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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्टेम सेल थेरेपी के नियमन पर परामर्श जारी किया


मानक देखभाल के रूप में स्टेम सेल थेरेपी को केवल मंत्रालय द्वारा अनुमोदित सूची में शामिल बीमारियों/स्थितियों के लिए ही अनुमति दी जाएगी

ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के लिए स्टेम सेल का चिकित्सीय उपयोग आवश्यक नियामक स्वीकृतियों वाले नैदानिक परीक्षणों तक ही सीमित रहेगा

एएसडी के लिए स्टेम सेल थेरेपी सहित अप्रमाणित स्टेम सेल उपचारों को नियमित, मानक या व्यवसायिक नैदानिक सेवाओं के रूप में नहीं दिया जाएगा

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने स्टेम सेल थेरेपी के विनियमन के संबंध में क्लिनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 को अपनाने वाले सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 16 सितंबर 2026 को एक परामर्श जारी किया है। यह परामर्श ‘यश चैरिटेबल ट्रस्ट और अन्य’ बनाम ‘भारत संघ और अन्य’, डब्ल्यू.पी. (सी) 2022 की संख्या 369 [2026 आईएनएससी 96] मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट के 30 जनवरी 2026 के फैसले को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है।

यह परामर्श स्टेम सेल रिसर्च और थेरेपी से जुड़े मौजूदा नियमों को दोहराता है और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि स्टेम सेल थेरेपी को नियमित नैदानिक अभ्यास में मानक देखभाल के रूप में केवल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा अनुमोदित सूची में शामिल बीमारियों/स्थितियों के लिए ही अनुमति दी जाए।

परामर्श में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि ऑटिज्म में किसी भी प्रकार के स्टेम सेल के चिकित्सीय उपयोग को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और बायोटेक्नोलॉजी विभाग (डीबीटी) द्वारा संयुक्त रूप से जारी ‘स्टेम सेल अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश, 2017’ तथा भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी अन्य लागू सरकारी निर्देशों के अनुसार, केवल विधिवत अनुमोदित नैदानिक परीक्षणों तक ही सीमित रखा जाए।

मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अनुरोध किया है कि वे लागू नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का व्यापक प्रचार-प्रसार सभी संबंधित राज्य और जिला नियामक प्राधिकरणों तथा स्टेम सेल अनुसंधान, उपचार, प्रचार या प्रशासन में शामिल सरकारी एवं निजी क्लिनिकल प्रतिष्ठानों तक बड़े पैमाने पर पहुँचाएँ ।

परामर्श में स्टेम सेल थेरेपी से जुड़े नियमों का पालन न करने के परिणामों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया गया है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने 30 जनवरी 2026 के अपने फैसले के पैरा 151(xiii) में यह स्पष्ट किया है कि वैधानिक जनादेश का पालन न करने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। इसमें आईएमसी विनियम, 2002 के विनियमन 7.22 के तहत व्यावसायिक अवचार के साथ-साथ क्लिनिकल प्रतिष्ठान (पंजीकरण और विनियमन) अधिनियम, 2010 की धारा 32 और 40 के तहत कार्रवाई शामिल है, जिसमें पंजीकरण रद्द करने और जुर्माने का प्रावधान है।

इसके अनुसार, मंत्रालय ने संबंधित राज्य एवं जिला नियामक प्राधिकरणों और नैदानिक प्रतिष्ठानों से स्टेम सेल अनुसंधान और थेरेपी से जुड़े नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

नियामक स्थिति को सुदृढ़ करते हुए, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी)  ने 5 सितंबर 2026 के अपने परामर्श में इस बात को दोहराया है कि स्टेम सेल थेरेपी को केवल स्वीकृत स्थितियों के लिए ही मानक नैदानिक देखभाल के रूप में प्रदान किया जा सकता है। परामर्श में आगे कहा गया है कि स्वीकृत स्थितियों के इतर स्टेम सेल थेरेपी का अनधिकृत उपयोग, पर्चे पर लिख कर देना, प्रचार या विज्ञापन करना व्यावसायिक अवचार की श्रेणी में आएगा।

एनएमसी ने राज्य चिकित्सा परिषदों को यह सलाह भी दी है कि वे उनके ध्यान में लाए गए उल्लंघन के कथित मामलों की जांच करें और जहाँ उचित प्रक्रिया के बाद किसी पंजीकृत चिकित्सक द्वारा व्यावसायिक अवचार (नियमों का पालन नहीं किया जाना) साबित होता है तो वहाँ लागू वैधानिक एवं नियामक प्रावधानों के अनुसार उपयुक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।

एचएफडब्ल्यू/स्टेम सेल थेरेपी के नियमन पर सलाह/17 सितंबर 2026/1

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