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जल जीवन मिशन 2.0 में और गति आई:


केन्द्र ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान राज्यों को कुल 6,154.96 करोड़ रुपये की राशि जारी की

केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने संबंधित राज्यों के सांसदों के साथ राज्य-विशेष पर आधारित चर्चा हेतु बैठकें कीं

जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन की गति बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारत सरकार ने इस वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 10 राज्यों को केन्द्रीय हिस्से के तौर पर 5,289.09 करोड़ रुपये की प्रतिपूर्ति की है और ‘एसएनए स्पर्श’ के जरिए 13 राज्यों को 865.87 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च 2026 को ‘जल जीवन मिशन 2.0’ को मंजूरी दी। इसके तहत इस मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ा दी गई है और हर ग्रामीण परिवार को भरोसेमंद, पर्याप्त एवं सुरक्षित पेयजल सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है। राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों को सभी के लिए सुरक्षित पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करने में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से इस मिशन को कुल 8.69 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी गई है, जिसमें 3.59 लाख करोड़ रुपये की केन्द्रीय सहायता भी शामिल है।

इस मिशन के तहत निर्बाध प्रगति को जारी एवं सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, पुराने जेजेएम 1.0 मिशन के पूरा होने और जेजेएम 2.0 को मंजूरी मिलने के बीच की अवधि में कई राज्यों ने अपने वित्तीय संसाधनों का सदुपयोग करके मंजूर की गई ग्रामीण जल आपूर्ति योजनाओं को कार्यान्वित करना जारी रखा। इन प्रयासों को देखते हुए और कार्यान्वयन की गति को बनाए रखने हेतु, भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 10 राज्यों को केन्द्रीय हिस्से के तौर पर 5,289.09 करोड़ रुपये की राशि की प्रतिपूर्ति की है। इसका विवरण इस प्रकार है:

जारी की गई राज्य-वार केन्द्रीय फंड की प्रतिपूर्ति
क्र.सं.राज्य                                         राशि (करोड़ रुपये)
1उत्तर प्रदेश2,711.52
2ओडिशा221.44
3कर्नाटक795.74
4राजस्थान537.72
5छत्तीसगढ़149.50
6आंध्र प्रदेश23.25
7मध्य प्रदेश14.10
8तमिलनाडु96.52
9महाराष्ट्र594.44
10केरल144.66
 कुल5,289.09

ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि जेजेएम 2.0 बुनियादी ढांचे के निर्माण से हटकर, जलापूर्ति प्रणाली के संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) को ग्राम पंचायत के नेतृत्व में मजबूत करके, स्रोत की स्थिरता, पानी की गुणवत्ता की निगरानी, ​​सामुदायिक स्वामित्व और डिजिटल गवर्नेंस के जरिए सेवाओं की भरोसेमंद आपूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। जेजेएम 2.0 के तहत शुरू किया गया एक बड़ा सुधार ‘एसएनए स्पर्श’ प्लेटफॉर्म के जरिए योजना-आधारित भुगतान और फंड जारी करना है, जो योजना के स्तर पर फंड जारी करने, व्यय पर नजर रखने और वित्तीय प्रगति की वास्तविक निगरानी करने की सुविधा देता है। ‘एसएनए स्पर्श’ अलग-अलग जलापूर्ति योजनाओं से संबंधित भुगतान की सुविधा देता है, जिससे जवाबदेही, पारदर्शिता, अंकेक्षण की सुविधा और सार्वजनिक कोष के उपयोग से जुड़ी दक्षता बेहतर होती है।

इसके अलावा, इस वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक 13 राज्यों में ‘एसएनए स्पर्श’ के जरिए कुल 865.87 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। इसका विवरण इस प्रकार है:

जेजेएम 2.0 के तहत एसएनए स्पर्श के जरिए जारी राज्य-वार केन्द्रीय फंड
क्र.सं.राज्य                                                                              राशि (करोड़ रुपये)
1असम669.92
2त्रिपुरा5.98
3हिमाचल प्रदेश2.02
4पश्चिम बंगाल30.45
5उत्तर प्रदेश90.98
6ओडिशा0.51
7कर्नाटक47.30
8राजस्थान3.88
9छत्तीसगढ़3.88
10आंध्र प्रदेश10.58
11पंजाब0.01
12झारखंड0.35
13तमिलनाडु0.01
 कुल865.87

भारत सरकार ‘जल जीवन मिशन (जेजेएम2.0 के कार्यान्वयन में तेजी ला रही है। इसमें देश भर के ग्रामीण परिवारों के लिए भरोसेमंद सेवा आपूर्ति, डिजिटल गवर्नेंस, सामुदायिक स्वामित्व और दीर्घकालिक जल सुरक्षा पर नए सिरे से ध्यान दिया जा रहा है। जेजेएम 2.0 के तहत, कई  परिवर्तनकारी सुधार किए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • जल अर्पण: पूरी हो चुकी योजनाओं को ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) को औपचारिक रूप से सौंपना;
  • पेयजल से जुड़ी परिसंपत्तियों के लिए विशिष्ट ‘सुजलम भारत आईडी’ बनाना;
  • पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म पर ग्रामीण जलापूर्ति से संबंधित बुनियादी ढांचे की जियो-टैगिंग और डिजिटल मैपिंग;
  • ‘जल सेवा आकलन’ के जरिए समुदाय के नेतृत्व में मूल्यांकन;
  • दीर्घकालिक व्यवस्था और सेवा प्रदान करने पर अधिक जोर।

केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल, विभिन्न राज्यों के माननीय सांसदों (लोकसभा और राज्यसभा) के साथ बातचीत हेतु बैठकें कर रहे हैं। यह पहल मंत्रालय की उन निरंतर कोशिशों का हिस्सा है जिनका उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन को बेहतर बनाना और निर्वाचन क्षेत्र-विशेष से जुड़ी समस्याओं को हल करने में मदद करना है। अब तक, केन्द्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़, गुजरात, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सांसदों के साथ बातचीत हेतु क्रमशः 27 जुलाई, 29 जुलाई, 30 जुलाई और 5 अगस्त 2026 को बैठकें की हैं। इसके बाद, हरियाणा (6 अगस्त 2026), उत्तर प्रदेश (10 अगस्त 2026), मध्य प्रदेश (11 अगस्त 2026) और महाराष्ट्र (12 अगस्त 2026) के सांसदों के साथ बातचीत का अगला दौर निर्धारित किया गया है।

इन बातचीत का उद्देश्य ‘’जल जीवन मिशन 2.0’ की प्रगति की समीक्षा करना, ग्रामीण इलाकों में पेयजल की आपूर्ति से जुड़ी खास समस्याओं पर चर्चा करना और मिशन की प्लानिंग, कार्यान्वयन, निगरानी एवं दीर्घकालिक क्षमता को और बेहतर बनाने हेतु माननीय सांसदों से मूल्यवान  सुझाव प्राप्त करना है।

भारत सरकार राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। जेजेएम 2.0 का उद्देश्य सिर्फ नल से पानी का कनेक्शन प्रदान करना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि हर ग्रामीण परिवार को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित, पर्याप्त और भरोसेमंद पेयजल मिलता रहे।

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