त्रिनेत्र और पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स ने एआई-आधारित तीर्थयात्री सुरक्षा तथा डेटा-आधारित ग्रामीण शासन की झलक प्रस्तुत की
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने 23 अक्टूबर, 2026 को 22वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस वेबिनार (एनईजीडब्ल्यू) का आयोजन किया। वेबिनार की अध्यक्षता डीएआरपीजी के संयुक्त सचिव श्री अवनीश कुमार मिश्रा ने की। इसमें केन्द्र सरकार के मंत्रालयों, राज्य सरकारों, जिलों, स्थानीय निकायों तथा मंदिरों और धार्मिक स्थलों के प्रबंधन निकायों के अधिकारियों ने भाग लिया और प्रौद्योगिकी-सक्षम शासन के लिए अपनाए जा रहे विभिन्न तरीकों को साझा किया।
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वेबिनार में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के अंतर्गत स्वर्ण पुरस्कार से सम्मानित दो पहलों को प्रदर्शित किया गया। इनमें मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर सहित महाकाल रुद्रसागर एकीकृत विकास क्षेत्र (एमआरआईडीए) के लिए त्रिनेत्र – एआई-आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली तथा पंचायती राज मंत्रालय के नेतृत्व में संचालित पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) – विकसित भारत के लिए डेटा-आधारित शासन शामिल हैं। इन पहलों ने प्रदर्शित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित निगरानी और डेटा विश्लेषण किस प्रकार सार्वजनिक सुरक्षा, प्रदर्शन की निगरानी तथा साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण में सहायक हो सकते हैं।
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस वेबिनार श्रृंखला पुरस्कार विजेता ई-गवर्नेंस पहलों के प्रसार तथा उन्हें अपनाने और दोहराने योग्य बनाने में सहायता प्रदान करने के लिए एक मंच उपलब्ध कराती है। यह विशेष रूप से राज्य, जिला और स्थानीय निकाय स्तरों पर इन पहलों को अपनाने और लागू करने को प्रोत्साहित करती है।
त्रिनेत्र– एआई-आधारित वीडियो निगरानी प्रणाली
श्री महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन के प्रशासक श्री प्रथम कौशिक (आईएएस) ने त्रिनेत्र पहल प्रस्तुत की, जिसे उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड और श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के सहयोग से महाकाल रुद्रसागर एकीकृत विकास क्षेत्र के लिए लागू किया गया है। यह पहल श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के निगरानी मॉडल को अनुकूलित और विस्तारित करती है, ताकि महाकालेश्वर मंदिर और आसपास के क्षेत्र में तीर्थयात्रियों की संख्या में हुई उल्लेखनीय वृद्धि से उत्पन्न आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके।
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त्रिनेत्र के अंतर्गत एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केन्द्र के माध्यम से 450 से अधिक एआई-सक्षम कैमरे, वीडियो विश्लेषण, चेहरे की पहचान और भीड़ की स्थिति की पूर्वानुमान-आधारित निगरानी तैनात की गई है। यह प्रणाली वास्तविक समय में निगरानी, भीड़ के आवागमन का प्रबंधन तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया के समन्वय में सहायता करती है। परियोजना विवरण के अनुसार, आपातकालीन प्रतिक्रिया का समय 15–20 मिनट से घटकर पाँच मिनट से भी कम हो गया है। इसमें लापता व्यक्तियों से संबंधित 552 मामलों के समाधान, खोई हुई 53 वस्तुओं की बरामदगी, चोरी की 10 घटनाओं को रोकने तथा पुलिस के सात मामलों में वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराने का भी उल्लेख है।
यह पहल तीर्थयात्रियों की सुरक्षा में सुधार और अधिक संख्या में लोगों की आवाजाही वाले धार्मिक स्थलों तथा सार्वजनिक जनसमूह वाले स्थानों के प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी-सक्षम मॉडल प्रस्तुत करती है। साथ ही, यह भविष्य में इस मॉडल को अन्य स्थानों पर दोहराने और व्यापक स्तर पर लागू करने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।
पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स – विकसित भारत के लिए डेटा-आधारित शासन
एनआईसी की वरिष्ठ निदेशक (आईटी) श्रीमती सुनीता जैन ने पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) प्रस्तुत किया। यह पंचायती राज मंत्रालय का एक डेटा-आधारित ढाँचा है, जिसके माध्यम से नौ स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्य (एलएसडीजी) विषयों के अंतर्गत ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन किया जाता है। पीएआई विकास संबंधी परिणामों का मूल्यांकन करने और हस्तक्षेप के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने हेतु मानकीकृत संकेतकों, एकीकृत डेटा, सत्यापन प्रक्रियाओं, विश्लेषणात्मक डैशबोर्ड और पंचायत स्कोरकार्ड का उपयोग करता है।
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पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (पीएआई) पर प्रस्तुति में नौ विकास विषयों के अंतर्गत डेटा-आधारित ग्रामीण शासन में इसकी भूमिका को उजागर किया गया। इसमें कमियों की पहचान करने और लक्षित कार्रवाई का मार्गदर्शन करने के लिए 150 संकेतकों और 230 डेटा बिंदुओं का उपयोग किया जाता है। यह ग्राम, ब्लॉक, जिला, राज्य और केन्द्र स्तरों पर अधिकारियों को प्राथमिकताएँ निर्धारित करने, जिम्मेदारियाँ सौंपने और प्रगति की निगरानी करने में सक्षम बनाता है। केवल रैंकिंग तक सीमित रहने के बजाय, विकास संबंधी रिपोर्ट कार्ड के रूप में तैयार पीएआई पोर्टल में लगभग 2.6 लाख ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यह साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण तथा अधिक लक्षित और सतत ग्रामीण विकास को बढ़ावा देता है।
वेबिनार में इस बात पर जोर किया गया कि दोनों पहलें शासन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी और डेटा का उपयोग किस प्रकार करती हैं। एक ओर, ये किसी प्रमुख तीर्थस्थल पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सुदृढ़ करती हैं, वहीं दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर पारदर्शी, मापनीय और साक्ष्य-आधारित विकास को बढ़ावा देती हैं। इस सत्र में 360 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया।
सत्र का समापन वक्ताओं के बहुमूल्य योगदान तथा अधिकारियों और हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए किया गया। प्रतिभागियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में प्रस्तुत दृष्टिकोणों को अपनाने और उनका अनुकरण करने की संभावनाओं पर विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।






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