-
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने आयुर्वेद दिवस से पहले ‘आयुर्वार्ता’ डिजिटल संवाद श्रृंखला की शुरुआत की
पहली कड़ी में 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस की निश्चित तिथि पर…
-
लोक सभा अध्यक्ष ने पूर्व लोक सभा अध्यक्ष, श्री पी.ए. संगमा को पुष्पांजलि अर्पित की
लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला ने आज पूर्व लोक सभा अध्यक्ष, श्री पी.ए. संगमा की जयंती के अवसर पर संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। राज्य सभा के उपसभापति, श्री हरिवंश; संसद सदस्यों; पूर्व सदस्यों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी श्री संगमा को पुष्पांजलि अर्पित की। लोक सभा के महासचिव, श्री उत्पल कुमार सिंह; राज्य सभा के महासचिव, श्री पी.सी. मोदी ; तथा लोक सभा और राज्य सभा सचिवालयों के अधिकारियों ने भी श्री संगमा को श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री संगमा मेघालय के एक सुविख्यात सांसद, प्रशासक और नेता थे जिन्होंने सार्वजनिक जीवन और पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया । 1977 में संसद में प्रवेश करने के बाद उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों/विभागों में केन्द्रीय मंत्री और मेघालय के मुख्य मंत्री के रूप में कार्य किया। वर्ष 1996 में उन्हें सर्वसम्मति से 11वीं लोक सभा के अध्यक्ष पद के लिए चुना गया और वह विपक्ष के पहले ऐसे सदस्य बने जिन्होंने इस कार्यभार को संभाला। अध्यक्ष के रूप में, संसदीय नियमों के ज्ञान, सदन की गरिमा एवं सुचारू संचालन के प्रति प्रतिबद्धता, और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करने के प्रयासों के लिए उनका व्यापक रूप से सम्मान किया जाता था। उन्होंने विधानमंडलों में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने और अंतर-संसदीय संबंधों को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। श्री संगमा नौ बार लोक सभा के सदस्य रहे और पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से जनजातीय और वंचित समुदायों के उत्थान से गहराई से जुड़े रहे । श्रमिक वर्ग तथा उपेक्षित वर्गों के कल्याण में उनके योगदान के लिए उनकी व्यापक रूप से सराहना की गई। श्री संगमा का निधन 4 मार्च 2016 को नई दिल्ली में हुआ। श्री संगमा का चित्र श्री विजेंद्र शर्मा द्वारा तैयार किया गया । इसे संविधान सदन की बाहरी लॉबी में लगाया गया है और इसका अनावरण भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी ने 10 फरवरी 2014 को किया था।
-
प्रधानमंत्री ने एक सच्चे बुद्धिमान व्यक्ति के विवेक, संयम, दूरदर्शिता और गंभीरता जैसे श्रेष्ठ गुणों का उल्लेख करने वाले संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया।…
-
प्रधानमंत्री ने 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि हासिल करने पर देश को बधाई दी, बढ़ते आर्थिक आत्मविश्वास पर बल दिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वित्त वर्ष की पहली तिमाही में…
-
26th SCO Summit के दौरान प्रधानमंत्री का बयान
किर्गिज़स्तान के प्रेसिडेंट, Excellencies, नमस्कार! SCO की 25वीं वर्षगांठ के इस विशेष…
-
प्रधानमंत्री 2 सितंबर को जल सुरक्षा पर विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में भाग लेंगे
प्रधानमंत्री द्वारा टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने और सहकारी संघवाद…
-
प्रधानमंत्री ने किर्गिज गणराज्य के बिश्केक में आयोजित 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लिया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज किर्गिज गणराज्य के बिश्केक में 31…
-
उपराष्ट्रपति 2 सितंबर को छत्तीसगढ़ का दौरा करेंगे
उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन 2 सितंबर, 2026 को छत्तीसगढ़ के रायपुर का दौरा करेंगे। अपनी यात्रा…
-
एमओएसपीआई ने पंजाब के थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के साथ एक शोध अध्ययन करने हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) ने भारत में मासिक उपभोग खर्च हेतु एक पूर्वानुमानित एवं विश्लेषणात्मक फ्रेमवर्क तैयार करने पर शोध अध्ययन करने हेतु पंजाब के थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। हस्ताक्षर समारोह में एमओएसपीआई सचिव डॉ. सौरभ गर्ग उपस्थित थे। थापर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी कुलपति प्रो. पद्मकुमार नायर और एमओएसपीआई के क्षमता विकास प्रभाग के अतिरिक्त महानिदेशक श्री आर. राजेश ने भी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। एमओएसपीआई के समन्वय एवं गुणवत्ता नियंत्रण प्रभाग (सीक्यूसीडी) के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. चंद्रमणि शर्मा और एमओएसपीआई के अनुसंधान एवं विश्लेषण प्रभाग (आरएडी) के उप महानिदेशक डॉ. सौरभ चक्रबोरटी भी उपस्थित थे। इस सहयोग का उद्देश्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग खर्च (एमपीसीई) का अनुमान लगाकर, घरेलू उपभोग पैटर्न का विश्लेषण कर और गरीबी के आकलन एवं व्यापक आर्थिक नियोजन के लिए साक्ष्य जुटाकर घरेलू उपभोग खर्च (एचसीईएस) आंकड़ों का लाभ उठाना है। यह आधिकारिक सांख्यिकी में एआई के नवीन उपयोग की दिशा में एक और पहल है तथा अनुसंधान हेतु एमओएसपीआई और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बढ़ते सहयोग को उजागर करती है।