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  • राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 2026

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  • कतार से क्लिक तक: भारतीय रेलवे में यात्री आरक्षण के चार दशक

    कतार से क्लिक तक, भारतीय रेलवे ने यात्री आरक्षण व्यवस्था को परिवर्तित कर दिया है। प्रौद्योगिकी दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक आरक्षण प्रणालियों में से एक को आज संचालित कर रही है। निरंतर आधुनिकीकरण ने बुकिंग को तेज और अधिक विश्वसनीय बना दिया है। आधुनिक यात्री आरक्षण प्रणाली एक स्मार्ट और अधिक सहज यात्रा अनुभव महसूस करा रही है। रेलवे आरक्षण की रीढ़ भारतीय रेलवे (आईआर) दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क से हर दिन लाखों यात्रियों को जोड़ता है। यात्रा चाहे काम के सिलसिले में हो या शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, व्यवसाय या परिवार के लिए हो, यात्रीगण अपनी यात्रा की योजना बनाने के लिए विश्वसनीय आरक्षण इकोसिस्टम पर निर्भर होते हैं। प्रत्येक आरक्षित टिकट के पीछे यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) है, जो लगभग चार दशकों से रेलवे बुकिंग की प्रौद्योगिकी-आधारित रीढ़ है। पीआरएस को 1986 में पेश किया गया था और इसने मैन्युअल आरक्षण काउंटरों की जगह लेने से लेकर ऑनलाइन और मोबाइल टिकट बुकिंग को कामयाब बनाने तक का सफर तय किया है। जैसे-जैसे उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ी और ऑनलाइन संस्कृति ने जोर पकड़ा, वैसे-वैसे तेज और अधिक विश्वसनीय और बिना बाधा वाली बुकिंग सुविधाओं की आकांक्षा भी बढ़ी। पीक बुकिंग अवधि, विशेष रूप से तत्काल आरक्षण के दौरान, मांग अचानक बढ़ जाती है, जिससे मूल रूप से एक अलग समय के लिए डिज़ाइन किए गए बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ जाता है। इन बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए, भारतीय रेलवे पीआरएस का व्यापक आधुनिकीकरण कर रहा है। नया पीआरएस बुकिंग क्षमता को बढ़ाएगा, यात्री-केंद्रित सुविधाओं को पेश करेगा और एक व्यापक ऑनलाइन बुनियादी ढांचा तैयार करेगा। यात्री आरक्षण प्रणाली के चार दशक पीआरएस एक कम्प्यूटरीकृत प्लेटफॉर्म है जो भारतीय रेलवे नेटवर्क पर आरक्षित टिकट व्यवस्था का प्रबंधन करता है। यह यात्रियों को आरक्षित टिकट बुक करने, संशोधित करने और रद्द करने की सुविधा उपलब्ध कराता है। यह सीट आवंटन, प्रतीक्षा सूची, टिकट रद्द करने के एवज में आरक्षण (आरएसी) की व्यवस्था संभालने के साथ-साथ आरक्षण चार्ट और यात्री पूछताछ का भी प्रबंधन करता है। आरक्षण केंद्रों और ऑनलाइन बुकिंग प्रणालियों को जोड़कर, पीआरएस ने रेलवे आरक्षण को अधिक कुशल, पारदर्शी और सुलभ बना दिया है। पीआरएस ने मैन्युअल आरक्षण रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग को इलेक्ट्रॉनिक सेटअप के जरिये बदल दिया। जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, पीआरएस एक राष्ट्रव्यापी आरक्षण प्लेटफार्म के रूप में विकसित हो गया। इसने यात्रियों को एक ही स्थान से देश भर की ट्रेनों के लिए टिकट बुक करने में सक्षम बनाया। पीआरएस अब काउंटरों, वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराता है। यात्रीगण ऑनलाइन आरक्षण के लिए, भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पीआरएस तक पहुंचते हैं। यह यात्रियों को एक सहज डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कहीं से भी आरक्षित टिकट बुक करने की सुविधा उपलब्ध कराता है। पीआरएस ने मैन्युअल आरक्षण रजिस्टर और काउंटर-आधारित बुकिंग को इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से बदल दिया। जैसे जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हुआ, पीआरएस कंप्यूटरीकृत उन्नत आरक्षण और टिकटिंग  के लिए  देशव्यापी नेटवर्क (सीओएनसीईआरटी) के जरिये एक राष्ट्रव्यापी आरक्षण प्लेटफार्म के रूप में विकसित हो गया। इसने यात्री को किसी भी संबद्ध आरक्षण केंद्र से देश भर की ट्रेनों के लिए टिकट बुक करने में सक्षम बना दिया, चाहे ट्रेन की शुरुआत या गंतव्य कुछ भी हो। समय के साथ, बुकिंग की सुविधा आरक्षण काउंटरों से आगे बढ़कर वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशन तक विस्तारित हो गयी। आज, यात्री भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) की वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से ऑनलाइन पीआरएस का उपयोग करते हैं, जिससे कहीं से भी आरक्षित टिकट बुकिंग संभव हो जाती है। पीआरएस के विकास में प्रमुख मील के पत्थर वर्ष मील के पत्थर 1986…

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