चार संस्थानों के साथ किए समझौता ज्ञापनों से अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं के लिए उद्योग-उन्मुखी प्रशिक्षण और पारंपरिक कौशल विकास के अवसरों का विस्तार
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 4 नवंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र के समरसता सभागार में “समावेश से विकास – क्रियान्वयन समीक्षा एवं हितधारक संवाद” कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में 80 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसमें अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री श्यामा प्रसाद रॉय और निदेशक सुश्री नेहा गिरी उपस्थित रहे। परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों (PIAs) के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने प्रधानमंत्री विरासत का समवर्धन (PM VIKAS) की प्रगति की समीक्षा, इनके क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों पर चर्चा तथा योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्लेसमेंट और समग्र परिणामों को मजबूत करने के उपायों की पहचान पर चर्चा केंद्रित की गई।

सभा को संबोधित करते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री श्यामा प्रसाद रॉय ने इस बात पर बल दिया कि कौशल विकास को सार्थक रोजगार के अवसरों और लाभार्थियों के लिए इसे बेहतर भविष्य में बदलना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा, “इसकी थीम ‘समावेश से विकास’ है, और यह केवल एक नारा नहीं है। बल्कि यह हमारी अपेक्षा है कि हर लाभार्थी, चाहे वह लड़की हो, स्कूल छोड़ने वाला विद्यार्थी हो या कोई प्रशिक्षु हो, कौशल प्रशिक्षण पूरा करके प्रमाणपत्र अपने हाथ में ले, नौकरी प्राप्त करे और एक उज्जवल भविष्य की ओर बढ़े, बस यही योजना है।”
कार्यक्रम में PM VIKAS के अंतर्गत पिथमपुर ऑटो क्लस्टर (PAC), मैरीटाइम एवं शिपबिल्डिंग के उत्कृष्टता केंद्र (CEMS) तथा उद्यमिता विकास संस्थान (IED) के साथ समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर भी किए गए। ये साझेदारियां विभिन्न प्रान्तों और क्षेत्रो में अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं के लिए कौशल विकास तथा उद्योग-केंद्रित प्रशिक्षण की पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से की गई हैं।

PAC के साथ साझेदारी से मध्य प्रदेश में वहां के 2,400 उम्मीदवारों को उभरती उद्योग आवश्यकताओं के अनुरूप नौकरियों की जरूरत के हिसाब से कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें इलेक्ट्रिक वाहन सेवा तकनीशियन, सीएनसी मिलिंग प्रोग्रामर, वेयरहाउस एसोसिएट और सप्लाई चेन एग्जीक्यूटिव (सस्टेनेबिलिटी) शामिल हैं।
CEMS के साथ समझौता ज्ञापन से कर्नाटक, पुडुचेरी, महाराष्ट्र, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और गुजरात में 6,300 उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में बिजनेस एनालिस्ट, वेयरहाउस सुपरवाइजर, एआई टेक्नोक्रेट और गेस्ट सर्विस एग्जीक्यूटिव (फ्रंट ऑफिस) जैसी कई नौकरी की भूमिकाएं शामिल होंगी।

IED के साथ साझेदारी के तहत उत्तर प्रदेश में 900 उम्मीदवारों को सोलर पीवी इंस्टॉलर (सूर्यमित्र) की भूमिका में कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य उद्योग-प्रासंगिक कौशल से युवाओं को लैस करना और उन्हें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में उभरते रोजगार के अवसरों के लायक तैयार करना है। इससे भारत के बढ़ते हरित ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए कुशल कार्यबल के निर्माण में योगदान मिलेगा।
PM VIKAS के अंतर्गत एक अन्य गतिविधि के रूप में, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 3 नवंबर 2026 को केंद्रीय विश्वविद्यालय कश्मीर के साथ इस योजना के पारंपरिक कौशल घटक के क्रियान्वयन हेतु प्रशिक्षण के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस पहल के तहत जम्मू और कश्मीर के गांदरबल जिले में 120 उम्मीदवारों को 390 घंटे के प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें विलो क्राफ्ट कारीगर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पारंपरिक शिल्प कौशल को संरक्षित रखना और प्रतिभागियों को ऐसे कौशल विकसित करने में सहायता करना है जो टिकाऊ आजीविका के लिए उन्हें अवसर प्रदान कर सकें।

कार्यक्रम के दौरान अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की निदेशक सुश्री नेहा गिरी ने PM VIKAS की प्रगति पर अपनी प्रस्तुति दी और इसकी क्रियान्वयन स्थिति, ध्यान देने योग्य प्रमुख क्षेत्रों तथा आगे की प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने PIAs से रोजगार परिणामों पर अधिक ध्यान देने और नियोक्ताओं के साथ निकट संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, “हम अपेक्षा करते हैं कि हमारी सभी PIAs प्लेसमेंट परिणामों, नियोक्ता संपर्क और सत्यापित प्लेसमेंट डेटा की समय पर रिपोर्टिंग को प्राथमिकता प्रदान करें।”

कार्यक्रम का एक प्रमुख सत्र PIA-वार क्रियान्वयन की समीक्षा करना था, जिसमें PM VIKAS के अंतर्गत प्रगति की समीक्षा क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा सामना की जा रही समस्याओं और चुनौतियों के उल्लेख के साथ की गई। इस समीक्षा ने क्रियान्वयन संबंधी चिंताओं पर विस्तृत चर्चा, ध्यान देने योग्य क्षेत्रों की पहचान तथा समन्वय, प्रशिक्षण वितरण, प्लेसमेंट परिणामों और निगरानी तंत्र को मजबूत करने के व्यावहारिक उपायों की खोज के लिए मंच प्रदान किया।
चर्चा में जवाबदेही सुधारने और यह सुनिश्चित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया कि ये सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम लाभार्थियों के लिए सार्थक रोजगार के अवसर पैदा करें।
कार्यक्रम में गुणवत्ता आश्वासन को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। इसमें भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) और भारतीय प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु द्वारा स्वतंत्र निगरानी शामिल की गई थी। एकस्टेप फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत तकनीक-आधारित समाधानों पर भी चर्चा हुई, जिनमें प्लेसमेंट परिणामों में सुधार के लिए ब्लूडॉट और उम्मीदवार प्रतिक्रिया एकत्र करने के लिए वॉयस एआई शामिल की गई थी।
चर्चा में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) की कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र की भूमिका को भी शामिल किया गया, जिसमें उद्योग संबंधों और रोजगार के अवसरों को मजबूत करने पर बल दिया गया।
ITIHAS (आईटीहास) – इंडियन ट्रेडिशंस एंड हेरिटेज सोसाइटी ने “विरासत और पर्यटन में युवाओं के लिए अपस्किलिंग” विषय पर प्रस्तुति दी, जिसमें विरासत और पर्यटन क्षेत्रों में युवाओं के कौशल विकास के अवसरों पर प्रकाश डाला गया। प्रस्तुति का उद्देश्य कौशल विकास को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और पर्यटन संबंधी गतिविधियों के माध्यम से आजीविका के अवसर सृजित करना था।
कार्यक्रम का समापन मंत्रालय के अधिकारियों, हितधारकों और PIAs के बीच एक संवाद के साथ हुआ। इसमें क्षेत्र-स्तरीय अनुभव साझा करने, क्रियान्वयन संबंधी चिंताओं और चुनौतियों पर चर्चा करने तथा PM VIKAS की डिलीवरी और प्रभावशीलता को मजबूत करने हेतु सुझाव देने का अवसर मिला।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय अपने PM VIKAS कार्यक्रम के माध्यम से अल्पसंख्यक समुदायों के युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास की पहुंच बढ़ाने, उद्योग संबंधों को मजबूत करने और टिकाऊ आजीविका के अवसर सृजित करने के प्रति प्रतिबद्ध है
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