LIVE

सरकार ने भारत की बढ़ती डिजिटल और एआई अवसंरचना के लिए डेटा सेंटर की क्षमता को तेजी से बढ़ाने पर दिया जोर

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, सरकार प्रौद्योगिकी के विकास और उपयोग को सबके लिए सुलभ बना रही है।

डेटा सेंटर समग्र डिजिटल इंडिया अवसंरचना तंत्र का एक महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग हैं। भारत में डेटा सेंटर उद्योग लगातार तेज़ गति से बढ़ रहा है। एआई और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग के तेज़ी से बढ़ते इस्तेमाल की वजह से देश में डेटा सेंटर की क्षमता की मांग भी बढ़ रही है।

भारत में डेटा सेंटर मुख्य रूप से प्राइवेट कंपनियों द्वारा विकसित, उनके स्वामित्व और संचालन में होते हैं। डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए जगह चुनने से पहले कंपनियां मांग का अनुमान, संचालन का खर्च, बिजली की उपलब्धता, कुशल कर्मचारी और लंबे समय तक व्यापार के चलने की संभावना जैसे कारकों का आकलन करती हैं। व्यवसायिक मांग के आधार पर, ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग जगहों पर डेटा सेंटर स्थापित किए जाते हैं।

इस क्षेत्र में घरेलू और विदेशी, दोनों तरह की कंपनियों से निवेश आ रहा है। भारत सरकार डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए कोई सब्सिडी नहीं देती है।

डेटा सेंटर देश भर जैसे मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली एनसीआर और गुजरात में हैं। इनकी स्थापित क्षमता 2020 में 375 मेगावाट से बढ़कर वर्तमान में लगभग 1,575 मेगावाट हो गई है। डेटा सेंटर उद्योग अब आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में और विस्तार कर रहा है, जो नए निवेश के केंद्र बनकर उभर रहे हैं।

डेटा सेंटरों में पानी की ज़रूरत इस बात पर निर्भर करती है कि वहाँ किस तरह की कूलिंग प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जा रहा है। औद्योगिक उद्देश्यों सहित भूजल निष्कर्षण का विनियमन और नियंत्रण जल शक्ति मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों द्वारा तय किए जाते हैं।

यह उद्योग तेज़ी से उन्नत कूलिंग प्रौद्योगिकी को अपना रहा है, जैसे डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग और इमर्शन कूलिंग।

एआई अवसंरचना  के विकास के साथ, शीतलन प्रौद्योगिकियां भी क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग सिस्टम की ओर बढ़ रही हैं। बिजली और पानी की खपत को और कम करने तथा उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग व एआई कार्य को कुशलतापूर्वक समर्थन करने के लिए उद्योग उच्च घनत्व वाले रैक भी तैनात कर रहा है।

सामूहिक रूप से, ये प्रौद्योगिकियां डेटा सेंटर संचालन में पानी की आवश्यकता को कम करके जल उपयोग दक्षता (डब्ल्यूयुइ) में महत्वपूर्ण सुधार कर रही हैं।

यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने 05.08.2026 को लोकसभा में दी गई।

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »