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भारत 75 अरब डॉलर के विदेशी माल ढुलाई खर्च को कम करने के लिए पांच वर्षों में 100 नए जहाज अपने बेड़े में शामिल करेगा

नेशनल शिपिंग बोर्ड की पहल पर आयोजित ‘सागर संवाद’ में सर्बानंद सोनोवाल ने किया खुलासा

सर्बानंद सोनोवाल ने लॉन्च की नेशनल शिपिंग बोर्ड की वेबसाइट, सागर संवाद में वार्षिक रिपोर्टों को भी प्रस्तुत किया गया

मनसुख मांडविया, शांतनु ठाकुर ने भी दिल्ली में नेशनल शिपिंग बोर्ड द्वारा पहली बार आयोजित ‘सागर संवाद’ में हिस्सा लिया

भारत के जहाज विदेशी जहाजों के मुकाबले 16-20% अधिक मंहगे साबित होते हैं, एनएसबी पैनल ने ‘सागर संवाद’ में पांच सूत्री समाधान का प्रस्ताव रखा

नेशनल शिपिंग बोर्ड (एनएसबी) ने आज यहां अपना पहला ‘सागर संवाद’ आयोजित किया। इस एक दिवसीय संवाद के दौरान, केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने अपने संबोधन में, अगले पांच वर्षों के दौरान, विदेशी जहाजी बेड़ों पर भारत की निर्भरता कम करने के लिए 100 जहाजों को शामिल करने समेत पांच सूत्री कार्यक्रमों पर चर्चा की।
“चार्टिंग द रोडमैप टूवर्ड्स मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 एंड मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047” विषय पर आधारित इस इवेंट का आयोजन राजधानी स्थित सिविल सर्विसेज़ ऑफिसर्स इंस्टीट्यूट में किया गया जिसमें वरिष्ठ अधिकारीगण समेत जहाज मालिकों, वित्त पोषकों और देश के मैरीटाइम ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स के युवा कैडेटों ने हिस्सा लिया। सागर संवाद के इस उद्घाटन सत्र में एनएसबी के थीम वाक्य – “विज़्डम इन द ओशन, प्रोग्रेस इन द नेशन” को समेटा गया है।

सागर संवाद के इस सत्र की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल ने की और इस दौरान उन्होंने बोर्ड की पहली आधिकारिक वेबसाइट भी लॉन्च की। एनएसबी के चेयरपर्सन समीर कुमार खरे ने सत्र के दौरान, बोर्ड की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट, उपसमिति रिपोर्टों को भी जारी किया जिसमें सरकार के लिए नीतिगत परामर्श समेत मई 2025 में बोर्ड के पुनर्गठन के बाद से अब तक इसके कार्यों का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया गया था।

इस मौके पर, श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा नेशनल शिपिंग बोर्ड के नए नियमों और नए सिरे से गठित मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 और नेशनल शिपिंग बोर्ड के नए नियमों के अंतर्गत, बोर्ड के अधिकारों को और मजबूत बनाया गया है। यही वजह है कि ‘सागर संवाद’ जैसा प्लेटफार्म महत्वपूर्ण है – जो नीति–निर्माताओं, उद्योग के दिग्गजों, टैक्नोक्रेट्स तथा समाज को एक छत के नीचे लाकर, भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप सर्वसम्मति जुटाने का प्रयास करता है। यही सर्वसम्मति हमें 2047 तक आत्मनिर्भर शिपिंग भारत 2047 की ओर आगे ले जाएगी।”

सागर संवाद के अवसर पर विजय कुमार, सचिव, बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय भी उपस्थित थे। सोनोवाल ने मैरीटाइम ट्रनिंग इंस्टीट्यूट्स के युवा प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ विशेष तौर पर बातचीत की, उनके सवालों को सुना और साथ ही, ₹10,000 करोड़ मूल्य की कंटेनर मैन्यूफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ग्लोबल शिपिंग दिग्गज मेर्स्क भी अब भारत में निर्मित कंटेनर्स की खरीद के आदेश दे रहा है।

श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “मैं नेशनल शिपिंग बोर्ड के पांच सूत्री कार्यक्रम का स्वागत करता हूं जिसमें वित्तीय सुधारों से लेकर कार्गो सपोर्ट, प्रतिस्पर्धी वित्त पोषण, विनयमनों के स्तर पर सुगमता और कारोबार करने में आसानी पर जोर दिया गया है। एक साथ देखें तो ये पांच अलग–अलग कार्य नहीं हैं, वास्तव में, ये उस राष्ट्र के निर्माण का वास्तुशिल्प है, जो अपना खुद का कारोबार चाहता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में हम अपनी बंदरगाह क्षमता को 2047 तक बढ़ाकर 10,000 मिलियन टन प्रति वर्ष करने जा रहे हैं। एनएसबी का काम यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय जहाज मालिक इस विकास से लाभान्वित हों – न कि किसी दूसरे के जहाजों को तैरते हुए देखने के साक्षी बने रहें।”

सागर संवाद के एक अन्य सत्र “मैरीटाइम लेबर फोर्स – अपॉरच्युनिटीज़ एंड चैलेन्जेस” की अध्यक्ष केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामलों एवं खेलकूद मंत्री मनसुख मांडविया ने की। इस सत्र में भारत के समुद्री कार्यबल, जो कि दुनिया में सबसे बड़े कार्यबल में से एक है, की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की गई। साथ ही, समुद्री कर्मियों के वेतन से जुड़े कराधान, पेंशन, और कल्याण के प्रावधानों पर भी बातचीत की गई।

इस मौके पर, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा, “भारत के मैरीटाइम सेक्टर के पास हमारे युवा कार्यबल के लिए रोज़गार का प्रमुख इंजन बनने की क्षमता है और साथ ही, यह भारत को कुशल समुद्री कर्मियों के अग्रणी सप्लायर के तौर पर भी साख दिलाने की योग्यता रखता है। हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में, हमने अपनी क्वालिटी ट्रेनिंग क्षमताओं में विस्तार के साथ ही, उद्योग में दक्षता को बढ़ावा देकर रोजगार के अवसरों में विस्तार, लैंगिक विभेद दूर करने और अपने वर्कफोर्स को क्रूज़ शिपिंग एवं एडवांस शिपबिल्डिंग के मद्देनज़र तैयार करने की दिशा में कदम उठाए हैं। कुशल और भविष्य के लिए तैयार मैरीटाइम वर्कफोर्स हमारी मैरीटाइम विज़न 2030 को साकार करने और मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 के अंतर्गत भारत की जहाज निर्माण की क्षमताओं को बढ़ाने में मददगार साबित होंगी।”

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि कुशल मैरीटाइम पेशेवरों की दुनियाभर में बढ़ती मांग के मद्देनज़र, भारत को अपनी बढ़ती युवा आबादी के लिए रोजगार के बेहतर अवसरों को तैयार करने पर जोर देना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सरकार, मैरीटाइम इंडस्ट्री, व्यापारी निकायों से आपस में तालमेल बढ़ाने तथा प्रशिक्षण संस्थानों से अपनी प्रशिक्षण क्षमता में विस्तार करने के साथ-साथ, भारतीय नाविकों के लिए मार्केट आउटरीच को मजबूत बनाने और भविष्य के लिए तैयार कौशलों का निर्माण करने पर भी जोर दिया। उन्होंने मैरीटाइम रोजगार के क्षेत्र में लैंगिक विभेद की समस्या पर खासतौर से ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया, और क्रूज़ शिपिंग जैसे उभरते वर्गों के लिए स्पेश्यलाइज्ड प्रतिभाएं तैयार करने का आह्वान किया जो कि दुनिया के दिग्गज जहाज निर्माता राष्ट्र के तौर पर भारत की महत्वाकांक्षा के साथ कदमताल कर सके।

बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग राज्य मंत्री श्री शांतनु ठाकुर ने “ऑग्मेंटेशन ऑफ इंडियन टनेज, अपॉरच्युनिअीज़ एंड चैलेन्जेस” शीर्षक से आयोजित पैनल चर्चा की अध्यक्षता की।

शांतनु ठाकुर ने कहा, “भारत हर साल लगभग 75 अरब डॉलर की विदेशी जहाजी कंपनियों को हमारे कच्चे तेल, गैस, कोयला और यूरिया जैसे महत्वपू्र्ण कार्गो की ढुलाई के लिए देता है। यह हमारे भारतीय जहाजमालिकों के लिए कार्य प्रदर्शन से जुड़ी समस्या नहीं है – बल्कि प्रतिस्पर्धा और मांग–भागीदारी की समस्या है। भारत 2047 तक विकसित देश बनने के लिए दूसरे देशों की सदाशयता पर निर्भर नहीं रह सकता, बल्कि उसे अपने व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा स्वयं करनी होगी। हमें अपने जलमार्गों को सुदृढ़ बनाना होगा।”

इस सत्र को कैप्टन एम पी भसीन तथा सी वी सुब्बाराव ने भी संबोधित किया। अंत में, अतुल जाधव, वाइस प्रेसीडेंट, इंडियन मैरीटाइन फाउंडेशन; अनिल देवली, चीफ एग्जीक्युटिव ऑफिसर, इंडियन शिपओनर्स एसोसिएशन एवं एनएसबी सदस्य; कैप्टन एस आईएएके आजाद, नॉटिकल एडवाइज़र – डीजीएमए; आशुतोष शर्मा, चीफ जनरल मैनेजर, इंटरनेशल फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेंटर अथॉरिटी, गांधीनगर; राहुल मोदी, प्रेसीडेंट, कंटेनर शिपिंग लाइंस एसोसिएशन एवं एनएसबी सदस्य; और कैप्टन पंकज कुमार, प्रबंध निदेशक, डायमंड ब्लू शिपिंग सॉल्यूशंस ने भी संबोधित किया।

इस मंच पर प्रतिभागिता कर रहे पैनलिस्टों ने कहा कि विदेशी जहाजों की तुलना में भारतीय जहाजों का खर्च 16% to 20% अधिक आता है, जो कि जहाज आयात एवं रखरखाव सेवाओं पर भारतीय कराधान, समुद्री नाविकों के वेतन पर कर कटौती, माल ढुलाई पर कर तथा अधिक घरेलू पूंजी लागत के चलते होता है, जबकि विदेशी प्रतिस्पर्धी कंपनियां इनसे मुक्त होती हैं। लेकिन इसके बावजूद, ‘राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूज़ल तंत्र’ के तहत्, भारतीय मालिकों से अभी भी कार्गो हासिल करने के लिए, विदेशी ढुलाई दरों के बराबर दरों की पेशकश करने की उम्मीद की जाती है।

इस पैनल ने पांच-सूत्री कार्यक्रम की पेशकश की जिसमें वित्तीय सुधार, कार्गो सपोर्ट, प्रतिस्पर्धी वित्त पोषण, विनियामक सुगमता और कारोबार करने में सुविधा (ईओडीबी) को शामिल किया गया है। पैनल का कहना है कि यदि इन उपायों को अपनाया जाए, तो भारत अगले पांच वर्षों के भीतर 100 नए जहाज अपने बेड़े में शामिल कर सकता है – यह मैरीटाइम अमृत काल विज़न, या विश्व के पांच दिग्गज जहाजी राष्ट्रों की रैंकिंग के समकक्ष पहुंचने के एमएकेवी, 2047 लक्ष्य के अनुरूप है।

अपने स्वागत भाषण में, एनएसबी के चेयरपर्सन समीर कुमार खरे ने कहा, “इस पूरे प्रयास के पीछे हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा है जिन्होंने अमृत काल विज़न 2047 के तहत्, ब्लू इकनॉकी को विकसित भारत के केंद्र में रखा है। श्री सर्बानंद सोनोवाल जी के नेतृत्व में, इस विज़न को प्रभावी इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाहों के आधुनिकीकरण और ग्रीन शिपिंग सुधारों के रूप में कार्यान्वित किया जा रहा है।”

नेशनल शिपिंग बोर्ड (एनएसबी), मर्चेंट शिपिंग एक्ट, 2025 के अंतर्गत वैधानिक परामर्श निकाय है जो सरकार को जहाजरानी नीतियों, टनेज, समुद्री नाविकों के लिए कल्याण नीतियों तथा बंदरगाह-संबंधी समुद्री विकास के संबंध में सलाह-मश्विरा देता है।

एनएसबी के उद्घाटन सत्र में ‘सागर संवाद’ प्रोग्राम ने तीन अलग-अलग सत्रों के मंच पर, समुद्री कारोबार से जुड़े हितधारकों, उद्योग के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को एकजुट किया। इस दौरान, मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030 तथा मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा केंद्रित रही। एक सत्र ‘मैरीटाइम लेबर फोर्स – अपॉरच्युनिटीज़ एंड चैलेन्जेस’ पर केंद्रित था जिसमें रोजगार सृजन, समुद्री नाविकों के कौशल, कार्यबल विकास और क्षेत्र में उभरते नए अवसरों पर विचार–विमर्श किया गया। एक अन्य सत्र ‘ऑग्मेंटेशन ऑफ इंडियन टनेज – अपॉरच्युनिटीज़ एंड चैलेन्जेस’ में भारत के जहाजरानी बेड़े में विस्तार और देश की समुद्री क्षमता की सुदृढ़ता पर चर्चा की गई। इन सत्रों ने इंडस्ट्री और हितधारकों को अधिक मजबूत, अधिक प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार भारतीय समुद्री क्षेत्र तैयार करने पर अपने–अपने परिप्रेक्ष्यों को साझा करने का अवसर प्रदान किया। 

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