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पूर्ण रूप से संचालित डीएफसी और जीसीटी के विस्तार से माल ढुलाई में तेज़ वृद्धि; वर्ष 2014-15 के 1,098 मिलियन टन से बढ़कर 2025-26 में 1,670 मिलियन टन हुई

भारतीय रेल टर्मिनल विकास, वैगन निवेश योजनाओं, रैपिड कार्गो सेवाओं और बेहतर फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी के माध्यम से माल ढुलाई तंत्र को सशक्त बना रही है


रेल मंत्रालय ने बताया है कि माल परिवहन, क्षेत्रीय संपर्क और रेल की माल ढुलाई हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय रेल ने बहुआयामी रणनीति अपनाई है। इसके अंतर्गत माल ढुलाई की दक्षता बढ़ाने, निर्बाध क्षेत्रीय संपर्क सुनिश्चित करने तथा फर्स्ट और लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई पहल की गई हैं। प्रमुख पहलों को नीचे वर्गीकृत किया गया है –

टर्मिनल विकास- भारतीय रेल ने माल टर्मिनलों की क्षमता बढ़ाने के लिए दोहरी रणनीति अपनाई है। इसके अंतर्गत गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (जीसीटी) नीति के माध्यम से आधुनिक निजी माल टर्मिनलों को बढ़ावा दिया जा रहा है और रेलवे के स्वामित्व वाले माल शेड का उन्नयन किया जा रहा है।

निजी निवेश के माध्यम से माल ढुलाई टर्मिनलों की स्थापना को बढ़ावा देने के लिए ‘गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल (जीसीटी)’ नीति शुरू की गई है। जीसीटी के स्थान को उद्योगों की मांग, संभावित माल यातायात, उपलब्ध रेल अवसंरचना और संबंधित क्षेत्र की समग्र लॉजिस्टिक्स क्षमता के आधार पर तय किया जाता है।

अब तक 142 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल चालू किए जा चुके हैं। इनकी अनुमानित माल ढुलाई क्षमता 224 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष है। इन टर्मिनलों के माध्यम से लगभग 10 हजार करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित हुआ है। वर्ष 2025-26 में इन टर्मिनलों से 146 मिलियन टन माल की ढुलाई की गई।

वैगन निवेश योजनाएं: भारतीय रेल ने निजी क्षेत्र को वैगनों में निवेश के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की हैं। इनमें सीमेंट, तेल, इस्पात और फ्लाई ऐश जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए विशेष वैगनों की व्यवस्था भी शामिल है। अब तक लगभग 275 विशेष प्रयोजन रेक और 397 सामान्य प्रयोजन रेक परिचालन में हैं। इससे सीमेंट, फ्लाई ऐश, इस्पात उत्पाद, लौह अयस्क और कोयले जैसी वस्तुओं के रेल परिवहन में हिस्सेदारी बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल परिवहन के लिए भी एक अलग योजना लागू है। इसके अंतर्गत उद्योगों के स्वामित्व वाले लगभग 54 रेक परिचालन में हैं।

संयुक्त पार्सल उत्पाद-रैपिड कार्गो सेवा (जेपीपी-आरसीएस) योजना के अंतर्गत ग्राहकों को आवश्यकता आधारित लॉजिस्टिक्स और डोर-टू-डोर पार्सल सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इस योजना में वर्चुअल एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी दी गई है।

रेल मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम कॉनकॉर दिल्ली-कोलकाता और मुंबई-कोलकाता मार्गों पर जेपीपी-आरसीएस के अंतर्गत डोर-टू-डोर पार्सल सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। सोनिक गुड्स शेड में भी पायलट परियोजना के रूप में ऐसी ही सेवा शुरू की गई है।

बजट आवंटन और रेल नेटवर्क का विस्तार: पिछले 12 वर्षों में भारतीय रेल ने रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किया है। इस दौरान देशभर में नई रेल लाइनों के निर्माण और चालू की गई परियोजनाओं का विवरण इस प्रकार है।

अवधिनया ट्रैक शुरू किया गयानए ट्रैकों की औसत कमीशनिंग
2009-147,599 किलोमीटर4.2 किलोमीटर /दिन
2014-2636,429 किलोमीटर8.32    किलोमीटर /दिन (लगभग 2 बार

1 अप्रैल 2026 तक भारतीय रेल में कुल 514 रेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें 169 नई रेल लाइन, 29 गेज परिवर्तन और 316 दोहरीकरण परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई लगभग 40 हजार किलोमीटर है और इन पर अनुमानित 8 लाख 31 हजार करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है।

वर्गपरियोजनाओं की संख्याकुल लंबाई एनएल/जीसी/डीएल (किलोमीटर)मार्च 2026 तक शुरू की गई लंबाई (किलोमीटर) मार्च 2026 तक का कुल व्यय(करोड़ रुपये में) 
नई लाइनें16916,6343,3611,57,572
गेज रूपांतरण293,9873,04524,227
दोहरीकरण31619,3796,1771,23,454
कुल51440,00012,5833,05,253

समर्पित माल गलियारे (डीएफसी): रेल मंत्रालय ने दो समर्पित माल गलियारों का निर्माण किया है। इनमें पूर्वी समर्पित माल गलियारा (ईडीएफसी) लुधियाना से सोननगर तक 1,337 किलोमीटर तथा पश्चिमी समर्पित माल गलियारा (डब्ल्यूडीएफसी) दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट टर्मिनल (जेएनपीटी) तक 1,506 किलोमीटर लंबा है। दोनों समर्पित माल गलियारे पूरी तरह चालू हो चुके हैं।

इन गलियारों पर प्रतिदिन औसतन 443 मालगाड़ियों का संचालन किया जा रहा है। समर्पित माल गलियारा के शुरू होने से माल ढुलाई की मात्रा में लगातार वृद्धि हुई है। इसके साथ ही ट्रेनों की औसत गति बढ़ी है, परिचालन में लगने वाला समय कम हुआ है और सेवाओं की विश्वसनीयता बेहतर हुई है। माल यातायात को डीएफसी पर स्थानांतरित किए जाने से पारंपरिक रेल नेटवर्क पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हुई है। इससे भारतीय रेल को अधिक मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें चलाने में मदद मिली है।

समर्पित माल गलियारा – डीएफसी परियोजना से परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को भी लाभ मिलेगा। इसके माध्यम से डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनों, अधिक एक्सल लोड वाली मालगाड़ियों का संचालन आसान होगा, पश्चिमी बंदरगाहों से उत्तर भारत तक तेज़ पहुंच सुनिश्चित होगी और डीएफसी मार्ग के साथ नए माल टर्मिनलों तथा उद्योगों से बेहतर संपर्क विकसित होगा।

केंद्रीय बजट 2026 में डंकुनी से सूरत तक नए समर्पित माल गलियारे की घोषणा की गई है। इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार और अद्यतन करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

रेल मंत्रालय ने बताया कि इन पहलों के परिणामस्वरूप पिछले कुछ वर्षों में माल ढुलाई और राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 से भारतीय रेल की माल ढुलाई का विवरण इस प्रकार है :

वर्षमाल लदान (मिलियन टन में)
2014-151098
2015-161104
2016-171109
2017-181162
2018-191223
2019-201210
2020-211233
2021-221418
2022-231512
2023-241591
2024-251617
2025-261670

वर्ष 2025-26 में भारतीय रेल की माल ढुलाई बढ़कर 1,670 मिलियन टन हो गई। इसके साथ भारतीय रेल दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी माल ढुलाई करने वाली रेलवे बन गई है।

यह जानकारी रेल, सूचना और प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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