इस वेबिनार में राष्ट्रीय स्तर के दर्शकों के सामने मेहसाणा ज़िले की ‘परियोजना पाठ’ पहल पर प्रस्तुतियां दी गईं। गुजरात सरकार के समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक श्री एम. नागराजन ने इस पहल के बारे में जानकारी दी, मेहसाणा ज़िले के कलेक्टर और ज़िला मजिस्ट्रेट श्री एस. के. प्रजापति ने इसकी निरंतरता की चर्चा की और शिक्षा विभाग के ज़िला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी डॉ. शरद के. त्रिवेदी ने इसके विस्तार और अन्य स्थानों पर इनका अनुकरण करने के बारे में बताया
40वां राष्ट्रीय सुशासन वेबिनार 25 सितंबर 2026 को आयोजित किया गया था। इसमें ‘पीएमए के तहत पुरस्कृत पहलों की निरंतरता और उनका अनुकरण विषय पर ‘परियोजना पाठ’ की पहल को प्रस्तुत किया गया, जिसे ‘लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए पीएम पुरस्कार, 2022 मिला था।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अप्रैल 2022 में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) को निर्देश दिया था कि वे जिला कलेक्टरों और अन्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल कॉन्फ्रेंस/वेबिनार आयोजित करें। इन वेबिनार में ‘लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए पीएम पुरस्कार (पीएमए)’ पाने वाले पिछले विजेताओं को अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया जाए, ताकि इन पहलों का अधिक से अधिक प्रसार हो सके और अन्य स्थानों पर इनका अनुकरण भी किया जा सके।
तब से 39 वेबिनार आयोजित किए जा चुके हैं। प्रत्येक वेबिनार में लाइन विभागों, राज्य सरकारों, जिला कलेक्टरों, राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के लगभग 1000 अधिकारी शामिल होते हैं।
आज की प्रस्तुतियों में ये शामिल थे:
(i) गुजरात में समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक श्री एम. नागराजन द्वारा पुरस्कृत पहल की प्रस्तुति:
श्री एम. नागराजन ने ‘परियोजना पाठ’ प्रस्तुत की। यह पहल बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मकता (एफएलएन) के लिए थी और इसे मेहसाणा जिले के सभी 994 प्राथमिक स्कूलों में लागू किया गया था। एफएलएन कार्य बल ने सीखने के दौरान पाई गई कमियों के आधार पर शिक्षक गाइड, मूल्यांकन सीढ़ी (असेसमेंट लैडर) और गुजराती तथा गणित की वर्कशीट तैयार कीं। बाद में जीसीईआरटी ने इस सामग्री की समीक्षा की और इसे दीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध कराया।
(ii) मेहसाणा के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट श्री एस. के. प्रजापति द्वारा पहल के निरंतरता पहलुओं की प्रस्तुति:
श्री एस. के. प्रजापति ने पुरस्कार अवधि के बाद भी पाठ दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देने पर जोर दिया। इसके लिए शिक्षकों और शिक्षा अधिकारियों का नियमित ओरिएंटेशन, निगरानी, समीक्षा और मार्गदर्शन (हैंडहोल्डिंग) किया गया। उन्होंने इस पहल के एफएलएन से ग्रेड-उपयुक्त शिक्षण (जीएएल) तक की यात्रा के बारे में भी बताया। इसमें शिक्षण सामग्री का निरंतर उपयोग, स्कूल-स्तर पर डेटा विश्लेषण और बाद की शैक्षिक पहलों के साथ एकीकरण शामिल था।

(iii) मेहसाणा के शिक्षा विभाग में ज़िला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी, डॉ. शरद के. त्रिवेदी द्वारा इस पहल के मुख्य पहलुओं का अनुकरण करने तथा इसे और आगे बढ़ाने पर प्रस्तुति:
डॉ. शरद के. त्रिवेदी ने पाठ मॉडल के विस्तार पर ज़ोर दिया। इसके तहत दूसरे ज़िलों को प्रशिक्षण और मदद दी गई तथा इसके एफएलएन शिक्षक गाइड, वर्कशीट और इंस्ट्रक्शनल वीडियो को जीसीईआरटी तथा दीक्षा के ज़रिए फैलाया गया। बाद में, मेहसाणा मॉडल और इसके लर्निंग मटीरियल को ‘निपुण गुजरात’ के तहत राज्य स्तर पर अपनाया गया, जिसमें राज्य-स्तरीय ट्रैकर, ‘कदम’ और ‘पगला’ लर्निंग रिसोर्स शामिल हैं।
इस वेबिनार की अध्यक्षता डीएआरपीजी के अपर सचिव श्री पुनीत यादव ने की और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इसमें शामिल हुए। इस वेबिनार में पूरे भारत से 900 से अधिक स्थानों से लोग जुड़े, जिनमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक सुधार विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, ज़िला कलेक्टर, राज्य और ज़िला फील्ड अधिकारी तथा केंद्र एवं राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारी शामिल थे।
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