-

पीएम मोदी से मिले बिहार के सीएम सम्राट चौधरी
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र…
-

Govt allows additional 25 LMT wheat exports to support farmers and stabilise markets
The Government of India has approved the export of an additional 25…
-

प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी : पीएमप्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में…
-

यह हमारी नारी शक्ति को सशक्त बनाने का एक ऐतिहासिक अवसर है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज लोकसभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया कि महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा सुबह जल्दी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि कई सहयोगियों ने तथ्यों और तर्क पर भरोसा करते हुए महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के जीवन में महत्वपूर्ण क्षणों के आने का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की सामाजिक मानसिकता और नेतृत्व क्षमता ऐसे क्षणों को भुनाकर एक मजबूत राष्ट्रीय विरासत का निर्माण करती है। श्री मोदी ने पुष्टि करते हुए कहा कि वर्तमान समय भारत के संसदीय लोकतंत्र में एक समान ऐतिहासिक क्षण का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि इस विचार को आज परिपक्वता तक पहुंचने के लिए 25 से 30 वर्ष पहले पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए था। भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए, उन्होंने कहा कि सदन के सभी सदस्यों को एक हजार वर्ष पुरानी विरासत में एक नया, सुधारवादी आयाम जोड़ने का शुभ अवसर मिला है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सब भाग्यवान हैं कि राष्ट्र निर्माण में देश की आधी आबादी को हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। उन्होंने संसद के सभी सदस्यों से इस महत्वपूर्ण अवसर को हाथ से न जाने देने का आग्रह किया। वर्तमान परिवर्तनकारी प्रयासों पर विशेष ध्यान देते हुए, उन्होंने कहा कि सभी भारतीय मिलकर शासन प्रणाली में गहरी संवेदनशीलता लाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि देश के भविष्य का निर्धारण हो सके। श्री मोदी ने कहा, “मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की दशा और दिशा तय करने वाला है।” प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में भारत के नए आत्मविश्वास को स्वीकार करते हुए कहा कि पूरा देश वर्तमान में व्यापक वैश्विक स्वीकृति का अनुभव कर रहा है, जो एक विकसित भारत के संकल्प से जुड़ा एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक विकसित भारत की उनकी परिकल्पना उत्कृष्ट अवसंरचना से कहीं अधिक है और इसके लिए नीति निर्माण में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र का सार्थक एकीकरण आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने। श्री मोदी ने बताया कि पिछली देरी के बावजूद, उनके व्यापक निजी परामर्शों के दौरान किसी भी दल ने सैद्धांतिक रूप से विधेयक का विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा कि इतिहास सिद्ध करता है कि सामूहिक कार्रवाई अंततः व्यक्तिगत राजनीतिक दलों के बजाय राष्ट्र के लोकतंत्र के हित में होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इसका श्रेय केवल सत्ता पक्ष या स्वयं उन्हें नहीं बल्कि पूरे सदन को जाता है। श्री मोदी ने कहा, “इसलिए, मुझे लगता है कि इसे राजनीतिक रंग देने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसका समर्थन करने में ही सभी का वास्तविक लाभ है।” प्रधानमंत्री ने औपचारिक सुशासन से बाहर एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के रूप में अपने अतीत पर विचार किया। श्री मोदी ने पंचायत स्तर पर आरक्षण को जिस आसानी से और चुनिंदा तरीके से दिया जाता था, उस पर होने वाली आम चर्चाओं का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि नेता पंचायतों में कोटा आवंटित करने में सहज महसूस करते थे, क्योंकि उन्हें अपने पद या सत्ता खोने का डर नहीं था। प्रधानमंत्री ने अपने हितों को खतरे में डालने वाले कोटा को लागू करने के प्रति उच्च अधिकारियों की गहरी अनिच्छा की ओर इशारा किया। श्री मोदी ने कहा, “इस सुरक्षात्मक मानसिकता ने संसद को प्रभावित किए बिना स्थानीय आरक्षण को सफलतापूर्वक 50 प्रतिशत तक पहुंचने दिया।” प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक बदलावों को कम आंकने के प्रति आगाह करते हुए कहा कि 25 या 30 वर्ष पहले के विपरीत, वर्तमान में महिलाओं के अधिकारों का विरोध राजनीतिक सतह के नीचे गहराई तक गूंज रहा है। उन्होंने बताया कि एक गहन राजनीतिक चेतना विकसित हुई है और पंचायत चुनाव जीतने वाली लाखों महिलाएं मूक दर्शक से बदलकर जमीनी स्तर पर मुखर राय बनाने वाली बन गई हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि इन अनुभवी महिलाओं ने जनता की शिकायतों को गहराई से समझकर दूर किया है और अब वे अत्यधिक आंदोलन कर रही हैं तथा विधानसभाओं और संसद की प्राथमिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल होने की मांग कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने सभी महत्वाकांक्षी राजनेताओं को इस बदलाव को पहचानने की सलाह देते हुए जोर दिया कि ये लाखों महिला नेता अब सभी निर्वाचन क्षेत्रों में भविष्य के चुनावी परिणामों को बहुत प्रभावित करेंगी। श्री मोदी ने सदन से देश की महिलाओं की समझ पर पूरा भरोसा रखने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि एक बार 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल हो जाने पर, महिला विधायक पितृसत्तात्मक निगरानी के बिना विभिन्न वर्गों और समूहों के लिए आगे के उप-आवंटन तय करने में पूरी तरह सक्षम होंगी। अपनी पृष्ठभूमि को अत्यंत पिछड़े समुदाय से जुड़ा मानते हुए, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना उनका सर्वोपरि संवैधानिक कर्त्तव्य है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान उनके लिए सर्वोपरि है। मोदी ने इसे वह शक्ति बताया जिसने एक हाशिए पर रहने वाले व्यक्ति को इतनी बड़ी राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी संभालने का अवसर दिया। श्री मोदी ने कहा,…
-

भारत, हजारों वर्षों से चलती आ रही एक जीवंत सभ्यता है: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कर्नाटक के मांड्या जिले के श्री क्षेत्र…
-

सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री
सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने। उन्होंने वह भारतीय जनता पार्टी…
-

राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नीतीश कुमार को शपथ दिलाई
राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आज संसद भवन में बिहार से नव…
-

Indian Railways transforming connectivity across the Nation : Vaishnaw
Indian Railways has recorded a year of strong and well-rounded progress in…
-

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सीसीएस की बैठक, पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से नागरिकों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने का निर्देश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के संदर्भ में…