LIVE

रबी अभियान 2026 का केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किया शुभारंभ: केंद्र-राज्य मिलकर बनाएंगे जलवायु-अनुकूल कृषि रोडमैप


महाराष्ट्र-कर्नाटक में सूखे का संकट: केंद्र की टीम करेगी जमीनी आकलन, केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे दौरा

राज्य जल बजट बनाने पर करे विचार: पानी की उपलब्धता देखकर फसल योजना, सिंचाई प्रबंधन पर श्री शिवराज सिंह का खास जोर

दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता: चना, मसूर, सरसों को रबी का नया केंद्रबिंदु बनाने का श्री शिवराज सिंह ने किया आह्वान

बीज से बाजार तक: समय पर बीज, खाद और खरीद की ठोस व्यवस्था करें सभी राज्य- श्री शिवराज सिंह

‘खेत बचाओ’ रबी में भी चलाएं: संतुलित उर्वरक उपयोग से लागत घटे, मिट्टी स्वस्थ रहे- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

किसान क्रेडिट और फार्मर आईडी: वित्तीय समावेशन और डिजिटल बुनियाद को प्राथमिकता- श्री शिवराज सिंह

हर सप्ताह समीक्षा: फसल, रोग और भाव पर रियल-टाइम निगरानी के लिए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने दिए दिशा-निर्देश

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज दिल्ली में शुरू हुए दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन– रबी अभियान 2026’ में राज्यों को स्पष्ट तालमेल, वैज्ञानिक योजना और जमीनी निगरानी के साथ रबी सीजन की तैयारियां पूरी करने का आह्वान किया।  उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित बारिश और पानी की कमी जैसी चुनौतियों के बीच अब पुराने तरीकों से नहीं, बल्कि डेटा-आधारित योजना और केंद्र-राज्य साझेदारी से ही खाद्य सुरक्षा और किसान आय के लक्ष्य पूरे होंगे।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार, एनएएससी परिसर, पूसा में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी, केंद्रीय कृषि सचिव श्री अतीश चंद्रा तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट सहित केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के कृषि विभाग के प्रधान सचिव, निदेशक स्तर के अधिकारी, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, आईसीएआर के संस्थान प्रमुख, केवीके और आत्मा के प्रतिनिधि तथा अन्य हितधारक शामिल हुए।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रबी 2026 केवल एक मौसम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को मजबूत करना, कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाना, स्थिरता सुनिश्चित करना और किसानों की आय में वृद्धि के लिए एक समन्वित एवं परिणाम-उन्मुख रणनीति तैयार करना है।

जल बजट को प्राथमिकता: पानी की उपलब्धता देखकर फसल योजना

श्री शिवराज सिंह चौहान ने रबी तैयारियों में ‘जल बजट’ को सबसे महत्वपूर्ण पैरामीटर बताते हुए कहा कि हर राज्य और जिले को यह आकलन करना होगा कि उनके पास सिंचाई के लिए कितना पानी उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पानी की सीमित उपलब्धता को देखते हुए फसल चुननी होगी- जहां पानी कम है, वहां कम पानी मांगने वाली फसलों (दलहन, तिलहन) को प्राथमिकता दी जाए और जहां सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है, वहां अन्य फसलों की योजना बनाई जाए।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि वर्तमान में बारिश औसत से कम हुई है, लेकिन इतनी कम नहीं कि पानी की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़े। हालांकि, कुछ राज्यों में पानी की कमी चिंता का विषय है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे रबी की प्लानिंग पूरे समय ठीक तरीके से करें और जिन हिस्सों में देश में कम पानी है, वहां कितना पानी की उपलब्धता है, मिट्टी में नमी कितनी है, इसका आकलन करके सिंचाई के पानी के लिए अभी से प्रबंध करें। श्री चौहान ने चेतावनी दी कि ऐसा कोई पैरामीटर नहीं होना चाहिए जिसमें पानी ज्यादा लगना और बाद में पानी नहीं मिलना, तो फिर फसल खराब होने का संकट पैदा होगा। उन्होंने कहा कि तैयारियों में देर नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अब हम रबी की बुवाई के मुहाने पर खड़े हैं और रेनफेड इलाके में तो जल के पौधे शुरू हो जाते हैं, यहां दूसरी फसल नहीं है।

महाराष्ट्र–कर्नाटक में सूखे का संकट: केंद्र की टीम करेगी जमीनी आकलन

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र में लगभग दो-तिहाई इलाके प्रभावित हैं और वहां राज्य स्तर पर सूखा घोषित किया जा चुका है जबकि कर्नाटक में भी सूखे की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि 3 अक्टूबर को केंद्र की टीम कर्नाटक में सूखे का जमीनी आकलन करेगी और महाराष्ट्र में भी केंद्रीय टीम भेजी जाएगी। कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि वे स्वयं भी अपनी टीम के साथ इन राज्यों का दौरा करेंगे और ऐसे समय में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में केंद्र सरकार किसानों के साथ डटकर खड़ी है।

पानी के हिसाब से फसल, देर से बुवाई से बचें

श्री चौहान ने कहा कि महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में सूखे की स्थिति बनी है और ऐसे इलाकों में किसानों को पानी की उपलब्धता और मिट्टी की नमी को ध्यान में रखकर फसल चुननी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पानी कम है और फिर भी ज्यादा पानी मांगने वाली फसल बोई गई, तो बाद में फसल खराब होने का संकट पैदा हो सकता है। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि रेनफेड और सिंचित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग योजना बनानी होगी और देर से बुवाई से जर्मिनेशन और उत्पादन दोनों प्रभावित होते हैं, इसलिए समय पर बुवाई पर खास ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि बुवाई अगर देर हुई तो संकट पैदा हो जाएगा, नमी अगर कम हुई, फिर जर्मिनेशन ठीक नहीं होगा, उत्पादन ठीक नहीं आएगा, इसलिए आगामी फसल की तैयारी के लिए जितने भी सब चीजें हैं, उसके विस्तार में समय पर सारी तैयारी करनी चाहिए।

बीज: सबसे अहम कड़ी, सही किस्म का चयन अभी तय हो

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बीज को रबी तैयारी की सबसे अहम कड़ी बताते हुए कहा कि राज्यों को अभी से यह तय करना होगा कि किस क्षेत्र में कौन सी किस्म सबसे उपयुक्त रहेगी। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में बीज की मांग समय पर नहीं की जाती और वितरण में देरी हो जाती है जिससे अच्छी किस्में सामान्य अनाज के भाव में बिक जाती हैं, इसलिए बीज की मांग, उठाई, मिनी किट और वितरण का पूरा रोडमैप अब तैयार होना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि मुझे तकलीफ होती है कि कुछ राज्य पर्याप्त मात्रा में ना तो बीज की डिमांड करते हैं, ना बीज उठाते हैं। उन्होंने कहा कि कई जगह बीज का वितरण इतनी देरी से होता है कि जब तक वो बीज आते हैं, तब तक बोनी हो जाती है, फिर वो बीज जो बहुत उपयोगी है वो सामान्य अनाज के भाव हो जाता है। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि यहां आईसीएआर के सारे मित्र बैठे हैं, वरिष्ठ साइंटिस्ट बैठे हैं, जितनी किस्में हैं, अलग-अलग वैरायटी, अलग-अलग क्षेत्रों के लिए, अलग-अलग परिस्थितियों के लिए, अभी आपस में बातचीत कर लें कि इस समय कहाँ कौन सी वैरायटी उपयुक्त है। उन्होंने कहा कि जो हम किस्में जारी करते हैं, उनमें से कितनी प्रचलन में आ गईं, और जो नहीं आईं, वो किसान को हम एजुकेट करेंगे, ये एक बहुत साइंटिफिक ढंग से 2 दिन में आपको कर लेना चाहिए।

दलहन–तिलहन में आत्मनिर्भरता: प्लानिंग पर जोर

श्री चौहान ने कहा कि धान के बाद खाली रहने वाले क्षेत्रों में दलहन और तिलहन की बुवाई को प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि इन फसलों को पानी कम लगता है और ये आत्मनिर्भरता मिशन के तहत राष्ट्रीय लक्ष्यों से भी जुड़ी हैं। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे कल तक अपने-अपने राज्यों में रबी में दलहन के तहत कितना रकबा और कौन-कौन सी फसल (चना, मसूर, सरसों आदि) लाने का लक्ष्य है, इसकी पूरी योजना बना लें। मंत्री श्री चौहान ने कहा कि इसके लिए सुनिश्चित बाजार व्यवस्था भी तय की जाए ताकि किसान को भरोसा रहे कि उसकी उपज की खरीद समय पर होगी। उन्होंने कहा कि काम अभी से करना पड़ेगा, हर एक राज्य से कोई भी भारत का राज्य, जहाँ धान के बाद कुछ नहीं होता, किसान भी करें, हम इस समय दलहन को प्रोत्साहित सकते हैं, ये एक मौका है।

खरीद की पक्की तैयारी: राज्य नहीं खरीदे तो केंद्रीय एजेंसियां खरीदेंगी

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने स्पष्ट किया कि फसल अच्छी आए, इसकी तैयारी के साथ-साथ खरीद की व्यवस्था भी पहले से तैयार होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार समय पर खरीद नहीं करती है, तो केंद्र की नोडल एजेंसियां (नेफेड/एनसीसीएफ) सीधे किसान से खरीद करेंगी, लेकिन इसके लिए राज्यों को मंडी टैक्स में छूट जैसी सुविधाएं समय पर देनी होंगी ताकि खरीद प्रक्रिया बाधित न हो।  श्री चौहान ने कहा कि पीएसएस (प्राइस सपोर्ट स्कीम) के तहत दलहन और तिलहन की खरीद के लिए केंद्र ने बड़े पैमाने पर प्रस्ताव मंजूर किए हैं और राज्यों को इसका पूरा फायदा उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई राज्य ऐसे हैं जो खरीदने के लिए प्रस्ताव तो भेजते हैं और बाद में खरीदते ही नहीं। तैयारी परफेक्ट और पूरी करनी चाहिए, बीज की उपलब्धता, उसका वितरण, इसका पूरा रोडमैप बनना चाहिए, समय पर। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है जब बीज की आप योजना बनाएं तो किसानों से भी कहीं चर्चा आपकी होनी चाहिए, कृषि विज्ञान केंद्र का भी सहयोग लें और उन्हें मजबूत भी बनाएं।

खाद का संतुलित उपयोग और ‘खेत बचाओ अभियान’

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर खास जोर दिया और कहा कि एक बोरी से काम चल सकता है तो दो बोरी क्यों डालें, क्योंकि इससे लागत बढ़ती है और मिट्टी भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि खरीफ में चलाया गया ‘खेत बचाओ अभियान’ रबी में भी चलाया जाना चाहिए और दक्षिण के राज्यों में इसके सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं, जहां उर्वरक उपयोग घटा, लेकिन उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि राज्यों को किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और इसके लिए वैज्ञानिकों की टीम की मदद ली जा सकती है।

उन्होंने कहा कि खाद के भंडारण से लेकर उचित वितरण तक की व्यवस्था, आप जानें कि जितना बीज भरना है, उतना खाद भी भरेंगे, समय पर बोनी, तो समय पर खाद भी चाहिए, बीज के साथ।  श्री चौहान ने कहा कि समय पर वितरण की व्यवस्था भी चाहिए, अभी हम पायलट दो-दो जिलों में हर एक राज्य में किया था फार्मर आईडी के आधार पर। गड़बड़ न हो, किसान तक पहुँच भी जाए और कोई गलत फायदा न उठा पाए। राज्य से शिकायत नहीं आना चाहिए कि ब्लैक हो रहा है। इसकी व्यवस्था भी आप ठीक ढंग से कर लें। उन्होंने कहा कि अपनी ड्यूटी है कि उर्वरकों का संतुलित इस्तेमाल हों। अभी सब्सिडी पर 2 लाख करोड़ रुपए का खर्च केंद्र सरकार पर आ रहा है। कीमत बढ़ती है तो भी केवल 266 और 1350 रु. में बोरी दी जा रही है, ये भारत सरकार का बड़ा काम है किसान के लिए। उन्होंने कहा कि लेकिन संतुलित उपयोग हो, ये हमारी ड्यूटी है, अगर एक बोरी में ठीक हो सकती है फसल, तो दो बोरी क्यों करें, इसका भी आप ध्यान रखें।

श्री चौहान ने कहा कि खेत बचाओ अभियान हमने खरीफ की फसल में चलाया था, राज्य रबी की फसल में भी चला सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं, खेत बचाओ का मतलब खाद का संतुलित उपयोग करना है और हम पूरा सहयोग करेंगे आपको। उन्होंने कहा कि आप बताएंगे कि साइंटिस्ट भेजिए, हम लोग भेजने को तैयार हैं, रबी की फसल में खेत बचाओ अभियान चलना चाहिए, मार्केट भी बचाना है, मित्र कीटों को भी बचाना है, आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती अच्छी पैदा करती रहे, तो उस स्थिति को बनाए रखना है।

प्राकृतिक खेती: ब्रांडिंग, मार्केटिंग और सर्टिफिकेशन पर ध्यान

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती के लिए किसान तैयार हैं और रजिस्ट्रेशन भी बढ़ा है, लेकिन अब राज्यों को अपने प्राकृतिक उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग करनी होगी। उन्होंने आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के उदाहरण देते हुए कहा कि इन राज्यों ने प्राकृतिक खेती के ब्रांड बनाए हैं और उनकी पहचान बनाने से उत्पादों को बेहतर कीमत मिल रही है। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि सर्टिफिकेशन में दिक्कत न आए, इसकी भी व्यवस्था की जाए ताकि प्राकृतिक उत्पादों को बाजार में सही पहचान मिल सके। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी चीज़ें हैं जो जरूरी हैं, प्राकृतिक खेती के लिए भी एक मौका है, किसान तैयार हैं, रजिस्ट्रेशन हुआ है, लेकिन बहुत फोकस कर इस समय प्रयास करें, प्राकृतिक खेती की तरफ अब ये दुनिया के लिए जरूरी है। राज्यों को अपने प्राकृतिक उत्पाद की मार्केटिंग ब्रांडिंग करनी पड़ेगी, आंध्र प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश इनने अपने अपने प्राकृतिक खेती के ब्रांड बनाए, उनकी पहचान बनाई है।

किसान क्रेडिट कार्ड और फार्मर आईडी: वित्त और डिजिटल बुनियाद

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में लगभग 9.54 करोड़ किसान परिवार जुड़ चुके हैं, लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड की कवरेज अभी भी कम है, खासकर छोटे और सीमांत किसानों में। उन्होंने राज्यों से कहा कि वे आकलन करें कि कहां क्रेडिट कार्ड कम पड़ रहे हैं और बैंक स्तर पर लोन स्वीकृति में कहां दिक्कतें आ रही हैं ताकि समय पर क्रेडिट मिल सके। श्री चौहान ने फार्मर आईडी और एग्रीस्टैक के काम को तेज करने का भी आह्वान किया और कहा कि डिजिटल बुनियाद से योजनाओं का सीधा लाभ किसान तक पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि फार्मर आईडी का काम बहुत अच्छा हो रहा है, सबको बधाई देता हूँ, पिछले दिनों हमने अलग-अलग राज्यों में जो स्थिति थी, वो बताई, काम को लैंडमार्क बताए, काम को तेजी से पूरा करना है, तो किसानों की परेशानियाँ निश्चित तौर पर हम लोग दूर कर पाएँगे।

साप्ताहिक समीक्षा: फसल, रोग और बाजार भाव पर रियल–टाइम निगरानी

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने निर्देश दिया कि हर राज्य में हर सप्ताह फसल की स्थिति, बुवाई की प्रगति, जर्मिनेशन, रोगों के हमले और बाजार भावों की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे समस्याएं समय पर पता चलेंगी और त्वरित उपाय किए जा सकेंगे; इसलिए कृषि विभाग और संबंधित एजेंसियों को रियल-टाइम डेटा पर निगरानी बढ़ानी होगी। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि दिल्ली स्तर पर भी हर सप्ताह समीक्षा बैठक हम करते हैं, जिसमें फसलों की स्थिति, मार्केट रेट और रोगों के अटैक की जानकारी आदि के बारे में जानकारी मिलती है और जहां जरूरत है, वहां कार्रवाई की जा सकती हैं। हर सप्ताह हमने सिस्टम व्यवस्थित करने की कोशिश की है।

राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन–रबी अभियान 2026 के दो दिवसीय कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, श्री अतीश चन्द्रा ने रबी सीज़न के प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा साझा करते हुए कहा कि बदलते मौसम, असमान वर्षा और रेनफेड क्षेत्रों में नमी से जुड़ी चुनौतियों के बीच कृषि विविधीकरण, सतत खेती और अनुसंधान आधारित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, आधुनिक कृषि अवसंरचना, मजबूत बाजार तंत्र और डिजिटल कृषि समाधानों को अंतिम छोर तक पहुंचाकर किसानों की आय बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर कृषि के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

इस अवसर पर सचिव, डेयर एवं महानिदेशक, आईसीएआर डॉ. मांगी लाल जाट ने आगामी रबी अभियान के लिए आत्मनिर्भरता, फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल एवं सतत कृषि, डिजिटल कृषि और जोखिम न्यूनीकरण को प्रमुख प्राथमिकताएं बताया। उन्होंने तिलहन एवं दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने तथा राइस फेलो क्षेत्रों में लक्षित रणनीति के तहत फसल विविधीकरण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए फसल एवं उपयुक्त किस्म के चयन से लेकर गुणवत्तापूर्ण बीज, मशीनीकरण, जैविक समाधान और बीज उपचार तक एक समग्र तकनीकी पैकेज विकसित किया जाना आवश्यक है। डॉ. जाट ने बताया कि आगामी सीजन में छह राज्यों के 37 जिलों में 10,000 एकड़ क्षेत्र में ग्रीन अमोनिया के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जाने की योजना है।
 

सम्मेलन का संदर्भ और आगे की कार्ययोजना

दो दिवसीय राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी, आईसीएआर के वैज्ञानिक और कृषि मंत्रालय की टीम शामिल हैं। पहले दिन विषयगत समूह चर्चाओं के तीन दौर होंगे जिनमें आत्मनिर्भरता और विविधीकरण, स्थिरता व जलवायु-अनुकूल कृषि, और डिजिटल कृषि, बुनियादी ढांचा, वित्तपोषण व जोखिम प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल हैं। दूसरे दिन 29 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श होगा जिसमें रबी मौसम के लिए मौसम पूर्वानुमान, उर्वरक उपलब्धता, डिजिटल कृषि मिशन, किसान रजिस्ट्री, दलहन और खाद्य तेल मिशन, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, विपणन सुधार और एटीएमए-केवीके के जरिए योजनाएं तैयार करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समापन सत्र में विचार-विमर्श का सार प्रस्तुत करते हुए रबी फसलों का उत्पादन बढ़ाने, किसानों को सशक्त बनाने और ‘आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत’ के विजन को साकार करने के लिए एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इस सम्मेलन में राज्यों के कृषि मंत्रियों को अपने विचार एवं अनुभव, राज्य की प्राथमिकताएं तथा कृषि विकास और रबी मौसम की तैयारियों से संबंधित सुझाव साझा करने का अवसर प्राप्त होगा। राज्यों से प्राप्त सुझावों तथा विषयगत चर्चाओं के निष्कर्षों से रबी अभियान 2026 के लिए एक समन्वित एवं परिणाम उन्मुख रणनीति तैयार करने में योगदान मिलने की उम्मीद है।

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »