LIVE

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन किया


जयपुर देश का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहाँ वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के सभी विभागों और संबद्ध कार्यालयों को एक ही स्थान पर स्थापित किया गया है

श्री गोयल ने देशभर में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन सभी 46 संगठनों के कार्यालयों को एक ही स्थान पर स्थापित करने का आह्वान किया

कार्यालयों को एक ही स्थान पर स्थापित करने से निर्यात, निवेश और आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ कारोबार को सुगम बनाने के लिए वन-स्टॉप सेंटर विकसित किए जाएंगे

श्री पीयूष गोयल ने नागरिक-केंद्रित शासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि नागरिकों की सेवा करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने आज वर्चुअल माध्यम से जयपुर में वाणिज्य भवन और उद्योग भवन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा इसके संबद्ध एवं अधीनस्थ संगठनों के कार्यालयों को एक ही स्थान पर स्थापित करने की प्रक्रिया का शुभारंभ हुआ। जयपुर ऐसा करने वाला देश का पहला शहर और पहला राज्य राजधानी बन गया है, जहाँ इन सभी कार्यालयों को एक ही छत के नीचे लाया गया है।

इस पहल के लिए वाणिज्य विभाग और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) को बधाई देते हुए श्री गोयल ने कहा कि यह परियोजना देशभर में, विशेष रूप से प्रत्येक राज्य की राजधानी में, इस अवधारणा को लागू करने की दिशा में तेजी से कार्य करने की शुरुआत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ये केंद्र उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सहयोग प्रदान करने वाले प्रमुख केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे। साथ ही, निर्यात, निवेश और आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने से संबंधित गतिविधियों के लिए वन-स्टॉप सेंटर के रूप में काम करेंगे। ये केंद्र विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में व्यवसायों और उद्योगों की प्रगति में भी सहयोग प्रदान करेंगे।

इस पहल को संपूर्ण व्यवस्था की सामूहिक प्रतिबद्धता बनाने पर जोर देते हुए श्री गोयल ने सरकारी कार्यालयों, विभिन्न हितधारकों, राज्य सरकार के प्रतिनिधियों, निर्यातकों, आयातकों, निवेशकों और व्यवसायियों से सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशासनिक कार्यालयों को एक स्थान पर एकत्रित करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से सेवा वितरण प्रणाली में बदलाव लाना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना तथा कारोबार करने और देश के कानूनों का अनुपालन करने को अधिक सुगम बनाना भी होना चाहिए।

श्री पीयूष गोयल ने निर्देश दिया कि लाइसेंस एवं परमिट के लिए आवेदन, SCOMET अनुमोदन तथा अन्य सभी सेवाओं सहित समस्त प्रक्रियाओं को पूरी तरह ऑनलाइन किया जाना चाहिए। उन्होंने देशभर में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के क्षेत्रीय कार्यालयों  में पुराने डेटा और अभिलेखों के डिजिटलीकरण सहित आवश्यक डिजिटल प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए 31 मार्च 2027 की समय-सीमा निर्धारित की। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2027 से इन सेवाओं के लिए किसी भी व्यक्ति को किसी भी कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जहाँ भी मूल दस्तावेजों का फिजिकल वेरिफिकेशन आवश्यक हो, वहाँ दस्तावेजों के सत्यापन और उन्हें अपलोड करने की सुविधा के लिए एक छोटा काउंटर बनाया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर दस्तावेजों के सत्यापन और अपलोड की प्रक्रिया को एक साथ पूरा करने के लिए कार्यालयों के प्रवेश द्वार पर कंप्यूटर भी स्थापित किए जा सकते हैं। श्री गोयल ने सेल्फ-सर्टिफिकेशन को प्रोत्साहित करने और हितधारकों पर अधिक विश्वास जताने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को नागरिकों और व्यवसायों के प्रति अपना विश्वास प्रदर्शित करना चाहिए।

श्री गोयल ने प्रक्रियाओं, प्रारूपों और फॉर्म को सरल बनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने विभागों से संगठनात्मक सीमाओं और आपसी बाधाओं को दूर कर आपसी समन्वय एवं सामूहिक प्रयासों के साथ कार्य करने का आग्रह किया, ताकि व्यवसायों और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ एवं परिणाम प्रदान किए जा सकें। उन्होंने कहा कि इस पहल के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए दोनों विभागों तथा मंत्रालय के अधीन विभिन्न संगठनों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक होगा।

श्री गोयल ने जानकारी दी कि वर्तमान में मंत्रालय के लगभग 500 कार्यालय और 46 संगठन हैं। मुंबई स्थित ईसीजीसी के बड़े कार्यालय जैसे कुछ अत्यंत विशाल परिसर, जो स्वतंत्र रूप से कार्य करते रहेंगे, को छोड़कर अन्य सभी कार्यालयों को एक ही स्थान पर स्थापित करने की व्यवस्था के अंतर्गत लाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक ही स्थान पर स्थापित किए जाने वाले ये केंद्र केवल वहाँ फिजिकल रूप से स्थित संगठनों की सेवाएँ ही प्रदान नहीं करेंगे, बल्कि मंत्रालय के सभी 46 संगठनों और विभिन्न विभागों से संबंधित सेवाओं को भी सुगम बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि यदि किसी विशेष संगठन के अधिकारी किसी एकीकृत कार्यालय में फिजिकल रूप से मौजूद नहीं भी हों, तब भी लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उनसे संवाद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसी क्रम में, श्री गोयल ने निर्देश दिया कि प्रत्येक एकीकृत कार्यालय में पर्याप्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही, कार्यालय के आकार और आवश्यकताओं के अनुसार इन सुविधाओं को बढ़ाकर दो या तीन काउंटर तक करने की व्यवस्था भी की जाए।

श्री गोयल ने जोर देकर कहा कि इन केंद्रों को धीरे-धीरे सुविधा एवं संवर्धन कार्यालयों (फैसिलिटेशन एंड प्रमोशन ऑफिसेज) के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। इनकी भूमिका निवेश और विदेशी व्यापार को बढ़ावा देने, मार्गदर्शन चाहने वाले लोगों की सहायता करने, भारत में निवेश आकर्षित करने, देश में पूंजीगत व्यय को प्रोत्साहित करने तथा निर्यात संवर्धन पर केंद्रित होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन केंद्रों का उद्देश्य केवल लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सुगम बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

श्री गोयल ने कहा कि कार्यालयों को एक ही स्थान पर स्थापित करने, डिजिटलीकरण और फेसलेस मूल्यांकन की व्यवस्था लागू करने से पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता का विश्वास बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक राज्य में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की एकीकृत उपस्थिति से व्यवसायों और हितधारकों को यह भरोसा मिलेगा कि उन्हें एक ही स्थान पर सभी आवश्यक सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध हो सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों में व्याप्त अनिश्चितता एवं उतार-चढ़ाव के बीच कुशल सेवा वितरण के महत्व पर जोर देते हुए श्री गोयल ने कहा कि समय अत्यंत महत्वपूर्ण है और सफलता के लिए प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता निर्णायक है। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि प्रत्येक कार्यालय की कार्यप्रणाली सुविधाजनक, सहयोगात्मक, मैत्रीपूर्ण और सहायक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी कार्यालयों को एक ही छत के नीचे लाने से उनकी कार्यप्रणाली में निगरानी, नियंत्रण एवं संतुलन (चेक्स एंड बैलेंस) की व्यवस्था स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

श्री गोयल ने निर्देश दिया कि प्रत्येक कार्यालय में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएँ और उन्हें नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन के केंद्रीय सर्वर से जोड़ा जाए, ताकि देशभर में किए जा रहे कार्यों की रैंडम निगरानी की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य लगातार निगरानी करना नहीं है, बल्कि कार्यालयों की कार्यप्रणाली का समय-समय पर निरीक्षण करना तथा चोरी और इस तरह की अन्य घटनाओं से सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने आगे निर्देश दिया कि सभी कार्यालयों के पास उनके संचालन के लिए आवश्यक अनुमतियाँ और स्वीकृतियाँ होनी चाहिए, जिनमें अग्निशमन विभाग की मंजूरी तथा शॉप्स एंड एस्टेब्लिशमेंट्स एक्ट के तहत आवश्यक अनुमोदन शामिल हैं। कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाओं के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यालय में पुरुषों और महिलाओं के लिए बेहतर एवं आधुनिक शौचालय सुविधाएँ होने चाहिए। छोटे कार्यालयों में जहाँ उपयुक्त हो, वहाँ मल्टी-जेंडर शौचालयों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साथ ही, दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके अनुकूल शौचालयों की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन सुविधाओं की गुणवत्ता नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन के समान या उससे बेहतर होनी चाहिए। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए पर्याप्त संसाधन आवंटित करने के भी निर्देश दिए।

श्री गोयल ने इस बात पर भी जोर दिया कि जहाँ तक संभव हो, फर्नीचर और उपकरण मॉड्यूलर होने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि फर्नीचर, उपकरण, प्रकाश व्यवस्था और पर्दों सहित सभी प्रकार की खरीद घरेलू या स्वदेशी स्रोतों से की जानी चाहिए। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही इसके अपवाद की अनुमति होनी चाहिए।

श्री गोयल ने अधिकारियों से प्रक्रियाओं में लगने वाले समय को और कम करने तथा जहाँ भी संभव हो, निर्धारित समय-सीमा में निर्णय न होने पर स्वतः स्वीकृति (डीम्ड अप्रूवल) की व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने सचिवों, अपर सचिवों और संयुक्त सचिवों से विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के साथ नियमित रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या हाइब्रिड बैठकों के माध्यम से संवाद करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कागजी कार्रवाई को कम करने तथा मंत्रालय के कार्यालयों से सेवाएँ और अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने की प्रक्रिया को आम लोगों के लिए अधिक सरल एवं सुविधाजनक बनाने के उपाय लगातार तलाशे जाने चाहिए।

श्री गोयल ने कहा कि इस पहल से दोनों विभागों के भीतर तथा विभिन्न आंतरिक और बाहरी हितधारकों के बीच टीम भावना और सामूहिक कार्य संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। इससे मंत्रालय की विभिन्न शाखाओं के बीच समन्वय बेहतर होगा और समग्र कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह पहल मंत्रालय को अधिक समकालीन एवं आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के साथ-साथ विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की दिशा में उसकी भूमिका के लिए तैयार करने में भी सहायक होगी।

कई नए व्यापार समझौतों और नए बाजारों तक भारत की पहुँच बढ़ने के संदर्भ में मंत्रालय की बढ़ती जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हुए श्री गोयल ने कहा कि भारत वैश्विक मंच पर एक साहसी, आत्मविश्वासी और न रुकने वाली अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। उन्होंने वर्ष 2047 तक भारत को 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए देश को तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

श्री गोयल ने दोहराया कि मंत्रालय की सर्वोच्च प्राथमिकता देश के नागरिकों और व्यवसायों की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि नागरिक ईश्वर के समान हैं और सरकार का दायित्व है कि वह इसी भावना के साथ उनकी सेवा करे।

Comments

Comments (0)

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »