आईआईटी दिल्ली के एक अध्ययन ने जेम के माध्यम से 1.76 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध सामाजिक बचत का अनुमान लगाया
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) 09 अगस्त 2026 को अपने कामकाज का दस वर्ष पूरा कर लेगा। तकनीक, पारदर्शिता, दक्षता और सुशासन के जरिए सार्वजनिक खरीदारी में बदलाव के एक दशक को चिह्नित करते हुए, इस प्लेटफॉर्म ने 3.78 करोड़ से अधिक ऑर्डर प्राप्त कर 20 लाख करोड़ से ज्यादा का कुल व्यापार मूल्य (जीएमवी) हासिल किया है, जो भारत की सार्वजनिक खरीददारी प्रणाली में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
प्लेटफ़ॉर्म का सालाना जीएमवी, वित्त वर्ष 2016–17 में 422 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2024–25 और वित्त वर्ष 2025–26, दोनों ही सालों में 5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा रहा है। केवल वित्त वर्ष 2026–27 के शुरुआती चार महीनों में ही जेम ने 1,47,888 करोड़ रुपये का जीएमवी दर्ज किया है। इस प्लेटफ़ॉर्म को कुल जीएमवी में 10 लाख करोड़ रुपये का पहला आंकड़ा छूने में आठ वर्षों से ज़्यादा का समय लगा लेकिन अगला 10 लाख करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण आंकड़ा इसने दो वर्षों से भी कम समय में हासिल कर लिया जो कि सार्वजनिक खरीद प्रणाली को तेजी से अपनाने एवं बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
पिछले दशक में इस प्लेटफ़ॉर्म पर भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अपना प्रोफ़ाइल पूरा करने वाले विक्रेताओं की संख्या 3,339 से बढ़कर 25.45 लाख हो गई है, जबकि मुख्य खरीददार संगठनों की संख्या 1,707 से बढ़कर 1.37 लाख हो गई है। प्लेटफ़ॉर्म पर पंजीकृत सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई) की संख्या 2,424 से बढ़कर 12.25 लाख हो गई है।
जेम ने समावेशी सार्वजनिक खरीद को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसई) ने 9.07 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर पूरे किए हैं, जो कुल जीएमवी का 45.6 प्रतिशत है। 2.24 लाख से ज्यादा महिलाओं द्वारा संचालित एमएसई ने 50 लाख से ज्यादा ऑर्डर पूरे किए हैं, जिनका मुल्य 99,147 करोड़ रुपये से ज्यादा है, वहीं 42,242 स्टार्टअप्स ने इस प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से 65,633 करोड़ रुपये से ज्यादा के ऑर्डर प्राप्त किए हैं।
आईआईटी दिल्ली के एक अध्ययन में,वित्त वर्ष 2023–24 से 2025–26 की अवधि के दौरान, कीमत एवं प्रक्रिया की दक्षता के माध्यम से 86,571.69 करोड़ रुपये का मौद्रिक लाभ और कुल सामाजिक बचत 1,76,411.46 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया। इस अध्ययन में यह भी पता चला कि 101 वस्तुओं की अन्य ई-मार्केटप्लेस से तुलना करने पर, जेम ने 74.3 प्रतिशत वस्तुओं के लिए कम कीमतें दीं, जिससे खर्च में 13.6 प्रतिशत की बचत हुई। आर्थिक सर्वेक्षण 2021–22 में भी इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगातार खरीद बचत दर्ज की गई थी।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और बेहतर बनाने के लिए, जेम ने विक्रेता-अनुकूल कई उपाय शुरू किए हैं। लेनदेन शुल्क को 0.50 प्रतिशत से घटाकर 0.30 प्रतिशत किया गया है, जबकि 10 लाख रुपये तक के ऑर्डरों को लेनदेन शुल्क से छूट प्रदान की गई है। परिणामस्वरूप, अब सभी ऑर्डरों में से 97 प्रतिशत पर कोई लेनदेन शुल्क नहीं लगता। अधिकतम लेनदेन शुल्क 3 लाख रुपये तक सीमित है और विक्रेता मूल्यांकन शुल्क में 92 प्रतिशत तक की कमी की गई है।
एक्सिस माई इंडिया सर्वे के शुरुआती नतीजों के अनुसार, सर्वे में शामिल 92 प्रतिशत खरीदारों ने प्लेटफॉर्म पर संतुष्टि व्यक्त की। विक्रेताओं में से 67 प्रतिशत ने ज़्यादा व्यापार मात्रा की बात कही जबकि 78 प्रतिशत ने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जारी रखने की इच्छा व्यक्त की।
जेम अब पूरे सार्वजनिक खरीददारी के जीवन चक्र को डिजिटल बनाता है और संदिग्ध व्यापारिक सांठगांठ, मिलीभगत और ऑर्डर विभाजन की पहचान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग टूल्स का उपयोग करता है। एक पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म होने के नाते, यह एक समृद्ध लेनदेन डेटा भी तैयार करता है, जो नीति निर्माताओं को सार्वजनिक खरीददारी खर्च पर नज़र रखने, अक्षमताओं की पहचान करने और सबूत-आधारित नीतियां बनाने में मदद करता है।
जेम के सीईओ, श्री मिहिर कुमार ने कहा, “जेम ने सरकारी खरीद की प्रक्रिया को अस्पष्ट एवं बिखरी हुई व्यवस्था से बदलकर एक ऐसे एकल, पारदर्शी मार्केटप्लेस में बदल दिया है, जहां काबिलियत ही सफलता निर्धारित करती है। आने वाला दशक एआई के ज़्यादा इस्तेमाल से तय होगा जिससे जनता को बेहतर मूल्य मिलेगा और हर कंपनी को बराबरी का मौका मिलेगा।”
पिछले एक दशक में आए बदलावों को आगे बढ़ाते हुए, जेम ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप डेटा-आधारित तकनीकी के उपयोग को मज़बूत करना जारी रखेगा। इसका उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, सार्वजनिक खर्च से मिलने वाले मूल्य को बढ़ाना और खरीदारी पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है जो खरीदारों एवं विक्रेताओं, दोनों के लिए सरल, तेज़, ज़्यादा पारदर्शी एवं मूल्य-आधारित हो।
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