असम में सुअर पालन विकास और पशुधन उद्यमिता को बढ़ावा देना
दुग्ध उत्पादन में सुधार और चारे की सुरक्षा को मजबूत करना
पशु रोग नियंत्रण और पशु चिकित्सा अवसंरचना को सुदृढ़ करना
मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने आज राज्यसभा को सूचित किया कि भारत सरकार पशुधन विकास को मजबूत करने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और देशभर में टिकाऊ ग्रामीण आजीविका को प्रोत्साहित करने के लिए कई लक्षित पहलों को लागू कर रही है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम), पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (एएचआईडीएफ), राष्ट्रीय गोकुल मिशन (आरजीएम) और पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एलएचडीसीपी) जैसी प्रमुख योजनाओं के माध्यम से सरकार पशुधन क्षेत्र में अवसंरचना निर्माण, वैज्ञानिक प्रजनन, रोग नियंत्रण, चारा विकास और उद्यमिता को समर्थन दे रही है।
मंत्री जी ने जानकारी दी कि राष्ट्रीय पशुधन मिशन और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के तहत असम के उद्यमियों को आधुनिक सुअर पालन फार्म और सुअर मांस प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है। पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय पशुधन मिशन के उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत 23 सुअर पालन फार्मों सहित 50 पशुधन परियोजनाओं के लिए 4.98 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की गई है। पशुपालन अवसंरचना विकास कोष के तहत एक सुअर पालन फार्म सहित आठ परियोजनाओं के लिए ब्याज सब्सिडी के रूप में 1.44 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान मवेशियों के आनुवंशिक सुधार के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत 41.67 करोड़ रुपये पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 124.29 करोड़ रुपये और विभिन्न पशुधन विकास गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत 7.74 रुपये करोड़ जारी किए गए हैं।
सरकार ने वैज्ञानिक सुअर पालन को बढ़ावा देने के लिए असम में सुअर वीर्य संग्रहण एवं प्रसंस्करण प्रयोगशाला स्थापित करने हेतु 1.80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसका उद्देश्य कृत्रिम गर्भाधान और आनुवंशिक सुधार को प्रोत्साहित करना है। विभाग ने वैज्ञानिक सुअर पालन को बढ़ावा देने हेतु ‘सुअर पालन में सुचारू पशुपालन पद्धतियां’ नामक एक पुस्तिका भी प्रकाशित की है। इसके अतिरिक्त राज्य में 9,92,863 क्लासिकल स्वाइन फीवर के टीके निःशुल्क लगाए गए हैं, जिससे रोग नियंत्रण, रोजगार सृजन और निर्यात क्षमता को बढ़ावा मिला है।
दुग्ध उत्पादन में सुधार और चारे की सुरक्षा को मजबूत करना
मंत्री ने कहा कि भारत में गायों की औसत दूध उत्पादकता 2014-15 में प्रति पशु प्रति वर्ष 1,648 किलोग्राम से बढ़कर 2024-25 में 2,251 किलोग्राम हो गई है, जबकि राष्ट्रीय दूध उत्पादन में इसी अवधि में 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 146 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर 248 मिलियन मीट्रिक टन हो गया है।
सरकार चारे की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत कई उपाय लागू कर रही है, जिनमें गुणवत्तापूर्ण चारे के बीज का उत्पादन और घास, साइलेज और संपूर्ण मिश्रित राशन (टीएमआर) के बुनियादी ढांचे के लिए सहायता शामिल है। पिछले पांच वर्षों में 1,152.40 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप 1.6 लाख टन गुणवत्तापूर्ण चारे के बीज का उत्पादन हुआ है। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम-ईडीपी) के तहत चारे से संबंधित 204 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जबकि एएचआईडीएफ ने 3,602.47 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 174 पशु आहार संयंत्रों को सहायता प्रदान की है।
मंत्री जी ने बताया कि राष्ट्रीय दुग्ध विकास बोर्ड द्वारा 100 समर्पित चारा-समृद्ध किसान उत्पादक संगठन स्थापित किए गए हैं, जबकि आईसीएआर-भारतीय घासभूमि और चारा अनुसंधान संस्थान ने उच्च उपज वाली चारा किस्मों, राज्य-विशिष्ट चारा विकास योजनाओं को विकसित किया है और 10 लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षित किया है। सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लू प्रबंधन दिशानिर्देश भी जारी किए हैं और उच्च तापमान के प्रति सहनशीलता के लिए जानी जाने वाली स्वदेशी मवेशी नस्लों को बढ़ावा देना जारी रखा है। भारत पशुधन योजना के तहत 1962 किसान ऐप के माध्यम से डिजिटल परामर्श सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे किसानों को वैज्ञानिक राशन संतुलन पद्धतियों को अपनाने में मदद मिल रही है।
मंत्री ने आंध्र प्रदेश से संबंधित एक अलग सवाल का जवाब देते हुए बताया कि पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यान्वित राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सरकार खुरपका और मुंहपका रोग (एफएमडी) और ब्रुसेलोसिस के खिलाफ टीकाकरण के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान करती है।
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