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कर्नाटक के मैसूरु में 9 दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 संपन्न


पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को प्रदर्शित करने वाले मेले में 12 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के हजारों लोगों ने शिरकत की

मेले में 83 स्टॉल लगाए गए, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों के थे जिनमें 37 महिला कारीगर शामिल थीं

माननीय मंत्री श्री रामदास आठवले और केन्द्रीय सचिव श्री सुधांश पंत ने मैसूरु में शिल्प समागम मेले का दौरा किया

कर्नाटक के मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान में आयोजित नौ दिवसीय शिल्प समागम मेला 2026 हजारों लोगों की सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस मेले का आयोजन सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा किया गया था।

इस मेले का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अन्य पिछड़ा वर्गों और सफाई कर्मचारियों के लाभार्थियों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक हस्तशिल्प एवं हथकरघा उत्पादों के विपणन के लिए एक मंच उपलब्ध कराना था। इनमें मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत तीन राष्ट्रीय निगमों के सहयोग से लाभान्वित कारीगर भी शामिल थे। ये तीन निगम हैं—राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसकेएफडीसी)।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) के उप महाप्रबंधक श्री रजनीश बैंकर ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य कारीगरों के लिए बाजार संपर्क को मजबूत बनाना, पारंपरिक शिल्पकला को बढ़ावा देना और लक्षित समूहों के लिए आजीविका के टिकाऊ अवसर सृजित करना है।

उन्होंने बताया कि मंत्रालय वर्ष 2022 से शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है और अब तक आयोजित ऐसे 13 मेलों के माध्यम से 975 कारीगर लाभान्वित हो चुके हैं।

श्री बैंकर ने कहा कि मैसूरु में आयोजित यह मेला वित्त वर्ष 2026–27 का पहला शिल्प समागम मेला था।

अधिकारी ने बताया कि मेले में कुल 83 स्टॉल लगाए गए थे, जिनमें से 80 स्टॉल कारीगरों को आवंटित किए गए थे। इनमें 37 महिला कारीगर शामिल थीं। आगंतुकों के लिए पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले खाद्य स्टॉल भी लगाए गए थे।

उन्होंने आगे बताया कि मेले में 12 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के कारीगरों ने भाग लिया। इनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान, पुडुचेरी, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश शामिल थे।

उप महाप्रबंधक ने बताया कि प्रदर्शनी में पारंपरिक उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की गई। इनमें हस्तशिल्प की वस्तुएं, हथकरघा साड़ियां, मसाले, अचार, अगरबत्तियां, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंट वाले उत्पाद, कांजीवरम साड़ियां, चमड़े के सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग एवं पर्स, टेराकोटा उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, शीशम की लकड़ी से बने दीवार पर सजाने वाले उत्पाद तथा बेडशीट और कुशन कवर शामिल थे।

यह मंच कारीगरों को अपने उत्पादों को बड़ी संख्या में दर्शकों के सामने प्रदर्शित करने और संभावित ग्राहकों से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। साथ ही, यह भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने में भी सहायक है।

अधिकारी ने आगे बताया कि शिल्प समागम मेला सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा इसके तीन राष्ट्रीय निगमों—राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (एनबीसीएफडीसी) और राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफडीसी)—की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी प्रसारित करने का मंच भी है। इस पहल का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों के लिए उपलब्ध सहायता और विकास के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना तथा उद्यमिता और आर्थिक सशक्तीकरण को प्रोत्साहित करना है।

मंत्रालय ने भारत और विदेशों में विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लक्षित समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए भारत ट्यूलिप (पारंपरिक कारीगर आजीविका उन्नयन कार्यक्रम) भी शुरू किया है। इस पहल के अंतर्गत उत्पादों की दृश्यता बढ़ाने और उनकी ऑनलाइन बिक्री को सुगम बनाने के लिए उन्हें ‘भारत ट्यूलिप’ ब्रांड के तहत प्रस्तुत किया जाता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक कला रूपों का संरक्षण करते हुए कारीगरों की आजीविका को सुदृढ़ करना और भारत की समृद्ध शिल्पकला को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना है।

अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय कारीगरों को निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराकर तथा यात्रा व्यय, दैनिक भत्ता, सामान के परिवहन और दोपहर एवं रात्रि के भोजन सहित अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करके मेले में उनकी भागीदारी को सुगम बनाता है। इस सहायता से कारीगर स्टॉल का किराया और भागीदारी से संबंधित निर्धारित खर्च वहन किए बिना मेले में शामिल हो सकते हैं तथा अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर सकते हैं।

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रामदास आठवले ने शिल्प समागम मेले के दौरे के दौरान समाज के कमजोर वर्गों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तीकरण के प्रति केन्‍द्र सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर किया।

मंत्री ने मेले में लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया, जहां हस्तशिल्प, हथकरघा साड़ियां, मसाले, अचार, अगरबत्तियां, शहद से बने उत्पाद, ब्लॉक प्रिंट वाली वस्तुएं, चमड़े के सामान, लकड़ी के खिलौने, बैग, पर्स, टेराकोटा उत्पाद, कृत्रिम आभूषण, शीशम की लकड़ी से बनी दीवार सजावट की वस्तुएं तथा बेड और कुशन कवर सहित विविध प्रकार के उत्पाद प्रदर्शित किए गए थे। उन्होंने पारंपरिक व्यंजन परोसने वाले खाद्य स्टॉलों का भी दौरा किया, जिन्होंने आगंतुकों के अनुभव को और भी बेहतर बनाया।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के केन्‍द्रीय सचिव श्री सुधांश पंत ने भी मेले का दौरा किया।

मैसूरु स्थित दशहरा प्रदर्शनी मैदान के दौरे के दौरान सचिव ने स्टॉलों का निरीक्षण किया और स्टॉल प्रबंधकों तथा आगंतुकों के साथ बातचीत की।

केन्‍द्रीय सचिव श्री सुधांश पंत मंत्रालय की कार्यान्वयनाधीन योजनाओं, कार्यक्रमों और पहलों की व्यापक समीक्षा करने के लिए राज्य के सामाजिक कल्याण विभाग के साथ बैठक हेतु मैसूरु के दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर थे।

श्री पंत ने कहा कि ऐसी पहलों के माध्यम से मंत्रालय बाजार तक पहुंच को सुदृढ़ करने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और वंचित समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

शिल्प समागम मेले ने आगंतुकों को भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को देखने-परखने के साथ-साथ कारीगरों की आजीविका को सहयोग देने का अवसर प्रदान किया।

उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2026–27 के दौरान मंत्रालय गुवाहाटी, नई दिल्ली के दिल्ली हाट, जोधपुर और लखनऊ में अतिरिक्त शिल्प समागम मेलों का आयोजन कर रहा है।

मंत्रालय और इसके तीनों राष्ट्रीय निगम प्रमुख प्रदर्शनियों में भी भाग लेंगे। इनमें 14 से 27 नवम्‍बर, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाला भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ) 2026 तथा फरवरी 2027 में फरीदाबाद में आयोजित होने वाला सूरजकुंड मेला शामिल हैं।

शिल्प समागम मेला और भारत ट्यूलिप जैसी पहलों के माध्यम से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय लक्षित समूहों के कारीगरों के लिए बाजार तक पहुंच, उद्यमिता और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। साथ ही, मंत्रालय भारत की पारंपरिक कलाओं और शिल्पों के संरक्षण तथा उन्हें व्यापक पहचान दिलाने के प्रयासों को भी समर्थन प्रदान कर रहा है।

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