LIVE

राष्ट्रीय पुस्तकालय कार्यक्रम

देश के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार पुस्तकालय राज्य का विषय है और सार्वजनिक पुस्तकालय संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश के अधिकारियों के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं।

हालांकि, राजा राममोहन रॉय पुस्तकालय फाउंडेशन (आरआरएलएफ), जो केन्‍द्रीय संस्कृति मंत्रालय के तहत एक  स्वायत्त संगठन है, देश भर में सार्वजनिक पुस्तकालयों के संवर्धन और विकास के लिए योजनाओं को लागू कर रहा है। आरआरएलएफ बुनियादी ढांचे के विकास, पुस्तकालय सेवाओं, पठन संसाधनों और क्षमता निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करके पुस्तकालयों को मजबूत बनाने में सहयोग करता है। आरआरएलएफ अपनी विभिन्न मैचिंग और नॉन मैचिंग योजनाओं के तहत पुस्तकालय भवनों के निर्माण/जीर्णोद्धार, पुस्तकों और पठन सामग्री की खरीद, फर्नीचर और उपकरणों की खरीद और पुस्तकालय के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) आधारित पुस्तकालय सेवाओं को मजबूत बनाने और कॉपीराइट-मुक्त पांडुलिपियों, दुर्लभ दस्तावेजों और अन्य विरासत सामग्री के डिजिटलीकरण के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है, जहां भी इस योजना के दिशानिर्देशों के तहत यह स्वीकार्य हो। इन पहलों के माध्यम से सार्वजनिक पुस्तकालयों को पठन, सांस्कृतिक जुड़ाव, आजीवन सीखने और सामुदायिक भागीदारी के लिए समावेशी केंद्रों के रूप में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

आरआरआरएलएफ देश भर में पुस्तकालय सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से राज्य पुस्तकालय अधिकारियों के साथ बातचीत, कार्यशालाओं, सेमिनारों, सम्मेलनों और राज्य पुस्तकालय योजना समितियों की बैठकों के माध्यम से सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और प्रसार को भी बढ़ावा देता है।

संस्कृति मंत्रालय राष्ट्रीय पुस्तकालय मिशन (एनएमएल) योजना को भी लागू करता है, जिसके तहत संबंधित राज्‍य अधिकारियों द्वारा अनुशंसित प्रत्येक राज्य/केंद्र शासित प्रदेश में एक राज्य केंद्रीय पुस्तकालय और एक जिला पुस्तकालय के साथ-साथ संस्कृति मंत्रालय द्वारा चिन्हित किए गए छह पुस्तकालयों को ‘एनएमएल मॉडल पुस्तकालय की स्थापना’ घटक के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

संस्कृति मंत्रालय ने राष्ट्रीय पुस्‍तकालय मिशन के तहत भारतीय संस्कृति पोर्टल www.indianculture.gov.in के माध्‍यम से भारतीय राष्ट्रीय आभासी पुस्तकालय (एनवीएलआई) की स्‍थापना की है। इसका उद्देश्‍य विविध सांस्‍कृतिक धरोहरों का डिजिटल संरक्षण करना तथा नागरिकों में अपनी साझा सांस्‍कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता और सामूहिक स्वामित्व की भावना विकसित करना है।

संस्कृति मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) ने अब तक लगभग 19.7 करोड़ पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया है और वर्तमान में इसके डिजिटल भंडार में लगभग 74.7 लाख संदर्भ मीडिया फाइलें उपलब्ध हैं, जिन्‍हें अभिलेख पटल पोर्टल (https://www.abhilekh-patal.in) के माध्यम से देखा जा सकता है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह जानकारी आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »