 607 समाचार बुलेटिन
दूरदर्शन समाचार31 क्षेत्रीय समाचार इकाइयां, 1 मुख्‍यालय22 भाषाओं और बोलियों में 145 से अधिक बुलेटिन
फील्ड नेटवर्क की क्षमतादेशभर में 1,500 से अधिक रिपोर्टर, संवाददाता और स्ट्रिंगर
संपादकीय डेस्‍कचौबीस घंटे कार्यरत 60 समर्पित डेस्‍क

प्रसार से पहले संपादकीय जाँच

पीबी शब्‍द पर उपलब्ध समाचार संपादकीय जाँच की कई स्तरों वाली प्रक्रिया से गुजरते हैं। यह सेवा फर्जी, रूपांतरित या हेरफेर की गई सामग्री के विरुद्ध कड़े सुरक्षा उपाय अपनाती है। अप्रमाणित ऑनलाइन स्रोतों से प्राप्त सामग्री के मामले में भी पूरी सावधानी बरती जाती है। प्रत्येक समाचार में समय, स्थान और उचित कैप्शन का उल्लेख किया जाता है। इससे उपयोगकर्ताओं को यह स्पष्ट रूप से पता रहता है कि कोई घटनाक्रम कब और कहाँ हुआ।  प्रौद्योगिकी इस सेवा की पहुँच को व्यापक बनाती है। समाचार संकलन और संपादकीय नेटवर्क इसे एक मजबूत समाचार आधार प्रदान करता है।

सटीकता, प्रामाणिकता और समयबद्धता: सार्वजनिक सेवा की भावना

सटीकता और प्रामाणिकता इस सेवा के केन्‍द्र में हैं। सामग्री को साझा किए जाने से पहले पेशेवर रूप से तैयार, संपादित और सत्यापित किया जाता है। चौबीसों घंटे उपलब्ध फीड यह सुनिश्चित करती है कि सत्यापित समाचार बिना किसी देरी के उपयोगकर्ताओं तक पहुँचें। इसके विविध प्रारूप और भाषाएँ इस सेवा को वास्तव में समावेशी बनाती हैं। सूचना से भरे परिवेश में सत्यापित सामग्री स्वयं एक सार्वजनिक संपदा है।

भारत के विविध मीडिया इकोसिस्‍टम को जोड़ना

आज दर्शकों और पाठकों तक एक ही समय में अनेक मंचों के माध्यम से समाचार पहुँचते हैं। टेलीविजन, समाचार पत्र, वेबसाइट, मोबाइल एप्लिकेशन, यूट्यूब और सोशल मीडिया—सभी दिनभर के घटनाक्रमों को प्रसारित करते हैं। इसलिए एक न्यूज़रूम को हर दिन कई प्रारूपों में सामग्री प्रकाशित करनी होती है। पीबी शब्‍द प्रसार भारती के समाचार संकलन बुनियादी ढाँचे को इस व्यापक इकोसिस्‍टम से जोड़ता है। समाचार पत्र, टेलीविजन प्रसारक, डिजिटल प्रकाशक, कंटेंट क्रिएटर और विभिन्न मंच एक ही फीड से सामग्री प्राप्त करते हैं।

इसका लाभ छोटे और क्षेत्रीय संगठनों के लिए सबसे अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। किसी जिला समाचार पत्र के लिए दिल्ली या विदेशों में संवाददाताओं का नेटवर्क बनाए रखना सामान्यतः संभव नहीं होता। हांलाकि पीबी शब्‍द  के माध्यम से वह पेशेवर रूप से तैयार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार कवरेज तक पहुँच प्राप्त कर सकता है। उपयोग के लिए तैयार टेक्स्ट, वीडियो और ऑडियो सामग्री लागत तथा सामग्री तैयार करने में लगने वाले समय—दोनों को कम करती है।

आगे की राह

पीबी शब्‍द प्रसार भारती की समाचार संकलन क्षमता को उसके अपने चैनलों से आगे तक पहुँचाता है। विश्वसनीय सूचना अब हजारों स्वतंत्र मीडिया माध्यमों के जरिए लोगों तक पहुँचती है। आने वाले समय में इस सेवा के निरंतर विस्तार की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस तक निःशुल्क पहुँच मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है। इसलिए मीडिया संगठन निश्चितता के साथ इस फीड के अपने उपयोग की योजना बना सकते हैं। दो वर्षों के संचालन में इसके उपयोगकर्ता आधार में बढ़ोतरी होकर यह 3,600 मीडिया संगठनों तक पहुँच गया है।

सूचना के तीव्र प्रवाह के इस दौर में सटीक समाचार एक सार्वजनिक संपदा बना हुआ है। प्रसार भारती निःशुल्क, निष्पक्ष और तथ्यपरक समाचार रिपोर्टिंग तथा प्रसार के प्रति प्रतिबद्ध है। मंच पर उपलब्ध प्रत्येक सत्यापित समाचार एक जागरूक नागरिक समाज की नींव को और मजबूत करता है। इस प्रकार, पीबी शब्‍द विश्वसनीय सूचना के प्रसार के लिए साझा राष्ट्रीय बुनियादी ढाँचे के रूप में अपनी भूमिका निभाता है।

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