LIVE

प्रधानमंत्री जन धन योजना ने देश के वित्तीय समावेशन परिदृश्य को बदलने के 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं


59.09 करोड़ पीएमजेडीवाई खाते खोले गए जिनमें 3.17 लाख करोड़ रुपए जमा किए गए

इनमें से 56 प्रतिशत खाताधारक महिलाएं हैं और 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण और उप-नगरीय क्षेत्रों में हैं

देश भर में डिजिटल भुगतान और वित्तीय सुरक्षा तक पहुंच को बढ़ाते हुए 41 करोड़ से अधिक रुपे कार्ड जारी किए गए

जेएएम ट्रिनिटी वंचितों को कल्याणकारी लाभों की सीधी, पारदर्शी और हेराफेरी-रहित डिलीवरी सुनिश्चित करती है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 28 अगस्त, 2014 को अपने पहले कार्यक्रमों में से एक के रूप में शुरू की गई प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) ने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। प्रधानमंत्री जन धन योजना के इन 12 वर्षों में देश के वित्तीय परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव आया है। यह योजना विश्व स्तर पर वित्तीय समावेशन की दिशा में एक मिसाल बन गई है। विश्व की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल के रूप में प्रधानमंत्री जन धन योजना सभी भारतीयों के लिए बैंकिंग तक पहुंच को लगातार नया रूप दे रही है।

वित्तीय समावेशन का विस्तार

वित्त मंत्रालय सशक्त वित्तीय समावेशन योजनाओं और प्रयासों के माध्यम से हाशिए पर पड़े और आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री जन धन योजना यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक बैंकिंग सुविधा से वंचित व्‍यक्तियों को बैंक खाता मिले—जिसमें न्यूनतम शेष राशि की कोई आवश्यकता नहीं है और कोई रखरखाव शुल्क नहीं है।

प्रत्येक खाते के साथ एक निःशुल्क रुपे डेबिट कार्ड मिलता है, जिसमें 2 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर शामिल है, जो डिजिटल लेनदेन और वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देता है। खाताधारकों को 10,000 रुपए तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा भी मिलती है, जो आपातस्थिति में सुरक्षा प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना खातों ने जन सुरक्षा योजनाओं, जैसे पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना और पीएम सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के लाखों श्रमिकों को जीवन और दुर्घटना बीमा प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने कहा कि 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन का उद्घाटन किया था, जिसे प्रधानमंत्री जन धन योजना के नाम से जाना जाता है। आज मुझे खुशी है कि प्रधानमंत्री जन धन योजना  अपनी 12वीं वर्षगांठ मना रही है। हमें प्रधानमंत्री जन धन योजना को केवल 59 करोड़ से अधिक खाते खोलने, 3.17 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि प्राप्त करने या 41.29 करोड़ निःशुल्क रुपे कार्ड जारी करने के संदर्भ में नहीं देखना चाहिए, बल्कि देश के बैंकिंग और वित्तीय परिदृश्य में इसके परिवर्तन के संदर्भ में देखना चाहिए, जहां समाज के अंतिम व्यक्ति – सबसे गरीब व्यक्ति – तक वित्तीय सेवाओं की पहुंच बिना किसी देरी या बिचौलियों की भागीदारी के संभव हो पाई है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना योजना के अंतर्गत 78 प्रतिशत खाते ग्रामीण या उप-नगरीय क्षेत्रों में खोले गए हैं, और लगभग 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के स्वामित्व में हैं, जो इस योजना की प्राथमिकता को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य देश के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले वंचितों को औपचारिक वित्तीय क्षेत्र में लाना था।

प्रधानमंत्री जन धन योजना ने लाखों लोगों, विशेषकर वंचित वर्गों को, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच प्रदान करके उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में मदद की है। खाता स्वामित्व ने आम आदमी को बीमा और पेंशन कवरेज प्राप्त करने में सक्षम बनाया है। प्रत्येक राज्य और जिले में निरंतर चलाए गए व्यापक अभियान के माध्यम से, हमने बैंक खातों के लगभग सार्वभौमिक कवरेज की ओर कदम बढ़ाया है और बीमा और पेंशन योजनाओं की पहुंच उन लोगों तक लगातार बढ़ाई है जिन्हें इनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

12वीं वर्षगांठ के अवसर पर, मैं प्रधानमंत्री जन धन योजना योजना को आम आदमी तक पहुंचाने और इसे एक बड़ी सफलता बनाने में देश भर में तैनात बैंकरों और बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स के प्रयासों की सराहना करता हूं।

जैम ट्रिनिटी: एक गेम-चेंजर

जन-धन-आधार-मोबाइल (जेएएम) की तिकड़ी, जिसके केंद्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना है, वित्तीय सहायता के सीधे वितरण के लिए एक त्रुटिरहित तंत्र साबित हुई है। जेएएम के माध्यम से, सरकार ने वंचितों के बैंक खातों में सीधे कल्याणकारी लाभ हस्तांतरित करके बिचौलियों और देरी को समाप्त कर दिया है।

महत्वपूर्ण उपलब्धियां और सफलताएं:

क. प्रधानमंत्री जन धन योजना खाते: 59.09 करोड़ (दिनांक 19 अगस्त 2026 तक)

19 अगस्त 2026 तक, प्रधानमंत्री जन धन योजना खातों की कुल संख्या 59.09 करोड़ है; जन धन खाताधारकों में से 55.7 प्रतिशत (32.92 करोड़) महिलाएं हैं, और जन धन खातों में से 77.8 प्रतिशत (45.95 करोड़) ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हैं।

ख. पीएमजेडीवाई खातों के अंतर्गत जमा राशि –3.17 लाख करोड़ रुपए (दिनांक 19 अगस्त 2026 तक)

प्रधानमंत्री जन धन योजना खातों के अंतर्गत कुल जमा राशि 3,16,514 करोड़ रुपए है। पिछले 12 वर्षों (अगस्त ’26/अगस्त ’15) में जमा राशि लगभग 12.8 गुना बढ़ी है, जबकि खातों की संख्या 2.3 गुना बढ़ी है।

ग. प्रति प्रधानमंत्री जन धन योजना खाते में औसत जमा राशि – 5,356 रुपए (दिनांक 19 अगस्त 2026 तक)

19 अगस्‍त, 2026 तक प्रति खाता औसत जमा राशि 5,356 रुपए है। पिछले 12 वर्षों (अगस्त 2026/अगस्त 2015) में प्रति खाता औसत जमा राशि में 3.4 गुना वृद्धि हुई है। औसत जमा राशि में यह वृद्धि खातों के बढ़ते उपयोग और खाताधारकों के बीच बचत की आदत विकसित होने का एक और संकेत है।

घ. पीएमजेडीवाई खाताधारकों को 41.29 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए गए (19 अगस्त 2026 तक)

प्रधानमंत्री जन धन योजना खाताधारकों को 41.29 करोड़ रुपे कार्ड जारी किए गए हैं। रुपे कार्डों की संख्या और उपयोग में समय के साथ वृद्धि हुई है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना की सफलता का श्रेय इसके मिशन-आधारित दृष्टिकोण, नियामक समर्थन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए आधार जैसे डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के एकीकरण को जाता है। यह वित्तीय समावेशन की दिशा में पहला कदम बना हुआ है, और औपचारिक वित्त से वंचित लोगों के लिए बचत और ऋण तक पहुंच को सक्षम बनाकर आगे की प्रगति हासिल की जा रही है। बचत के स्पष्ट रुझान के साथ, खाताधारक अब मुद्रा ऋण सहित ऋणों के लिए पात्र हैं, जिससे व्यक्तियों को अपनी आय बढ़ाने और वित्तीय रूप से मजबूत बनने में मदद मिलती है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना अपने 13वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और समावेशी विकास, डिजिटल नवाचार और आर्थिक सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बना हुआ है। इसकी निरंतर सफलता देश की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि वित्तीय समृद्धि की राह में कोई भी नागरिक पीछे न छूटे।  

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »