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केन्‍द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) और फार्मेक्सिल ने वैध औषधीय निर्यात को बढ़ावा देने तथा नियामक सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

वैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सरल बनाने और फार्मा उत्पादों की अवैध चोरी अथवा दुरूपयोग रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के केन्‍द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) और सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा स्थापित फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मेक्सिल) ने आज ग्वालियर स्थित सीबीएन मुख्यालय में एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

भारत को सक्रिय औषधीय अवयवों (एपीआई), बल्क ड्रग्स, फार्मुलेशन, बायोलॉजिक्स और चिकित्सा उपकरणों के एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में मान्यता प्राप्त है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य भारत के फार्मास्यूटिकल निर्यात को बढ़ावा देने और प्रभावी नियामक निगरानी के बीच संतुलन स्थापित करना है।

एनडीपीएस कानून, 1985 के तहत सीबीएन की भूमिका वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्यरत केन्‍द्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन), स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ कानून (एनडीपीएस), 1985 के तहत सरलीकरण, विनियमन और प्रवर्तन संबंधी प्रावधानों के प्रशासन के लिए जिम्मेदार एजेंसी है। एनडीपीएस कानून के तहत सीबीएन को अफीम पोस्त की वैध खेती की निगरानी करने, स्वापक औषधियों और मन:प्रभावी पदार्थों के आयात एवं निर्यात का अधिकार जारी करने तथा यह सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया है कि आवश्यक रासायनिक पदार्थों का गैरकानूनी तरीके से दुरुपयोग न हो।

फार्मेक्सिल के साथ यह सहयोगात्मक ढांचा भारत सरकार के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के राष्ट्रीय रोडमैप का एक रणनीतिक विस्तार है। आज निष्पादित समझौता ज्ञापन (एमओयू) इस व्यापक दृष्टिकोण को और मजबूत करता है। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वैच्छिक अनुपालन तंत्र को सीधे फार्मास्यूटिकल निर्यात इकोसिस्‍टम में जोड़ा गया है।

हस्ताक्षर समारोह और गणमान्य व्यक्ति औपचारिक हस्ताक्षर समारोह के दौरान सीबीएन की ओर से नारकोटिक्स कमिश्नर डॉ. दिनेश बिसेन और फार्मेक्सिल के महानिदेशक श्री राजा भानु ने समझौता ज्ञापन के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया।

समझौता ज्ञापन (एमओयूकी प्रमुख विशेषताएं:

• स्वैच्छिक आचार संहिता (वीसीसी): सरकार, फार्मेक्सिल के साथ निकट परामर्श से, उद्योग के लिए अनुशंसित कार्यप्रणालियों को निर्धारित करने वाली एक स्वैच्छिक आचार संहिता विकसित करेगी। यह संहिता स्वैच्छिक और गैर-बाध्यकारी रहेगी, ताकि यह सामान्य कारोबारी गतिविधियों में हस्तक्षेप न करे और लागू कानूनों के अतिरिक्त निर्यातकों पर कोई अतिरिक्त वैधानिक या वित्तीय बोझ न डाले।

• व्यापार सुगमता और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’: यह साझेदारी परिचालन संबंधी बाधाओं की पहचान करने और अनुपालन करने वाले फार्मास्यूटिकल निर्यातकों के लिए वैध निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के उपाय सुझाने पर केन्‍द्रित होगी।

• क्षमता निर्माण: दोनों पक्ष निर्यातकों के लिए संयुक्त कार्यशालाओं, सेमिनारों और जागरूकता अभियानों का आयोजन करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर इनका आयोजन सीडीएससीओ और सीमा शुल्क विभाग जैसे संबंधित सरकारी संस्थानों के समन्वय से किया जाएगा।

• सूचना साझा करना: समझौता ज्ञापन नियामक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु एक रूपरेखा स्थापित करता है, जो लागू कानूनों और गोपनीयता संबंधी दायित्वों के अधीन होगी। इसके अलावा, फार्मा उद्योग वीसीसी से संबंधित मामलों के समन्वय के लिए सदस्य कंपनियों में से ‘जानकारी रखने वाले व्यक्तियों’ को नामित करने का प्रयास करेगा।

हस्ताक्षर के बाद, गणमान्य व्यक्तियों ने आगे की कार्ययोजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया, जिसमें छह महीने की कार्ययोजना पर विशेष ध्यान दिया गया। इस योजना में पूरे भारत में पहुंच बढ़ाने, फार्मेक्सिल के सहयोग से हितधारकों को संवेदनशील बनाने तथा संस्थागत और नियामक सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों को स्थापित करने को प्राथमिकता दी जाएगी।

यह समझौता ज्ञापन भारत सरकार की फार्मास्यूटिकल क्षेत्र के अनुपालनपूर्ण और सतत विकास को सुनिश्चित करने तथा निर्यात क्षेत्र के विकास और उसे बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दोहराता है। इसके तहत निर्यात प्राधिकरणों के लिए लगने वाले समय को कम करने के साथ-साथ स्वापक औषधियों, मन:प्रभावी पदार्थों और नियंत्रित प्रीकर्सर्स के दुरुपयोग से सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

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