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गृहिणी से ड्राइविंग स्कूल उद्यमी तक: कैसे एनबीसीएफडीसी के सहयोग ने वायनाड (केरल) की रहने वाली ओबीसी एझावा समुदाय की महिला मिनी देवी को सशक्त बनाया

सुलभ वित्त तक पहुँच महिलाओं को व्यावहारिक विचारों को टिकाऊ उद्यमों में बदलने में सक्षम बना सकती है। समय पर मिलने वाला ऋण सहयोग महत्वाकांक्षी उद्यमियों को पूंजी की बाधाओं को पार करने, आजीविका का निर्माण करने और ऐसी सेवाएं तैयार करने में मदद करता है जो उनके समुदायों को लाभान्वित करती हैं।

केरल के वायनाड जिले की रहने वाली मिनी देवी नेराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) द्वारा केरल राज्य पिछड़ा वर्ग विकास निगम (केएसबीसीडीसी) के माध्यम से प्रदान की गई स्वरोजगार सहायता के जरिए, इस बदलाव को अनुभव किया है।

ओबीसी एझावा समुदाय से ताल्लुक रखने वाली मिनी देवी एक गृहिणी थीं जो पूरी तरह से घरेलू आय पर निर्भर थीं। वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहती थीं और अपना खुद का उद्यम स्थापित करना चाहती थीं, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण वह पहला कदम भी नहीं उठा पा रही थीं।

मिनी देवी एक ऐसा ड्राइविंग स्कूल शुरू करना चाहती थीं जो एक आरामदायक और मददगार सीखने का माहौल प्रदान करे, खासकर महिलाओं के लिए। वह महिलाओं को ड्राइविंग कौशल हासिल करने, उनकी मोबिलिटी में सुधार करने और उन्हें अधिक आत्मविश्वासी व आत्मनिर्भर बनने में भी मदद करना चाहती थीं।

इसमें मुख्य बाधा आर्थिक थी। एक ड्राइविंग स्कूल स्थापित करने के लिए एक प्रशिक्षण वाहन खरीदने और उपयुक्त कार्यालय एवं कक्षा की सुविधाएँ तैयार करने हेतु पूंजी की आवश्यकता थी। पर्याप्त बचत या स्वतंत्र आय के बिना, मिनी देवी आवश्यक निवेश करने में असमर्थ थीं।

ऋण की मदद से, मिनी देवी ने एक ट्रेनिंग वाहन खरीदा और अपने उद्यम, ‘मलनाड ड्राइविंग स्कूल’ के लिए एक कार्यालय स्थापित किया। इस सहयोग ने उन्हें परिचालन शुरू करने और अपने क्षेत्र के शिक्षार्थियों को सेवा प्रदान करने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार करने में सक्षम बनाया।

मिनी देवी का महिलाओं के अनुकूल दृष्टिकोण शिक्षार्थियों को एक ऐसा सहायक वातावरण प्रदान करता है जहाँ वे आत्मविश्वास और सुविधा के साथ ड्राइविंग कौशल सीख सकती हैं।

आज मिनी देवी एक आत्मविश्वासी उद्यमी और एक सफल ड्राइविंग स्कूल चला रही हैं। एक गृहिणी से व्यवसाय की मालिक बनने के उनके इस सफर ने उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता, अधिक आत्मविश्वास और परिवार तथा समाज में एक मजबूत स्थान दिलाया है।

मिनि देवी की यात्रा यह दर्शाती है कि कैसे सस्ता ऋण और संस्थागत सहायता महिलाओं को आर्थिक बाधाओं को पार करने और व्यवहार्य उद्यम स्थापित करने में मदद कर सकती है। उनकी सफलता व्यक्तिगत आय से आगे बढ़कर अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने, कौशल और स्वतंत्रता प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।

इस मदद और समर्थन के प्रभाव के बारे में बात करते हुए, मिनी देवी ने कहा, मुझे 2025 में केएसबीसीडीसी के माध्यम से एनबीसीएफडीसी से 3 लाख रुपये का व्यक्तिगत स्वरोजगार ऋण मिलाजो मेरी उद्यमशीलता की दृष्टि को वास्तविकता में बदलने में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। अब मैं महिला शिक्षार्थियों को प्रशिक्षित करने पर विशेष ध्यान देने के साथ सफलतापूर्वक ड्राइविंग स्कूल का संचालन करती हूँ। ऋण मिलने के बादमेरी आय बढ़कर लगभग 40,000 रुपये प्रति माह हो गईजिससे मेरी वित्तीय स्थिति मजबूत हुई और पारिवारिक आय पर निर्भरता कम हुई।

एनबीसीएफडीसी और केएसबीसीडीसी से समय पर मिली सहायता और अपने दृढ़ संकल्प के बल पर, मिनी देवी ने अपनी महत्वाकांक्षा को एक टिकाऊ आजीविका में बदल दिया। मलनाड ड्राइविंग स्कूल महिला-नेतृत्व वाले उद्यमशीलता और लक्षित स्वरोजगार सहायता के व्यापक सामाजिक प्रभाव का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

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