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माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण पर एनसीसीआर अध्ययन

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर) के माध्यम से तूतुकुडी और मन्नार की खाड़ी सहित भारतीय तट के चुनिंदा स्थानों पर माइक्रोप्लास्टिक, मेसोप्लास्टिक, मैक्रोप्लास्टिक और समुद्री कचरे पर नजर रखता है। अध्ययनों से पता चलता है कि सिंथेटिक फिलामेंट्स माइक्रोप्लास्टिक के प्रमुख प्रकार हैं, जबकि नदी का पानी और छोड़े, खोए या फेंके हुए मछली पकड़ने के उपकरण (एएलडीएफजी) माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं।

तटीय पर्यावरण में उपलब्ध माइक्रोप्लास्टिक और मैक्रोप्लास्टिक की मात्रा के आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय तटीय नियंत्रण समिति (एनसीसीआर) ने क्लीन कोस्ट सूचकांक (सीसीआई) विकसित किया है। सीसीआई आकलन के अनुसार तूतुकुडी तट और मन्नार की खाड़ी को ‘ठीक-ठाक स्वच्छ’ श्रेणी में रखा गया है। मन्नार की खाड़ी और तूतुकुडी तट के किनारे तलछट में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा 28 से 60 कण/50 ग्राम के बीच पाई गई है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस क्षेत्र में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण के कोई बड़े केंद्र नहीं पाए गए हैं।

राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र (एनसीसीआर) भारतीय तट के किनारे समुद्री कचरे और माइक्रोप्लास्टिक की वैज्ञानिक निगरानी और मूल्यांकन करता है और नीति निर्माण और प्रबंधन के लिए संबंधित मंत्रालयों और हितधारकों को वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराता है।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए कई नीतिगत उपाय किए हैं, जिनमें 1 जुलाई 2022 से कम उपयोगिता और अधिक कूड़ा फैलाने की क्षमता वाले चिन्हित सिंगल यूज़ प्लास्टिक (एसयूपी) वस्तुओं पर प्रतिबंध शामिल है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022 को भी अधिसूचित किया है, जिसमें प्लास्टिक पैकेजिंग के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) दिशा-निर्देश पेश किए गए हैं। ये दिशा-निर्देश कठोर प्लास्टिक पैकेजिंग के संग्रह, पुनर्चक्रण, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रित प्लास्टिक सामग्री के उपयोग के लिए अनिवार्य लक्ष्य निर्धारित करते हैं, जिससे प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा मिलता है और प्लास्टिक पदचिह्न कम होता है। वर्ष 2022 से अब तक ईपीआर ढांचे के तहत लगभग 232 लाख टन प्लास्टिक पैकेजिंग कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।

राष्ट्रीय समुद्री कचरा नीति का मसौदा तैयार कर लिया गया है और परामर्श के लिए इसे पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ साझा किया गया है।

पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह जानकारी आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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