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ओडिशा में रामेश्वर से पारादीप तक तटवर्ती गलियारे के निर्माण के लिए एनएचएआई को बोलीदाताओं से जबरदस्त रूचि मिली

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को ओडिशा के रामेश्वर से पारादीप तक 160 किलोमीटर लंबे एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड तटवर्ती राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण हेतु बोलीदाताओं से जबरदस्त रूचि मिली है। एनएचएआई ने इस परियोजना के निर्माण के लिए दो पैकेजों में बोलियां आमंत्रित की थीं और दोनों पैकेजों में बोलीदाताओं की उत्साहजनक भागीदारी रही।

परियोजना के पहले भाग (पैकेज-1) के तहत 79.4 किलोमीटर लंबी, चार लेन वाली और एक्सेस-कंट्रोल्ड रामेश्वर से कोणार्क तक की सड़क के लिए 10 बोलियां प्राप्त हुईं, जबकि दूसरे भाग (पैकेज-II) के तहत 80.7 किलोमीटर लंबी, दो लेन वाली और पक्की शोल्डर वाली सड़क के लिए सात बोलियां प्राप्त हुईं। यह बोली प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा और गहरी रुचि को दर्शाती है। परियोजना का आवंटन हाइब्रिड एन्युटी मोड (एचएएम) के तहत किया जाएगा।

रामेश्वर से पारादीप तक नए तटवर्ती राजमार्ग परियोजना को जून 2026 में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा 8,300.79 करोड़ रुपये की कुल पूंजी लागत के साथ मंजूरी दी गई थी। निर्माण के दौरान, इस परियोजना से 53.6 लाख प्रत्यक्ष मानव-दिवस और 67 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार सृजित होने की संभावना है।

100 किमी/घंटे की डिजाइन गति के साथ, यह परियोजना श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी बीच और कोणार्क सूर्य मंदिर जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए सीधी और तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और रामेश्वर और पारादीप के बीच यात्रा में लगने वाले समय को लगभग 2 घंटे 30 मिनट तक कम करने में मदद करेगी।

तटीय राजमार्ग का रामेश्वर-पारादीप खंड एनएच-16 और एनएच-316 के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगा और पुरी, कोणार्क, पारादीप बंदरगाह, आगामी पुरी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कनेक्टिविटी में सुधार करेगा, अस्तरंग और सुवर्णरेखा जैसे विकासशील बंदरगाहों तक सुगम परिवहन की सुविधा प्रदान करेगा और साथ ही ओडिशा के खुर्दा, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर जिलों से कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

मौजूदा एनएच-16 स्वर्ण चतुर्भुज का हिस्सा है और खुर्दा, भुवनेश्वर और कटक जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरता है। वहीं, एनएच-316 भुवनेश्वर को पुरी से जोड़ता है और आगे सतपाड़ा और कोणार्क की ओर जाता है। पुरी-सतपाड़ा और पुरी-कोणार्क मार्गों पर लगभग 40 प्रतिशत सड़कों का निर्माण हो चुका है, जहां स्थानीय यात्रियों की भारी आवाजाही रहती है, जिससे यह मार्ग तेज गति से लंबी दूरी के वाहनों के आवागमन के लिए अनुपयुक्त हो गया है।

रामेश्वर-पारादीप कॉरिडोर से नियंत्रित पहुंच के साथ तेज कनेक्टिविटी मिलेगी, ईंधन की खपत, कार्बन उत्सर्जन और वाहन परिचालन लागत में कमी आएगी, साथ ही रसद की लागत कम होगी और पूरे क्षेत्र में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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