आंध्र प्रदेश के चेवुरी अंजनेयुलु की कहानी
आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में कचरा उठाने वाले श्री चेवूरी अंजनेयुलु को नमस्ते योजना के अंतर्गत ‘स्वच्छता उद्यमी योजना’ (एसयूवाई) से मिली मदद ने अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने एवं अपने परिवार की आर्थिक सुरक्षा बेहतर बनाने में मदद की है। उन्होंने अपनी पत्नी और दो बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए सात वर्षों तक काम किया था।
अनुसूचित जनजाति समुदाय से आने वाले 25 वर्षीय श्री अंजनेयुलु ने बहुत कम उम्र में अपने माता-पिता के साथ कचरा उठाने का काम करना शुरू कर दिया था। आर्थिक तंगी के कारण वह स्कूल नहीं जा पाए। उन्हें सामाजिक भेदभाव का भी सामना करना पड़ा और बुनियादी सुविधाओं एवं सेवाओं तक उनकी पहुंच सीमित रही।
यह सहायता मिलने से पहले, कचरा उठाने से होने वाली आय से उनके लिए घर खर्चों को पूरा करना और बच्चों के भविष्य की योजना बनाना बहुत मुश्किल था। वह अपने परिवार की जीवनशैली को सुधारना एवं बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहते थे।
19 जून 2023 को, श्री अंजनेयुलु और तीन अन्य सदस्यों को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से एसयूवाई के तहत एक ग्रुप परियोजना के लिए सहायता मिली। परियोजना की कुल लागत 35 लाख रुपये थी, जिसमें 17.5 लाख रुपये ऋण और 17.5 लाख रुपये की अग्रिम पूंजी सब्सिडी के रूप में थी।

इस मदद से उन्हें अपनी आजीविका को बेहतर बनाने में मदद मिली। अब वह इस योजना के माध्यम से प्रति माह लगभग 10,000 रुपये ज़्यादा कमाते हैं, जिससे उन्हें अपने परिवार के खर्चों को आसानी से पूरा करने में मदद मिलती है।
उनके दोनों बच्चे अंग्रेजी-माध्यम वाले प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं। अतिरिक्त आमदनी से उन्हें बच्चों की पढ़ाई में मदद मिली है और वह उन्हें बेहतर अवसर दिलाने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिनकी उम्मीद वह लंबे समय से कर रहे थे।
श्री अंजनेयुलु के लिए इस समर्थन का मतलब उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होना है जिससे उनके परिवार का भविष्य ज्यादा सुरक्षित हो गया है। उनके अनुभव से पता चलता है कि जीवन यापन के लिए मदद मिलने से कचरा उठाने वाले भी अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं और अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर सकते हैं।
Comments (0)