केवीआईसी के अध्यक्ष ने कहा, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप लिज्जत पापड़ महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और ‘लोकल टू ग्लोबल’ (स्थानीय से वैश्विक) के एक प्रेरक उदाहरण के रूप में उभरा है
भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत आने वाले खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन श्री मनोज गोयल ने बुधवार को मुंबई के सायन (पूर्व) स्थित श्री षणमुखानंद चंद्रशेखरेंद्र सरस्वती ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़’ की महिला कारीगरों को संबोधित किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेते हुए केवीआईसी के अध्यक्ष ने महिला कारीगरों के काम की सराहना की और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में लिज्जत पापड़ जैसे संगठनों द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

सभा को संबोधित करते हुए केवीआईसी के चेयरमैन श्री मनोज गोयल ने कहा कि लिज्जत पापड़ का सफर 15 मार्च 1959 को केवल सात महिलाओं और 80 रुपये के साथ शुरू हुआ था। यह केवल पापड़ बनाने की पहल नहीं थी, बल्कि आत्मनिर्भर बनने, सम्मान के साथ जीने और अपने पैरों पर खड़े होने का सपना था। 1966 में केवीआईसी द्वारा लिज्जत पापड़ को ‘ग्रामोद्योग’ के रूप में मान्यता मिलने से इस यात्रा को नई गति मिली। आज 16 राज्यों में फैली अपनी 83 शाखाओं के जरिए 45,000 से अधिक महिलाएं लिज्जत पापड़ से जुड़ी हुई हैं और आत्मनिर्भरता व आर्थिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ रही हैं। समय के साथ संगठन ने अपने उत्पादों की रेंज का विस्तार किया है। पापड़ के अलावा यह संगठन मसाले, आटा, डिटर्जेंट और लिक्विड सोप भी बनाता है। इसके उत्पाद अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण अफ्रीका सहित 30 से अधिक देशों में पहुंच चुके हैं।

केवीआईसी के अध्यक्ष ने कहा कि लिज्जत पापड़ की सबसे बड़ी ताकत इसकी गुणवत्ता, कड़ी मेहनत और अनुशासन है। उन्होंने कहा कि यह संगठन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए एक प्रेरक उदाहरण के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि लिज्जत सिर्फ पापड़ ही नहीं बनाती; यह सम्मान, आत्मविश्वास और अवसर को एक साथ पिरोती है।

श्री गोयल ने कहा कि लिज्जत पापड़ की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। इस संस्था को 2003 में ‘बेस्ट विलेज इंडस्ट्री अवॉर्ड’, 2005 में ‘ब्रांड इक्विटी अवॉर्ड’ और 2017 में ‘महिला विकास पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। कई अंतरराष्ट्रीय मंच और मीडिया संगठनों ने भी दुनिया के सामने लिज्जत पापड़ के प्रेरणादायक यात्रा को प्रदर्शित किया है।

खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) की गतिविधियों और पहलों पर प्रकाश डालते हुए केवीआईसी के चेयरमैन ने कहा कि देश भर में लगभग 5 लाख कारीगरों को रोजगार दिया जा रहा है, जिनमें से 80% महिलाएं हैं जो लगभग 3,000 खादी संस्थानों में काम कर रही हैं। पिछले 12 सालों में खादी कारीगरों के मेहनताने में 275 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र का उत्पादन बढ़कर लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि बिक्री 1.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। ग्राम उद्योग विकास योजना के तहत पिछले 12 वर्षों में 3.23 लाख से अधिक मशीनें और टूलकिट बांटी गई हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के तहत अब तक लगभग 11 लाख नए प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं, जिनमें 30,000 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी दी गई है और इससे लगभग 1 करोड़ लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
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