भारत सरकार ने ‘ब्याज-मुक्त वर्किंग कैपिटल सहायता योजना’ के तहत आंध्र प्रदेश में FCV तंबाकू उगाने वालों के लिए प्रति बार्न ₹50,000 का एकमुश्त ब्याज-मुक्त लोन मंज़ूर किया है। इससे बदलती ग्लोबल मार्केट स्थितियों के बीच किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिलेगी।
आंध्र प्रदेश में 2025–26 फसल सीज़न के लिए नीलामी 25 मार्च 2026 को शुरू हुई थी, और अब तक लगभग 100 मिलियन किलोग्राम फ्लू-क्येयर्ड वर्जीनिया (FCV) तंबाकू की नीलामी हो चुकी है। FCV तंबाकू की खेती मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में की जाती है।
ग्लोबल तंबाकू मार्केट में मांग के बदलते पैटर्न, जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की बदलती स्थितियों को देखा गया है, जिनका असर खरीद और मार्केटिंग की स्थितियों पर पड़ा है। सरकार खरीद को आसान बनाने, मार्केट में भागीदारी बढ़ाने और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए भी मिलकर कदम उठा रही है। फसल की आसानी से मार्केटिंग और FCV तंबाकू सेक्टर को मज़बूत करने के लिए एक्सपोर्टर्स, खरीदारों, किसानों और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।
प्रस्तावित एक बार की मदद के तहत, FCV तंबाकू उगाने वालों के लिए प्रति बार्न ₹50,000 की बिना ब्याज वाली वर्किंग कैपिटल सहायता को मंज़ूरी दी गई है। इस प्रस्ताव में लगभग 44,000 किसान शामिल हैं और इसके लिए लगभग ₹220 करोड़ की वित्तीय मदद दी जाएगी। यह सहायता सीधे DBT के ज़रिए किसानों को देने का प्रस्ताव है।
इस प्रस्तावित सहायता का मकसद किसानों को तुरंत नकदी उपलब्ध कराना है, ताकि वे घर की ज़रूरतों को पूरा कर सकें, संस्थागत लोन चुका सकें, आने वाले फसल सीज़न के लिए ज़रूरी सामान खरीद सकें और प्राइवेट लोन पर निर्भरता कम कर सकें। यह पहल समय पर वित्तीय सहायता देकर और वर्किंग कैपिटल की ज़रूरतों को पूरा करके FCV तंबाकू किसानों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराती है।
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