2260. श्रीमती अधिकारीमायुम शारदा देवी
डा. अशोक कुमार मित्तलः
क्या कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे किः
(क) मणिपुर सहित पूरे देश में निर्बाध कृषि परामर्श सेवाएँ प्रदान करने के लिए एग्रीस्टैंक और डिजिटल कृषि मिशन के कार्यान्वयन की वर्तमान प्रगति क्या है;
(ख) मणिपुर और पूरे देश में किसान रजिस्ट्री तथा फसल बोआई रजिस्ट्री के अंतर्गत सफलतापूर्वक पंजीकृत किए गए और विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या जारी किए गए किसानों की कुल संख्या कितनी-कितनी है;
(ग) क्या सरकार ने ऋण संवितरण में तेजी लाने, फसल बीमा तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने और मौसम संबंधी परामर्श सेवाओं में सुधार के लिए इस रजिस्ट्री को राज्य के भूमि अभिलेखों के साथ पूरी तरह से एकीकृत कर दिया है;
(घ) यदि हाँ, तो ग्रामीण किसानों के संवेदनशील कृषि और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए स्थापित साइबर सुरक्षा नयाचार का ब्यौरा क्या है; और
(ङ) सटीक फसल उपज के प्राक्कलन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग हेतु क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री (श्री रामनाथ ठाकुर)
- से (ग): एग्रीस्टैक किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) है जिसे किसानों को कुशल, आसान और त्वरित सेवा एवं योजना वितरण के लिए जनकल्याण हेतु विकसित किया गया है। यह प्रत्येक किसान का व्यापक प्रोफाइल प्रदान करता है, जिसमें किसान का विवरण, लैंड रिकॉर्ड, उगाई गई फसलें और पशुधन एवं मत्स्य पालन जैसी संपत्तियां शामिल हैं। इसमें कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन मूलभूत रजिस्टर शामिल हैं, अर्थात् किसान रजिस्टर, भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र और बोई गई फसल का रजिस्टर, जो सभी राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा बनाए और अनुरक्षित किए जाते हैं। एग्रीस्टैक के अंतर्गत निर्मित किसान रजिस्टर को कृषि सेवाओं के कुशल, पारदर्शी और त्वरित वितरण के लिए एक मूलभूत डेटाबेस के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। ऋण वितरण, फसल बीमा तक पहुंच, मौसम संबंधी सलाह, एमएसपी-आधारित फसल खरीद प्रणाली आदि को गति देने के लिए किसान रजिस्टर को विभिन्न किसान-केंद्रित योजनाओं, सेवाओं और डिजिटल प्लेटफार्मों के साथ एकीकृत किया जा रहा है।
किसानों की जानकारी को उनके डिजिटल लैंड रिकॉर्डों से सिंक्रनाइज़ करके किसान आईडी बनाई जाती है। 3 अगस्त, 2026 तक, देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। इसके अतिरिक्त, रबी 2025-26 के दौरान, देशभर के 648 जिलों में 31.3 करोड़ से अधिक भूखंडों को कवर करते हुए डिजिटल फसल सर्वेक्षण (डीसीएस) आयोजित किया गया था। मणिपुर ने डीसीएस की प्रक्रिया शुरू कर दी है और किसान आईडी बनाने की प्रक्रिया में भाग ले रहा है।
- राज्य किसान रजिस्ट्री का निर्माण संघीय प्रणाली के तहत किया गया है, जिसका अर्थ है कि डेटा का स्वामित्व संबंधित राज्यों के पास है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम 2025 के अनुरूप एग्रीस्टैक विकसित किया है, ताकि किसानों के डेटा की पूर्ण गोपनीयता सुनिश्चित की जा सके। इसके तहत किसानों का डेटा केवल उनकी सहमति से ही एकत्र किया जाता है और किसानों को विशिष्ट उद्देश्यों के लिए अधिकृत संस्थाओं के साथ डेटा साझा करने पर पूर्ण नियंत्रण प्राप्त होता है। इसके अतिरिक्त, एग्रीस्टैक की सुरक्षा विशेषताएं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) और भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरीटी-आईएन) के साइबर सुरक्षा दिशानिर्देशों का पूर्णतः अनुपालन करती हैं। एग्रीस्टैक किसानों की जानकारी को एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखता है ताकि केवल अधिकृत सिस्टम ही इसे पढ़ सकें।
- फसल बीमा योजना की येस-टेक पहल के तहत धान, गेहूं और सोयाबीन की फसलों के लिए प्रौद्योगिकी आधारित उपज आकलन लागू किया जा रहा है। इस पहल के अंतर्गत फसल उपज आकलन के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग को दृष्टिकोण के रूप में चिह्नित किया गया है।
फसल उपज के आकलन के लिए, एक डिजिटल पहल, डिजिटल जनरल क्रॉप एस्टिमेशन सिस्टम (डीजीसीईएस) विकसित की गई है, जो फसल उत्पादन अनुमानों के लिए सटीक और समय पर फसल उपज डेटा प्रदान करती है।
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