नई पुनर्विकसित वेबसाइटें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस के विजन और “जनता द्वारा विज्ञान, जनता के लिए विज्ञान” के सिद्धांत को साकार करती हैं: डॉ. जितेंद्र सिंह
पुनर्विकसित वेबसाइटों पर अनुसंधान अनुदान, फेलोशिप, वैज्ञानिक योजनाओं तथा विद्यार्थियों, स्टार्ट-अप्स और नागरिकों के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर मिलेगी: डॉ. जितेंद्र सिंह
डीबीआईएम 3.0 के अनुरूप वेबसाइटों पर 22 भाषाओं में जानकारी, सार्वभौमिक सुगम्यता के टूल्स और विभिन्न उपकरणों पर निर्बाध उपयोग की सुविधा उपलब्ध
वेबसाइटों का पुनर्विकास सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्मों को ब्रांडिंग, सुगम्यता, सुरक्षा और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के साझा मानकों के अनुरुप बनाता है
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज शुरू की गई विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की नई पुनर्विकसित वेबसाइटें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी नागरिक-केंद्रित गवर्नेंस के विजन को दर्शाती हैं। इन वेबसाइटों के माध्यम से वैज्ञानिक जानकारी को देशभर के लोगों के लिए सुलभ, समावेशी और उपयोगी बनाया गया है।
इस पहल के जनहितकारी महत्व पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसका मार्गदर्शक सिद्धांत “जनता द्वारा विज्ञान, जनता के लिए विज्ञान” है, जिसके अंतर्गत विज्ञान को उपलब्ध, सुलभ और किफायती बनाया जा रहा है। उन्होंने वैज्ञानिक क्षेत्रों और उद्योगों के बीच प्रौद्योगिकियों के प्रवाह को सुगम बनाने के महत्व पर भी बल दिया। इससे उपयोगकर्ता एक साझा डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से अपनी आवश्यकताओं के अनुसार जानकारी और अवसरों की पहचान कर सकें।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने डीएसटी की पुनर्विकसित आधिकारिक वेबसाइटों www.dst.gov.in और www.most.gov.in का शुभारंभ किया । इन वेबसाइटों को डिजिटल ब्रांड पहचान मैनुअल (डीबीआईएम) 3.0 और भारतीय सरकारी वेबसाइटों और ऐप्स (जीआईजीडब्ल्यू) 3.0 के लिए दिशानिर्देंश के अनुरुप विकसित किया गया है। इस अवसर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे के साथ वरिष्ठ अधिकारी तथा वेबसाइट विकास पहल से जुड़े प्रतिनिधि उपस्थित थे। वेबसाइटों का पुनर्विकास डीएसटी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), परियोजना प्रबंधन दल और विकास एजेंसी के संयुक्त प्रयास से किया गया। वेबसाइटों की सामग्री विभाग के आंतरिक प्रभागों द्वारा संकलित और सत्यापित की गई है।
मंत्री महोदय ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों, शोध अध्येताओं, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों, नवाचारकर्ताओं, स्टार्ट-अप्स, उद्यमियों, मीडिया पेशेवरों और नागरिकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा। इस पर डीसटी की योजनाओं, अनुदानों, फेलोशिप, वैज्ञानिक कार्यकर्मों और अन्य अवसरों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। वेबसाइटों की पुनः डिजाइन की गई सूचना संरचना से उपयोगकर्ता पात्रता मानदंड, आवेदन संबंधी दिशानिर्देश, प्रस्ताव आंमत्रण, पुरस्कार, परिणाम और आधिकारिक अधिसूचनाओं सहित प्रासंगिक जानकारी अधिक आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। इन संसाधनों को सुव्यवस्थित प्रारूप में एकसाथ उपलब्ध कराने से सरकारी जानकारी तक पहुंचने में लगने वाला प्रयास कम होगा और भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम में जनभागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
वेबसाइटों एक मानकीकृत सूचना संरचना विकसित की गई है, जिसमें डीसटी के बारे में जानकारी, विभिन्न प्रभाग, कार्यक्रम एवं योजनाएं, सेवाएं, अवसर, दस्तावेज तथा समाचार एवं नवीनतम अपडेट जैसे प्रमुख अनुभाग शामिल हैं। योजनाओं और अवसरों को खोजने के लिए एक सुव्यव्थित सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता अनुसंधान एवं विकास के लिए वित्तपोषण, प्रस्ताव आमंत्रण, पुरस्कार और आवेदन प्रपत्रों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक केंद्रिकृत दस्तावेंज भंडार के माध्यम से दिशानिर्देश, नितीगत दस्तावेंज, अधिसूचनाएं, रिपोर्ट और प्रशासनिक प्रपत्र उपलब्ध कराए गए हैं।
डीसटी के विभिन्न प्रभागों, संगठनात्मक पदानुक्रम और अधिकारियों के संपर्क विवरण की सूचियों को नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है, जिससे वेबसाइट पर नैविगेशन और संबंधित संस्थागत जानकारी तक पहुंच आसान होगी। अंतराष्ट्रीय हितधारकों के लिए इस प्लेटफॉर्म पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग से संबंधित समर्पित जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।
नई वेबसाइटों की एक प्रमुख विशेषता भाषिणी का एकीकरण है, इसके माध्यम से 22 भाषाओं में सामग्री उपलब्ध होगी। इससे विविध भाषायी पृष्ठभूमि वाले लोगों तक वैज्ञानिक जानकारी की पहुंच बढ़ेगी। वेबसाइटों में सार्वभौमिक सुगम्यता की सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। इनमें अक्षरों के आकार को समायोजित करने, उच्च कंट्रास्ट वाले डिस्पले मोड, लिंक को हाइलाइट करने, अक्षरों के बीच की दूरी और पंक्तियों के बीच की दूरी को समायोजित करने तथा स्क्रीन-रीडर के अनुकूल उपयोग की सुविधाएं शामिल हैं।
वेबासाइटों की प्रतिक्रियाशील डिज़ाइन व्यवस्था के कारण इनका उपयोग डेस्कटॉप, टैबलेट और मोबाइल उपकरणों पर किया जा सकता है। इससे विभिन्न उपकरणों पर सामग्री की पठनीयता और उपयोग में आसानी बनी रहती है। उन सुविधाओं का उद्देश्य विभिन्न आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं और नागरिकों के लिए सरकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी जानकारी को अधिक सुलभ बनाना है।
यह पुनर्विकास मार्च 2025 में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) द्वारा डीबीआईएम 3.0 के शुभारंभ के बाद किया गया है। यह मैनुअल सरकारी मंत्रालयों और विभागों की दृश्य संबंधी पहचान, सूचना संरचना, सामग्री प्रस्तुति और समग्र डिजिटल उपस्थति के लिए एक साझा फ्रेमवर्क प्रदान करता है। इसके पूरक के रुप में जीआईजीडब्ल्यू 3.0 वेबसाइटों की गुणवत्ता, सुगम्यता, साइबर सुरक्षा, उपयोगिता और उनके संपूर्ण जीवनचक्र के प्रबंधन से संबंधित आवश्यक मानक निर्धारित करता है।
यह पहल केंद्र सरकार के डिजिटल स्वरुप को अधिक सुव्यव्स्थित और एकरूप बनाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। इसके अंतर्गत मानकीकृत ब्रांडिंग, नेविगेशन और सामग्री प्रस्तुति के माध्यम से सरकारी वेबसाइटों में अधिक एकरूपता लायी जा रही है। इस प्रकार वेबसाइटों का पुनर्विकास केवल उनके दृश्य स्वरूप में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामग्री का पुनर्गठन, उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार और डिजिटल सामग्री के प्रभावी प्रबंधन के लिए स्थायी व्यवस्थाओं का विकास भी शामिल है।
इन वेबसाइटों को मॉड्यूलर सामग्री प्रंबधन प्रणाली (सीएमएस) का समर्थन प्राप्त है। इससे सामग्री को अद्यतन करना, भविष्य में विस्तार करना और बाहरी विज्ञान एवं प्रौद्योगीकी अनुप्रयोगों को एकीकृत करना आसान होगा। सुरक्षा उपायों में एसएसएल/टीएलएस एन्क्रिप्शन, साइबर सुरक्षा आकलन और सीईआरटी-आईएन के लागू दिशानिर्देशों का अनुपालन शामिल है। कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (सीडीएन) का एकीकरण वेबसाइटों की लोडिंग गति बढ़ाने, प्रणाली की स्थिरता बनाए रखने और सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक होगा। ये सुविधा विशेष रूप से अधिक ट्रैफिक वाले समय में उपयोगी होगी, जैसे की योजनाओं के परिणाम घोषित होने और आवेदन की अंतिम तिथियों के दौरान। समाचार एवं नवीनतम अपडेट वाले अनुभाग को भी नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है। इसमें प्रैस विज्ञप्तियां, प्रस्ताव आंमत्रण, परिणाम और घोषणाएं एकसाथ उपलब्ध होंगी, जिससे उपयोगकर्ता प्रासंगिक वैज्ञानिक जानकारी और अवसरों तक अधिक सुविधाजनक ढंग से पहुंच सकेंगे। जानकारी को आसानी से खोजने की सुविधा, बहुभाषी पहुंच, सार्वभौमिक सुगम्यता और मानकीकृत डिजिटल फ्रेमवर्क के माध्यम से पुनर्विकसित वेबसाइटों का उद्देश्य सरकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संसाधनों में पारदर्शिता और जन सुलभता को मजबूत करना है। ये पहल एक अधिक समावेशी और नागरिक-केंद्रित डिजिटल परिवेश को बढ़ावा देती है, जिसमें विद्यार्थी, शोधकर्ता, संस्थान उद्यमी और नागरिक वैज्ञानिक कार्यक्रमों, अनुसंधान के अवसरों तथा प्रौद्योगीकीय विकास से अधिक आसानी से जुड़ सकेंगे।




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