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“खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाएं; युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनना चाहिए”: श्री चिराग पासवान

कुंडली स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान के सातवें दीक्षांत समारोह में 260 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं; 8 मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया

भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता ‘ब्रांड इंडिया’ की वैश्विक प्रतिष्ठा से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है: श्री चिराग पासवान

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने आज कहा कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और इसमें रोजगार सृजन, उद्यमिता को बढ़ावा देने, किसानों की आय में वृद्धि करने और भारत की वैश्विक उपस्थिति को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाने की क्षमता है। श्री पासवान केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हैं, जबकि श्री अविनाश जोशी मंत्रालय के सचिव हैं।

कुंडली स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम-के) के सातवें दीक्षांत समारोह में बोलते हुए, श्री पासवान ने उत्तीर्ण छात्रों से केवल नौकरी मांगने तक सीमित न रहने, बल्कि नौकरी देने वाले, नवोन्मेषक और समाधान प्रदाता बनने का आह्वान किया। ‘एनआईएफटीईएम-के’ के आधिकारिक पोर्टल पर भी 2026 के इस आयोजन को इसका 7वां दीक्षांत समारोह बताया गया है।

उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हुई प्रगति के बावजूद, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं जिनका दोहन किया जाना बाकी है। यह क्षेत्र बेहतर खाद्य गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन, किसानों के लिए बेहतर आर्थिक अवसर, रोजगार सृजन और खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करने में एक साथ योगदान दे सकता है।

श्री पासवान ने कहा कि भारत का विशाल कृषि आधार, उत्पादों की विविधता और बड़ा उपभोक्ता बाजार देश को एक “ग्लोबल फूड बास्केट” के रूप में उभरने की शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं, प्रसंस्करण सुविधाओं व प्रौद्योगिकी को खेतों और ग्रामीण क्षेत्रों के करीब ले जाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि खाद्य प्रसंस्करण के लाभ जमीनी स्तर पर उत्पादकों तक पहुंच सकें।

उन्होंने छात्रों से लीक से हटकर सोचने का आह्वान किया और उभरती हुई चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए प्रौद्योगिकी, नवाचार और उद्यमिता का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने युवा नवोन्मेषकों को आश्वस्त किया कि सरकार इस क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से नए विचारों और पहलों का समर्थन करेगी।

केंद्रीय मंत्री ने गुणवत्ता बनाए रखने की पुरज़ोर वकालत करते हुए यह भी कहा कि खाद्य क्षेत्र में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भारतीय उत्पाद की गुणवत्ता केवल एक कंपनी की प्रतिष्ठा को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि वैश्विक बाजारों में ‘ब्रांड इंडिया’ की साख को भी प्रभावित करती है।

खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री अविनाश जोशी ने खाद्य पदार्थों की बर्बादी को कम करने, पोषण और मूल्य संवर्धन बढ़ाने, आजीविका के अवसर पैदा करने और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने में खाद्य प्रसंस्करण की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कुशल मानव संसाधन के विकास और छात्रों तथा शोधकर्ताओं को ऐसे विचारों व नवाचारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया जो बड़े पैमाने पर मूल्य का सृजन कर सकें।

‘एनआईएफटीईएम-के’ के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन महापात्रा ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों द्वारा अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए ही नहीं, बल्कि देश और समाज की उन्नति के लिए भी होना चाहिए। ‘एनआईएफटीईएम-के’ ने आधिकारिक तौर पर डॉ. महापात्रा को अपने बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स के अध्यक्ष के रूप में सूचीबद्ध किया है।

उन्होंने ‘एनआईएफटीईएम-के’ के अनुसंधान, कुशल मानव संसाधन और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया, और ऐसे परिवर्तनकारी नवाचारों का आह्वान किया जो भारत को खाद्य प्रौद्योगिकी, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन, टिकाऊ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने में मदद कर सकें।

‘एनआईएफटीईएम-के’ के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने कहा कि संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान, बुनियादी ढांचे और उद्योग साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति की है। डॉ. ओबेरॉय वर्तमान में संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर निदेशक के रूप में सूचीबद्ध हैं।

दीक्षांत समारोह में कुल 260 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 140 बी.टेक., 78 एम.टेक., 18 एमबीए और 24 पीएच.डी. के छात्र शामिल थे। 8 मेधावी छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और समर्पण के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

डॉ. ओबेरॉय ने कहा कि ‘एनआईएफटीईएम-के’ का प्रयास छात्रों को केवल शैक्षणिक योग्यता प्रदान करना नहीं है, बल्कि उन्हें अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और उद्योग-उन्मुख शिक्षा से भी लैस करना है, जिससे वे खाद्य क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप बेहतर ढंग से काम कर सकें।

रिलायंस रिटेल लिमिटेड के अध्यक्ष (खाद्य एवं कृषि) डॉ. आर. एस. सोढ़ी ने कहा कि पेशेवरों के लिए भारत के खाद्य क्षेत्र में काम करने के लिहाज से यह सबसे उपयुक्त समय है। वर्तमान में वह रिलायंस रिटेल लिमिटेड में अध्यक्ष (खाद्य एवं कृषि) हैं।

डॉ. सोढ़ी ने खाद्य क्षेत्र को मंदी के प्रति अपेक्षाकृत सुदृढ़ क्षेत्र बताया, और कहा कि उपभोक्ता भले ही कई गैर-जरूरी चीज़ों की खरीदारी टाल दें, लेकिन खाद्य पदार्थों की जरूरत हमेशा बनी रहती है। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब से अधिक की आबादी और बदलती उपभोग आदतों के साथ, भारत खाद्य मूल्य संवर्धन इकोसिस्टम में प्रचुर अवसर प्रदान करता है।

बिकाजी फूड्स इंटरनेशनल लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री दीपक अग्रवाल ने स्नातक छात्रों को खाद्य उद्योग में उभरते अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें इस क्षेत्र का भविष्य बताया। बिकाजी की आधिकारिक कॉर्पोरेट जानकारी के अनुसार श्री अग्रवाल, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक हैं।

वक्ताओं ने सामूहिक रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि कुंडली स्थित राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान की भूमिका केवल शिक्षा प्रदान करने तक ही सीमित नहीं है। अनुसंधान, उद्योग, उद्यमिता और सरकार को जोड़ने वाले एक संस्थान के रूप में, इसमें भारत के खाद्य प्रसंस्करण इकोसिस्टम को मजबूत करने और नवोन्मेषकों, पेशेवरों तथा उद्यमियों की अगली पीढ़ी को तैयार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है।

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