पिछले तीन वित्तीय वर्षों के दौरान जन औषधि केंद्रों (JAKs) के रूप में काम कर रही प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के माध्यम से बेची गई दवाओं की साल-दर-साल मात्रा संलग्नक – क में दिखाई गई है।
PMBJK के तौर पर काम करने वाली PACS की संख्या में साल-दर-साल हुई बढ़ोतरी को संलग्नक – ख में दिखाया गया है।
आकांक्षी ज़िलों, दूर-दराज़ के ग्रामीण इलाकों, पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी क्षेत्रों और द्वीपीय इलाकों में PACS-आधारित जन औषधि केंद्रों को प्राथमिकता देने के लिए, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर (कंप्यूटर, प्रिंटर, इंटरनेट के लिए ₹0.50 लाख) और फ़र्नीचर/फ़िक्स्चर (₹1.50 लाख) के खर्च की भरपाई के तौर पर ₹2.00 लाख का एकमुश्त विशेष अनुदान दिया जाता है। यह ₹2.00 लाख का अनुदान उन उद्यमियों को भी मिलता है जो महिलाएँ, SC/ST, दिव्यांगजन या पूर्व सैनिक हैं। जन औषधि केंद्र के मालिकों को मासिक खरीद का 20% (अधिकतम ₹20,000 प्रति माह तक) सामान्य प्रोत्साहन मिलता है, जो 200 ज़्यादा मांग वाली दवाइयों का स्टॉक रखने की शर्त से जुड़ा होता है। जन औषधि केंद्र चलाने वाले PACS भी प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के तहत अन्य जन औषधि केंद्रों की तरह ही फ़ायदों के हकदार हैं। इनमें अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर 30% ट्रेड मार्जिन और मौजूदा PMBJP दिशानिर्देशों के अनुसार दवाइयों की खरीद और स्टॉक रखने की ज़रूरतों को पूरा करने पर प्रोत्साहन शामिल हैं। ऐसे PACS सालाना औसतन ₹35,000 से ज़्यादा की कमाई कर सकते हैं। साथ ही, महिलाओं को विशेष सुविधाएँ दी जा रही हैं; इसके तहत जन औषधि केंद्रों के ज़रिए ₹1 प्रति पैड की दर से ‘जन औषधि सुविधा’ सैनिटरी नैपकिन (मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के लिए) उपलब्ध कराए जाते हैं।
संलग्नक क
| क्रम संख्या | वित्तीय वर्ष | MRP मूल्य पर बिक्री (करोड़ रुपये में) |
| 1. | 2023-24 | 1.44 |
| 2. | 2024-24 | 6.75 |
| 3. | 2025-26 | 9.94 |
संलग्नक ख
| क्रम सं. | वित्तीय वर्ष | खोले गए जन औषधि केंद्रों(जेएके) की संख्या | संचयी रूप से खोले गएजेएके की संख्या |
| 1. | 2023-24 | 454 | 454 |
| 2. | 2024-25 | 276 | 730 |
| 3. | 2025-26 | 106 | 836 |
यह जानकारी केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
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