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सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री

सम्राट चौधरी बने बिहार के 24वें मुख्यमंत्री


सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बने। उन्होंने वह भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने 15 अप्रैल को पटना स्थित लोकभवन में शपथ ली। राज्यपाल राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। उनके साथ जदयू कोटे से विजय चौधरी और विजेंद्र यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। सम्राट चैधरी भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री बने हैं। भाजपा के इतिहास में यह अत्यंत गौरव का क्षण था कि समाजवाद के शोधालय में कमल खिला।

बिहार एकमात्र हिंदी पट्टी का राज्य है, जहां इससे पहले भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं बन पाया था। पार्टी को गौरव के इस क्षण को उत्सव की भांति मनाना चाहिए। लेकिन पटना में ऐसा कुछ नहीं दिखा। पिछले साल नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे थे, लेकिन इस बार भाजपा की सरकार बनने के बावजूद न तो मोदी पहंुचे न ही गृहमंत्री अमित शाह। खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री के साथ दो उपमुख्यमंत्री ने शपथ ली, लेकिन मंत्री पद के लिए किसी ने शपथ नहीं ली। इससे यही जाहिर होता है कि एनडीए के घटकों में मंत्री पद को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। एनडीए में पांच प्रमुख घटक दल हैं जिनमें भाजपा के 89 सीटें तो जदयू की 85 सीटें हैं।


सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी कुशवाहा समाज के कद्दावर नेता हैं और वह लालू प्रसाद यादव एवं नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं। वह समता पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे हैं। पिता सहयोग की वजह से ही राजद सरकार में सम्राट मंत्री बन पाए थे।


वह 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में परबत्ता विधानसभा सीट से राजद के टिकट पर चुनाव जीते थे। वहीं, 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में वो जदयू के रामानंद सिंह से हार गए थे। लेकिन 2010 में फिर उसी सीट से जीते। वह 2014 में जदयू में शामिल हो गए। नीतीश कुमार ने 2014 के लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी के खराब प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए जब इस्तीफा देकर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाया तब उस सरकार में सम्राट चौधरी भी मंत्री बने थे। उन्होंन राजद के कुछ विधायकों के साथ मांझी सरकार का समर्थन कया था।

वह 2017 में भाजपा में आए और अगले ही साल यहां बिहार में पार्टी के उपाध्यक्ष बन गए। इसके बाद भाजपा में इनका कद लगातार बढ़ता गया। वह 2023 में बिहार भाजपा के अध्यक्ष बने जब उनका जबरदस्त तेवर देखने को मिला था। उन्होंने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने तक सिर पर मुरेठा (पगड़ी) बांधे रखने का संकल्प लिया था। बाद में उन्होंने नीतीश सरकार में शामिल होने पर अयोध्या में जाकर उन्होंने अपनी पगड़ी उतार ली। हालांकि, नीतीश कुमार की कुर्सी हथियाने में सम्राट चौधरी जरूर सफल हो गए हैं, लेकिन उनकी सरकार के सामने अनेक चुनौतियां होंगी। जिनमें राज्य की खराब वित व्यवस्था के साथ-साथ कानून व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार पर लगाम कसना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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