प्रधान मंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत 29000 से अधिक अतिरिक्त मकानों को मंजूरी दी गई, कुल स्वीकृत मकानों की संख्या अब 18.77 लाख
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी 2.0 (पीएमएवाई-यू 2.0) के तहत कुल 18.77 लाख मकानों को मंजूरी दी है, जिससे इस योजना के क्रियान्वयन को और गति मिली है और शहरी क्षेत्रों में ‘सभी के लिए आवास’ की दिशा में प्रगति में तेजी आई है। यह निर्णय 10 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एमओएचयूए के शहरी विकास विभाग के सचिव श्री सत्येंद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (सीएसएमसी) की 9वीं बैठक में लिया गया।
इस बैठक में आवास के लिए सभी (एचएफए) के संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (जेएस एंड एमडी) श्री कुमार रविकांत सिंह, संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार (जेएस एंड एफए) श्री संजीत, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और भाग लेने वाले राज्यों के मिशन निदेशकों ने भी भाग लिया। आज की बैठक में असम, बिहार, गुजरात, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश – इन छह राज्यों को शामिल करते हुए पीएमएवाई-यू 2.0 के लाभार्थी आधारित निर्माण (बीएलसी) और भागीदारी में किफायती आवास (एएचपी) वर्टिकल्स के तहत 29,000 से अधिक मकानों को मंजूरी दी गई।

राज्यों को संबोधित करते हुए, शहरी विकास सचिव (एमओएचयूए) ने कहा कि पीएमएवाई-यू 2.0 के समय पर और प्रभावी कार्यान्वयन तथा निगरानी के लिए ठोस प्रयास सुनिश्चित किए जाने चाहिए ताकि योजना का लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक पहुँचे। उन्होंने आगे जोड़ा कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के परामर्श से किसी भी बाधा की तुरंत पहचान की जानी चाहिए और उसका समाधान किया जाना चाहिए।
शहरी विकास सचिव ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया कि पीएमएवाई-यू 2.0 की प्रगति को नियमित निगरानी प्रदान करने और गति देने के लिए हर महीने के दूसरे सप्ताह में सीएसएमसी की बैठकें बुलाई जाएंगी। उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों पर जोर दिया कि वे आगामी सीएसएमसी बैठकों में समय पर विचार और मंजूरी के लिए प्रत्येक महीने के अंत तक विधिवत स्वीकृत परियोजनाएं प्रस्तुत करें।
18 लाख से अधिक परिवारों को लाभ
पीएमएवाई-यू 2.0 अपने विभिन्न घटकों के माध्यम से पात्र शहरी ईडब्लूएस/एलआईजी और एमआईजी परिवारों को आवास सहायता प्रदान करना चाहता है। इस योजना के तहत, लाभार्थी अपना पक्का घर बना सकते हैं, योजना के तहत निर्मित परियोजनाओं में घर खरीद सकते हैं, किफायती किराए के आवास का लाभ उठा सकते हैं, या अपनी आवश्यकताओं, पात्रता और वित्तीय परिस्थितियों के अनुकूल विभिन्न आवास समाधान प्राप्त करने के लिए पात्र आवास ऋणों पर ब्याज सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं।
पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत कुल 18.77 लाख स्वीकृतियों के साथ, यह योजना सुरक्षित, किफायती और पक्के घरों तक पहुँच का लगातार विस्तार कर रही है। ये स्वीकृतियां ‘सभी के लिए आवास’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जो अधिक शहरी परिवारों को एक सुरक्षित घर के स्वामित्व और एक बेहतर भविष्य के निर्माण के करीब पहुँचने में सक्षम बनाती हैं।
‘सभी के लिए आवास’ की दिशा में बड़ा प्रोत्साहन
पीएमएवाई-यू 2.0, पीएमएवाई-यू के तहत हुई निरंतर प्रगति को आगे बढ़ाता है। कुल मिलाकर पीएमएवाई-यू और पीएमएवाई-यू 2.0 के अंतर्गत 1.25 करोड़ से अधिक मकानों को मंजूरी दी जा चुकी है और 1 करोड़ से अधिक मकान पूरे करके लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं।
गरिमा और सशक्तिकरण की नींव के रूप में आवास
यह योजना ईडब्लूएस/एलआईजी और एमआईजी परिवारों की आवास आवश्यकताओं को पूरा करती है, जिनकी वार्षिक पारिवारिक आय ₹9 लाख तक है, जो उन्हें कच्चे, अपर्याप्त या किराए के आवास से सुरक्षित और गरिमापूर्ण घरों में स्थानांतरित होने में सक्षम बनाती है। कमजोर परिवारों को पर्याप्त आवास तक पहुँच प्रदान करके, योजना ने उन्हें बेहतर जीवन की गुणवत्ता की ओर बढ़ने में मदद करते हुए सुरक्षा और स्थिरता की एक नई भावना दी है।
यह योजना घरों के महिलाओं के स्वामित्व पर भी विशेष जोर देती है। योजना के तहत स्वीकृत मकान या तो घर की महिला के नाम पर हैं या संयुक्त स्वामित्व में हैं, जिससे परिवार के भीतर महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक स्थिति मजबूत होती है। पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत स्वीकृत 18.77 लाख मकानों में से, 17.19 लाख मकान (92%) महिलाओं को आवंटित किए गए हैं।


इसके अलावा, समावेशिता सुनिश्चित करने और समाज के कमज़ोर वर्गों तक योजना का लाभ पहुँचाने के लिए, 1.80 लाख मकान वरिष्ठ नागरिकों को आवंटित किए गए हैं। सुरक्षित, किफायती और गरिमापूर्ण आवास तक समान पहुँच के प्रति योजना की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, एससी लाभार्थियों के लिए 3.25 लाख, एसटी लाभार्थियों के लिए 1.02 लाख और ओबीसी लाभार्थियों के लिए 8.22 लाख मकान स्वीकृत किए गए हैं।
पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत संचयी स्वीकृतियों की संख्या अब 20 लाख के मील के पत्थर के करीब पहुँच रही है, ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है कि प्रत्येक पात्र शहरी परिवार के पास अपना खुद का एक घर हो। स्वीकृत किया गया प्रत्येक मकान एक ऐसे परिवार का प्रतिनिधित्व करता है जो एक सुरक्षित और गरिमापूर्ण भविष्य के करीब पहुँच रहा है।
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