राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पीएम-जेएवाई योजना की सराहना की; कहा – लाभार्थियों के इलाज पर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं
चिकित्सा का क्षेत्र केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का नहीं, बल्कि यह करुणा और विश्वास का भी क्षेत्र है : राष्ट्रपति
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में 16 नए एम्स स्थापित किए गए : स्वास्थ्य मंत्री
श्री जेपी नड्डा ने कहा – 2029 तक 10,000 अतिरिक्त एमबीबीएस और पीजी सीटों के लिए 15,000 करोड़ रुपये आवंटित
मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 800 से अधिक, स्नातक सीटों की संख्या 1.42 लाख तक पहुंची; सरकार का लक्ष्य 2029 तक 75,000 अतिरिक्त एमबीबीएस और पीजी सीटें उपलब्ध कराना है : स्वास्थ्य मंत्री
2024-25 में एम्स बिलासपुर में 3 लाख से अधिक ओपीडी परामर्श और 10 लाख से अधिक नैदानिक परीक्षण दर्ज किए गए : स्वास्थ्य मंत्री
श्री जेपी नड्डा ने एम्स बिलासपुर के 776 बिस्तरों, 26 विशिष्टताओं और 15 सुपर विशिष्टताओं तक विस्तार पर प्रकाश डाला
राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने आज बिलासपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस – एम्स) के पहले स्नातक बैच को संस्थान के पहले दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्रदान कीं। यह संस्थान के विकास और देश में चिकित्सा शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा में इसके योगदान के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने स्नातकों और स्वर्ण पदक विजेताओं के साथ-साथ उनके माता-पिता, अभिभावकों और उन शिक्षकों की सराहना की, जिन्होंने उनके पूरे शैक्षणिक पाठ्यक्रम में उनका मार्ग-दर्शन किया। उन्होंने कहा कि एम्स बिलासपुर से स्नातक होने वाले पहले बैच के रूप में, इस संस्थान की पहचान और विरासत को आकार देने में उनकी विशेष भूमिका है। उन्होंने छात्रों से अपने आचरण, प्रतिबद्धता और सेवा के माध्यम से संस्थान की प्रतिष्ठा को बनाए रखने का आग्रह किया और उन्हें याद दिलाया कि चिकित्सा पेशे का मानवता के प्रति एक दायित्व है।

राष्ट्रपति ने स्नातकों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने कार्य में लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता दें, विशेषकर दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को जिनकी विशेष स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच है। एम्स बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, उन्होंने संस्थान और उसके स्नातकों से दुरस्थ चिकित्सा, विशेषज्ञ परामर्श, चिकित्सा कर्मियों के प्रशिक्षण और आधुनिक प्रौद्योगिकी के उपयोग सहित विभिन्न माध्यमों से इस क्षेत्र में तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया।
राष्ट्रपति ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर स्वास्थ्य देखभाल का वित्तीय बोझ कम हुआ है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उपचार पर 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। उन्होंने हितधारकों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि इन स्वास्थ्य सुरक्षा उपायों की जानकारी दूरदराज के क्षेत्रों तक भी पहुंचे। उन्होंने एम्स जैसे प्रमुख संस्थानों से बुनियादी और किफायती स्वास्थ्य देखभाल समाधानों के विकास में योगदान देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
स्नातकों को आजीवन सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, राष्ट्रपति ने उनसे चिकित्सा पद्धतियों और स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बनाए रखने और अनुसंधान को ऐसे नवाचारों में परिवर्तित करने का आग्रह किया जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाते हैं। उन्होंने कहा, “चिकित्सा का क्षेत्र केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी का क्षेत्र नहीं है। यह वास्तव में करुणा और विश्वास का क्षेत्र भी है।”
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने स्नातकों की उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी और हिमाचल प्रदेश तथा इसके पड़ोसी राज्यों, विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों के लोगों तक विशेष स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में एम्स बिलासपुर की निभाई जा रही महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। एम्स बिलासपुर के उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अनुसंधान में व्यापक योगदान दे रहा है और इसने स्वास्थ्य क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश की स्थिति को मजबूत किया है।
स्नातक छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने उन्हें याद दिलाया कि उनकी डिग्रियां समाज और राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदारी लेकर आती हैं। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने पेशेवर जीवन में करुणा, संवेदनशीलता और सेवा को सर्वोपरि रखें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्नातक छात्र अपने ज्ञान और सेवा भावना का उपयोग राष्ट्र के विकास में योगदान देने के लिए करेंगे। उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि एम्स बिलासपुर के ये स्नातक छात्र अपनी प्रतिभा, ज्ञान और सेवा भावना से देश के विभिन्न क्षेत्रों में एक नई पहचान बनाएंगे और एक विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।”

इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जेपी नड्डा ने एम्स बिलासपुर के पहले बैच के शैक्षणिक सफर के सफल समापन पर खुशी और गर्व व्यक्त किया। देश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या 384 से बढ़कर 800 से अधिक हो गई है, जबकि स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1.42 लाख हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2029 तक 75,000 स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटें जोड़ना है, जिसमें 10,000 अतिरिक्त एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटों के सृजन के लिए 15,000 करोड़ रुपये का आवंटन भी शामिल है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में एम्स नेटवर्क के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जहां कई दशकों तक देश में केवल एक ही एम्स था, वहीं पिछले 12 वर्षों में 16 नए एम्स स्थापित किए गए हैं। उन्होंने श्रोताओं से इस विस्तार की व्यापकता और देश भर में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों को समझने का आग्रह किया।
श्री नड्डा ने एम्स बिलासपुर के बारे में बात करते हुए बताया कि संस्थान ने अपने प्रारंभिक लक्ष्य 750 बिस्तरों से आगे बढ़कर अब 776 बिस्तरों की क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें 26 विशिष्टताएं और 15 सुपर विशिष्टताएं पूरी तरह से कार्यरत हैं। उन्होंने जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं, कार्डियक कैथेटराइजेशन, न्यूरोसर्जरी, व्यापक देखभाल, कैंसर देखभाल और रेडियोथेरेपी सेवाओं की उपलब्धता पर प्रकाश डाला और कहा कि यह प्रगति पिछले पांच वर्षों में हासिल की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले चार वर्षों में संस्थान के ओपीडी परामर्शों की संख्या 12 लाख और आईपीडी प्रवेशों की संख्या 1 लाख से अधिक हो गई है।

श्री नड्डा ने एम्स बिलासपुर के संकाय और कर्मचारियों की इस संस्थान के विकास की तीव्र गति के लिए प्रशंसा की और इसके निरंतर विकास का भरोसा जताया। स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने उनसे एम्स बिलासपुर की प्रतिष्ठा को बनाए रखने और उत्कृष्टता एवं सेवा के मूल्यों को अपने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “आपके तीव्र विकास को देखते हुए, मुझे पूरा विश्वास है कि बहुत जल्द एम्स बिलासपुर देश के अन्य एम्स के समकक्ष होगा।” उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए स्नातक छात्रों से कहा कि आप उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं प्रदान करेंगे और मानवता के लिए काम करेंगे।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी इस अवसर पर स्नातक छात्रों और एम्स बिलासपुर को अपनी शुभकामनाएं दीं।
इस कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने वालों में राज्यसभा सांसद श्री हर्ष महाजन, एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त) और एम्स बिलासपुर के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) नरेंद्र कुमार अरोरा भी उपस्थित थे।

इस दीक्षांत समारोह में कुल 92 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 43 एमबीबीएस, 26 बीएससी ऑनर्स नर्सिंग, 9 बीएससी एलाइड हेल्थकेयर और 14 एमडी/एमएस के छात्र शामिल हैं। राष्ट्रपति ने शैक्षणिक प्रदर्शन को मान्यता देते हुए विभिन्न विषयों के मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए। पुरस्कार पाने वालों में एमबीबीएस से सुश्री सागरिका और श्री रक्षित वशिष्ठ, बीएससी एलाइड हेल्थकेयर साइंस से सुश्री भावना ठकराल, बीएससी ऑनर्स नर्सिंग से सुश्री भाव्या मल्होत्रा और एमडी, कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन से श्री प्रतीक गोयल शामिल थे।
एम्स बिलासपुर के बारे में:
एम्स बिलासपुर ने जनवरी 2021 में एमबीबीएस के पहले बैच के प्रवेश के साथ अपने शैक्षणिक सफर की शुरुआत की, जिसके बाद 2022 में एलाइड हेल्थकेयर साइंसेज और नर्सिंग साइंसेज के पहले बैचों का प्रवेश हुआ। संस्थान का औपचारिक उद्घाटन अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में हुआ। तब से, इसने अपनी शैक्षणिक, नैदानिक और अनुसंधान क्षमताओं का लगातार विस्तार किया है।
2024 से 2025 के दौरान, संस्थान में 3 लाख से अधिक ओपीडी परामर्श दर्ज किए गए और 17,000 से अधिक लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं। इस वर्ष 3,500 से अधिक बड़ी सर्जरी, 900 से अधिक छोटी सर्जरी, 1,000 से अधिक कार्डियक कैथेटराइजेशन प्रक्रियाएं और 3,200 से अधिक डायलिसिस सुविधा दी गई, जबकि इसकी नैदानिक प्रयोगशालाओं में 10 लाख से अधिक परीक्षण किए गए। वर्तमान में संस्थान में लगभग 620 छात्र विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत हैं, जो स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

यह दीक्षांत समारोह एम्स बिलासपुर की संस्थागत यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इसका पहला बैच अकादमिक प्रशिक्षण से पेशेवर सेवा में कदम रख रहा है। नवयोग्य डॉक्टर, नर्स, संबद्ध स्वास्थ्य सेवा पेशेवर और स्नातकोत्तर विशेषज्ञ देश भर में रोगियों की देखभाल करेंगे और जन स्वास्थ्य को मजबूत करेंगे।
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