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सरकार ने कौशल विकास प्रणाली के पुनर्गठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है

नीति आयोग ने ‘रीइमेजिनिंग स्किलिंग फॉर विकसित Bharat@2047’ शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की, जो ‘विकसित भारत’ की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास के ढांचे के लिए एक रूपरेखा तैयार करता है। रिपोर्ट में 15-29 वर्ष के आयु वर्ग के एनईईटी युवाओं सहित विद्यार्थी/कार्यबल के 5 प्रमुख वर्गों की पहचान की गई है। इसे युवा लोगों के एक समूह के रूप में परिभाषित किया गया है जो निम्नलिखित श्रेणियों में आते हैंः (i) स्वैच्छिक कार्य/घरेलू उद्यम में संलग्न; (ii) घरेलू कार्यों में भाग लेना; (iii) स्वास्थ्य की स्थिति के कारण काम करने में सक्षम नहीं होना; (iv) खाली समय बिताना और (v) अन्य।

कुछ जगहों पर एनईईटी वाले 8.7 करोड़ युवाओं की संख्या को गलत तरीके से बेरोजगार मान लिया गया है। रिपोर्ट में एनईईटी श्रेणी का मतलब उन लोगों से है जो नौकरी नहीं ढूंढ रहे हैं और एनईईटी का पूरा विवरण शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण में नहीं है। इसलिए इसे बेरोजगारी के पैमाने या बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी के तौर पर नहीं देखा जा सकता। बेरोजगार लोग एक बिल्कुल अलग श्रेणी में आते हैं और उन्हें उस आबादी के आधार से अलग आबादी से लिया गया है जिसका इस्तेमाल एनईईटी के अनुमान के लिए किया गया था।

नीति आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इन आंकड़ों की गणना में उपयोग किया गया डेटाबेस एनएसएस 78वें राउंड पर आधारित है जो कोविड-19 महामारी (वित्त वर्ष 2020-21) के दौरान एकत्र किया गया था। यह शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उथल-पुथल का समय था, इसलिए रिपोर्ट में बताए गए आंकड़े सामान्य रुझान से अलग हो सकते हैं। यह इस तथ्य से स्पष्ट है कि पीएलएफएस के सबसे हालिया राउंड (पीएलएफएस 2025) में युवा एनईईटी प्रतिशत काफी कम है।

सरकार मजबूत और साक्ष्य पर आधारित नीति-निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। इसे आसान बनाने के लिए, 2017-18 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) शुरू किया गया। इससे सालाना अनुमान मिलने लगे, जबकि पहले एनएसएसओ के रोजगार-बेरोजगारी सर्वे हर पांच साल में एक बार होते थे, जिससे असल आंकड़ों में काफी देरी हो जाती थी। मूल्यांकन को और मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीकों के अनुरूप बनाने के लिए, जनवरी 2025 से पीएलएफएस में और सुधार किए गए हैं, जिसमें सर्वे की अवधि को जनवरी-दिसंबर कैलेंडर वर्ष के चक्र में बदलना भी शामिल है।

‘विकसित भारत@2047’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार युवाओं को कौशल सिखाने और उन्हें भविष्य की प्रगति के लिए तैयार करने के लिए सभी उपाय कर रही है। इसलिए रिपोर्ट के प्रकाशन से पहले ही सरकार ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के माध्यम से रिपोर्ट में सुझाए गए प्रमुख सुधारों को सक्रिय रूप से लागू करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट आने से पहले ही केंद्रीय बजट 2026-27 में 600 करोड़ रुपये की इंटीग्रेटेड स्कीम इन स्किलिंग आर्किटेक्चर (आईएसएसए) की शुरुआत सरकार के इरादे को स्पष्ट करती है। इसका उद्देश्य शिक्षा, कौशल, रोजगार और आजीवन सीखने की प्रणालियों के बीच आपसी जुड़ाव और तालमेल को मजबूत करना है।

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