आईटीडीए रोडमैप और कार्यान्वयन संबंधी दिशानिर्देश, आदि दर्पण और जिला कृषि डीपीआर चैलेंज पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की गई; महिला नेतृत्व वाली आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए जनजातीय महिला उद्यमियों पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन
जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने 3 सितंबर 2026 को डीएजेजीयूए और पीएम जनमन जैसी जनजातीय कार्य मंत्रालय की योजनाओं की समीक्षा की, जिसमें वितरण तंत्र को मजबूत करने, समन्वय में सुधार करने, फंड के इस्तेमाल में तेजी लाने और राज्यों व कार्यान्वयन एजेंसियों में कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें अतिरिक्त सचिव मनीष ठाकुर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (एनपीएमयू), राज्य सरकारें और कार्यान्वयन एजेंसियां शामिल थीं, जिन्होंने प्रमुख हस्तक्षेपों की भौतिक और वित्तीय सुधार का आकलन करने और उनकी प्रभावशीलता और असर को बेहतर के उपायों पर विचार-विमर्श करने हेतु हिस्सा लिया। बैठक में प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीए-जेजीयूए) की घटकवार विस्तृत समीक्षा भी शामिल थी।
प्रमुख घोषणाएं और उनका विकास संबंधी प्रभाव
- आईटीडीए गवर्नेंस तथा विकेंद्रीकृत योजनाओं का सुदृढ़ीकरण: एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों/ परियोजनाओं (आईटीडीए/ आईटीडीपी) के लिए व्यापक परिचालन दिशानिर्देशों के साथ रोडमैप राज्यों और मंत्रालयों के साथ साझा किया गया। इन दस्तावेजों में आईटीडीए/ आईटीडीपी की योजना, संचालन और निगरानी के लिए एक संरचित फ्रेमवर्क स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करना और जिला व ब्लॉक स्तर पर केंद्र व राज्य के हस्तक्षेपों के बीच अधिक समन्वय स्थापित करना है। इस फ्रेमवर्क से अधिक प्रभावी विकेंद्रीकृत योजना को सहयोग मिलने, फंड के बेहतर इस्तेमाल, कार्यान्वयन में देरी को कम करने और राज्यों में जनजातीय विकास के लिए अनुकरणीय मॉडलों को अपनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
- आदि दर्पण का विमोचन: परामर्श बैठक में आदि दर्पण का भी विमोचन किया गया। यह एक व्यापक संकलन है जो मंत्रालय की योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति के साथ-साथ देश भर के आदिवासी समुदायों की जमीनी हकीकत और विकास की स्थिति को दर्शाता है। आदिवासी विकास पर एक त्वरित संदर्भ के रूप में परिकल्पित आदि दर्पण का उद्देश्य पारदर्शिता को मजबूत करना, साक्ष्य-आधारित योजना को सरल बनाना और नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और नागरिकों को आदिवासी विकास संबंधी पहलों के कार्यान्वयन और परिणामों की बेहतर जानकारी प्रदान करना है।
- जिला कृषि डीपीआर चैलेंज: जिला कृषि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) चुनौती के विजेता जिलों की घोषणा की गई। इस चुनौती में जिलों को आदिवासी किसानों को लाभ पहुंचाने वाले कृषि और इससे जुड़ी आजीविका संबंधी हस्तक्षेपों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली, कार्यान्वयन योग्य डीपीआर तैयार करने के लिए आमंत्रित किया गया था। इस पहल का उद्देश्य नवाचार को प्रोत्साहन देना और कृषि-आजीविका नियोजन, विशेष रूप से बागवानी, जल प्रबंधन और मूल्य-श्रृंखला विकास जैसे क्षेत्रों में, की गुणवत्ता को सुदृढ़ करना है। अच्छी तरह से तैयार की गई डीपीआर को मान्यता देने का उद्देश्य अनुकरणीय मॉडलों को प्रोत्साहित करना और आदिवासी क्षेत्रों में कृषि आय में स्थायी सुधार लाने में सक्षम नियोजित, उच्च-प्रभाव वाले हस्तक्षेपों के लिए डीए-जेजीयूएए संसाधनों के इस्तेमाल को आसान बनाना है। विजेताओं में केरल, असम और महाराष्ट्र के वायनाड, दीमा हसाओ, पालघर और पलक्कड़ शामिल हैं।
- आदिवासी महिला उद्यमियों पर राष्ट्रीय सम्मेलन: आगामी रानी दुर्गावती आदिवासी महिला सम्मेलन – आदिवासी महिला उद्यमियों पर राष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में भी डीएजेजीयूए निदेशक डॉ. वर्नाली डेका ने बैठक में जानकारी दी। प्रसिद्ध आदिवासी योद्धा-रानी दुर्गावती के सम्मान में नामित इस राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य बाजार संपर्क, क्रेडिट तक पहुंच, कौशल विकास और मार्गदर्शन के माध्यम से आदिवासी महिला उद्यमियों के लिए अवसरों को सुदृढ़ करना है। यह पहल आदिवासी क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को सक्षम बनाने, आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन देने और नारी शक्ति को मजबूत करने पर मंत्रालय के निरंतर जोर को दर्शाती है।
योजना कार्यान्वयन की व्यापक समीक्षा
इस समीक्षा में पीएम-जनमन और डीए-जेजीयूए की घटकवार प्रगति का विश्लेषण किया गया, जिसमें भौतिक और वित्तीय उपलब्धियां, संबंधित मंत्रालयों के साथ समन्वय और प्रमुख कार्यान्वयन चुनौतियां शामिल हैं। डीए-जेजीयूए, पीएम-जनमन और अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत उपयोगिता प्रमाणपत्रों (यूसी) और खर्च संबंधी प्रतिबद्धताओं की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया, जिसमें वित्तीय वर्ष की शेष अवधि के दौरान फंड के इस्तेमाल में तेजी लाने पर जोर दिया गया।

टीएमएमसी पहल, सिकल सेल रोग के लिए सक्षमता केंद्र और सीएसआईआर-एनबीआरआई जैवसंसाधन पहल की प्रगति की भी समीक्षा की गई। ये पहलें जनजातीय समुदायों के लिए स्वास्थ्य संबंधी हस्तक्षेपों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विकासात्मक परिणामों के लिए पारंपरिक जानकारी और जैवसंसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए मंत्रालय के प्रयासों को रेखांकित करती हैं।

बैठक में आदि कर्मयोगी अभियान के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई, जिसमें आदि सेवा केंद्रों में पंजीकरण और आदि कर्मयोगी स्वयंसेवकों का नामांकन शामिल था। स्वयंसेवकों की क्षमता निर्माण के लिए विकसित आईगोट माइक्रोसाइट का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे प्रशिक्षित, उत्तरदायी और सेवा-उन्मुख जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को विकसित करने पर जोर दिया गया।
समीक्षा के निष्कर्ष में कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने, हितधारकों के बीच समन्वय सुधारने और मंत्रालय की प्रमुख पहलों के अंतर्गत परिणामों की प्राप्ति में तेजी लाने के लिए विशिष्ट कार्य बिंदुओं की पहचान की गई। इस प्रक्रिया ने विकसित भारत की परिकल्पना के अनुरूप प्रभावी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी जनजातीय विकास सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
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