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सरकार ने अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप छात्रवृत्ति सहायता को मजबूत किया है, डीबीटी के जरिए आधार-लिंक्ड बैंक खातों में पैसे का आसान और तेज ट्रांसफर सुनिश्चित हुआ


वास्तविक व्यय वर्ष 2023-24 के 5,475.42 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 6,208.08 करोड़ रुपये हुआ

सरकार ‘अनुसूचित जातियों के लिए मैट्रिक्योत्तर (पोस्ट-मैट्रिक) छात्रवृत्ति’ की केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए शैक्षिक सहायता को लगातार मजबूत कर रही है। यह योजना पोस्ट-मैट्रिकुलेशन और पोस्ट-सेकेंडरी शिक्षा प्राप्त कर रहे पात्र छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

इस योजना के तहत संशोधित बजट अनुमान 2023-24 में 5,400 करोड़ रुपये, 2024-25 में 5,500 करोड़ रुपये और 2025-26 में 6,000 करोड़ रुपये रहा। इसके सापेक्ष  वास्तविक व्यय क्रमशः 5,475.42 करोड़ रुपये, 5,581.52 करोड़ रुपये और 6,208.08 करोड़ रुपये रहा।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की गई केंद्रीय सहायता वर्ष 2023-24 में 5,475.43 करोड़ रुपये, 2024-25 में 5,562.26 करोड़ रुपये और 2025-26 में 6,186.95 करोड़ रुपये रही। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार जारी की गई यह राशि इस योजना के मांग-आधारित स्वरूप और संबंधित कार्यान्वयन अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत सत्यापित छात्रवृत्ति आवश्यकताओं को दर्शाती है।

वर्ष 2021-22 में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) की शुरुआत के बाद से, छात्रवृत्ति राशि में केंद्र के हिस्से का भुगतान सीधे लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में किया जा रहा है। इस व्यवस्था ने छात्रवृत्ति वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ धनराशि के अधिक सरल और तेज प्रवाह को सुनिश्चित किया है।

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यह योजना खुली और मांग आधारित है। केंद्रीय हिस्से की राशि जारी किया जाना संबंधित राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा अपना हिस्सा जारी करने तथा पात्र लाभार्थियों के अंतिम रूप से सत्यापित आंकड़े राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर अपलोड करने पर निर्भर करता है।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इस योजना के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार एजेंसियां हैं। छात्रवृत्ति वितरण में देरी सहित कार्यान्वयन से जुड़े मुद्दों की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है और पात्र छात्रों को समय पर लाभ पहुंचाने के लिए संबंधित हितधारकों के साथ इन मामलों को उठाया जाता है, ताकि छात्रवृत्ति की प्रक्रिया और राशि जारी करने में तेजी लाई जा सके।

सरकार उच्च शिक्षा तक समान पहुंच को बढ़ावा देने और अनुसूचित जाति के छात्रों को उनकी शैक्षणिक आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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