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रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष ने आईआरसीटीसी वॉर रूम के कामकाज की समीक्षा की; खान-पान सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने हेतु यात्रियों से मिलने वाली प्रतिक्रिया और रसोई की निगरानी करने वाली प्रणालियों को मजबूत करने के निर्देश दिए


रसोई की वास्तविक समय में निगरानी, ​​प्रभावी निरीक्षण, कमियों पर तुरंत कार्रवाई और ‘रेल मदद’ पर आने वाली शिकायतों की सूक्ष्म निगरानी पर ध्यान

रेलवे बोर्ड (रेल मंत्रालय) के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) श्री सतीश कुमार ने कल आईआरसीटीसी कार्यालय में आईआरसीटीसी वॉर रूम के कामकाज की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने यात्रियों से फीडबैक लेने, रसोई की निगरानी करने और खान-पान सेवाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली प्रणालियों को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया।

समीक्षा के दौरान, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष (सीआरबी) ने निगरानी और फीडबैक से जुड़ी गतिविधियों के लिए बनी विशेष टीम के साथ बातचीत की। उन्होंने निगरानी प्रक्रिया को अधिक  जवाबदेह, तकनीक पर आधारित और परिणामों पर केन्द्रित बनाने हेतु मौजूदा प्रणालियों को मजबूत करने पर जोर दिया।

श्री सतीश कुमार ने यात्रियों को एक ही क्लिक के जरिए सहज एवं सुविधाजनक तरीके से संबंधित प्रणाली से संपर्क करने में समर्थ बनाने हेतु ‘रेल मदद’ इंटरफेस को और अधिक स्वचालित बनाने का निर्देश दिया। ‘रेल मदद’ पर आने वाली शिकायतों की सूक्ष्म निगरानी करने पर भी जोर दिया गया। इसमें जरूरत पड़ने पर यात्रियों से सीधे बातचीत करना भी शामिल है ताकि यात्रियों की चिंताओं को बेहतर ढंग से समझा और उनका समाधान किया जा सके।

निरीक्षण करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही को मजबूत करने हेतु, सीआरबी ने निर्देश दिया कि हर एजेंसी को निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों और अपने कामकाज का ब्यौरा व्यवस्थित तरीके से पोस्ट करना चाहिए ताकि उनके काम की निरंतर निगरानी और मूल्यांकन किया जा सके।

रसोई की वास्तविक समय में निगरानी को मजबूत करना

इस समीक्षा में रेलवे की खान-पान सेवा की रसोई की कैमरा-आधारित निगरानी को बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया। अभी रसोई के कामकाज की निगरानी के लिए चार कैमरा फ़ीड उपलब्ध हैं। सीआरबी ने रसोई की गतिविधियों की बेहतर और अधिक प्रभावी निगरानी हेतु, कच्चे माल के भंडारण क्षेत्र में अतिरिक्त कैमरे और एक पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरा लगाने का निर्देश दिया।

कैमरा-आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग रसोई की स्थिति और कामकाज का आकलन करने के लिए भी किया जा रहा है। जहां खराब स्थिति देखी जाती है, वहां उचित नोटिस और सुधारात्मक कार्रवाई शुरू की जानी है। समीक्षा के दौरान, दक्षिण मध्य रेलवे के अनंतपुर में एक रसोई में निरीक्षण और वीडियो निगरानी के आधार पर सुधार की जरूरत पाई गई।

रोटी और पराठा बनाने की प्रक्रिया पर खास जोर दिया गया, क्योंकि इस क्षेत्र में बारीकी से समीक्षा की जरूरत थी। सीआरबी ने रोटी और पराठा बनाने की पूरी प्रक्रिया की अच्छी तरह से समीक्षा करने का निर्देश दिया ताकि कमियों का पता लगाया जा सके और गुणवत्ता में एकरूपता सुनिश्चित की जा सके।

ठोस तृतीय-पक्ष निरीक्षण और रोक लगाने वाली कार्रवाई

श्री सतीश कुमार ने खान-पान सेवा के मानकों को बनाए रखने में तृतीय-पक्ष निरीक्षण एजेंसियों की भूमिका की भी समीक्षा की। भले ही विभिन्न स्थानों पर तृतीय-पक्ष निरीक्षण की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन इस बात पर जोर दिया गया कि निरीक्षण प्रभावी, सार्थक और परिणामों पर केन्द्रित हों। जिन एजेंसियों का काम लगातार खराब पाया जाए, उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई हेतु समीक्षा की जानी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें सूची से हटाने जैसे कदम उठाने चाहिए ताकि निरीक्षण प्रणाली से आवश्यक गुणवत्ता संबंधी भरोसा मिलना सुनिश्चित हो सके।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर आधारित निगरानी एवं पता लगाने वाली प्रणालियों के उपयोग पर भी चर्चा हुई। सीआरबी ने निर्देश दिया कि चूहे, कॉकरोच और दूसरी कमियों से जुड़ी एआई-आधारित सतर्कता प्रणालियां सिर्फ पता लगाने तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। ऐसी घटनाओं के बाद उचित चेतावनी पत्र जारी किए जाने चाहिए और रोक लगाने वाली कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि पहचानी गई कमियों को समय रहते ठीक किया जा सके।

इस समीक्षा में रेलवे की खान-पान सेवाओं की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाने हेतु अधिक  प्रभावी निरीक्षण, तकनीक-आधारित ठोस निगरानी और तुरंत अनुवर्ती (फॉलो-अप) कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया। इन पहलों का उद्देश्य यात्रियों का भरोसा बढ़ाना, खाने की गुणवत्ता और साफ-सफाई के मानकों को बेहतर करना और पूरे भारतीय रेलवे में अधिक जवाबदेह एवं  यात्री-केन्द्रित खान-पान प्रणाली सुनिश्चित करना है।

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